Barabanki News: बाराबंकी के बंकी ब्लॉक स्थित लखनऊ पब्लिक स्कूल पर RTE Act 2009 के तहत ऑनलाइन लॉटरी से चयनित 12 बच्चों को प्रवेश न देने का आरोप लगा है।
अभिभावकों ने जिलाधिकारी से शिकायत कर तत्काल दाखिला और कार्रवाई की मांग की है।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 25 जुलाई 2026
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित वर्ग (Disadvantaged Group) के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समान अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लागू निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) बाराबंकी में निजी स्कूलों की कथित मनमानी के चलते सवालों के घेरे में है। ताजा मामला बंकी विकासखंड के असैनी मोड़ स्थित लखनऊ पब्लिक स्कूल का है, जहां RTE के तहत ऑनलाइन लॉटरी से चयनित 12 बच्चों को तीन महीने बाद भी प्रवेश नहीं दिया गया।
अभिभावकों का आरोप है कि शिक्षा विभाग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद विद्यालय प्रबंधन जानबूझकर प्रवेश प्रक्रिया टालता रहा और अब खुले तौर पर आरटीई के तहत चयनित बच्चों को दाखिला देने से इनकार कर रहा है।
ऑनलाइन लॉटरी में चयनित हुए थे 12 बच्चे, फिर भी नहीं मिला प्रवेश
अभिभावकों के अनुसार, शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के अंतर्गत ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से उनके बच्चों का चयन हुआ था।
इसके बाद खंड शिक्षा अधिकारी (BEO), बंकी ने 30 अप्रैल 2026 को विद्यालय प्रबंधन को पत्र जारी कर चयनित सभी बच्चों का तत्काल प्रवेश सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।
लेकिन आरोप है कि लगभग तीन महीने बीत जाने के बावजूद विद्यालय प्रबंधन ने किसी भी बच्चे को प्रवेश नहीं दिया।

बार-बार मांगे गए नए दस्तावेज, फिर कहा- “जो करना है कर लो”
अभिभावकों का आरोप है कि उन्होंने विद्यालय द्वारा मांगे गए सभी आवश्यक दस्तावेज कई बार जमा किए। इसके बावजूद प्रबंधन लगातार नए-नए दस्तावेजों की मांग करता रहा।
अब विद्यालय प्रबंधन की ओर से कथित रूप से साफ शब्दों में कहा जा रहा है कि—
“आरटीई के तहत किसी भी बच्चे का प्रवेश नहीं लिया जाएगा, जो करना है कर लो।”
यदि यह आरोप सही हैं, तो यह न केवल आरटीई अधिनियम, 2009, बल्कि शिक्षा विभाग और शासन के स्पष्ट निर्देशों की भी अवहेलना मानी जाएगी।
तीन महीने से शिक्षा के अधिकार से वंचित बच्चे
अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय प्रबंधन की इस हठधर्मिता का सीधा असर बच्चों के भविष्य पर पड़ रहा है।
उनका कहना है कि—
- बच्चों का शैक्षणिक सत्र प्रभावित हो रहा है।
- वे अपने वैधानिक शिक्षा अधिकार से वंचित हैं।
- शासन की मंशा के विपरीत निजी विद्यालय मनमानी कर रहे हैं।
अभिभावकों का आरोप है कि यदि विभागीय आदेशों का पालन ही नहीं कराया जाएगा तो RTE कानून का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा।
जिलाधिकारी से शिकायत, जांच और कार्रवाई की मांग
पीड़ित अभिभावकों ने पूरे मामले की शिकायत जिलाधिकारी बाराबंकी से करते हुए मांग की है कि—
- RTE में चयनित सभी 12 बच्चों का तत्काल प्रवेश सुनिश्चित कराया जाए।
- पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- दोषी विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
- भविष्य में किसी भी RTE चयनित बच्चे के साथ ऐसी स्थिति न बनने दी जाए।
कार्रवाई नहीं हुई तो शासन तक पहुंचेगा मामला
अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे शासन, शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों तथा अन्य सक्षम प्राधिकारों के समक्ष भी न्याय की मांग करेंगे।
उनका कहना है कि शिक्षा का अधिकार कानून गरीब और वंचित बच्चों को समान अवसर देने के लिए बनाया गया है, लेकिन यदि निजी विद्यालय ही इसका पालन नहीं करेंगे तो यह कानून केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा।
क्या कहता है RTE Act की धारा 12(1)(ग)?
- निजी गैर-सहायता प्राप्त विद्यालयों में प्रवेश स्तर पर 25% सीटें आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) एवं वंचित वर्ग (DG) के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं।
- चयनित बच्चों को निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराना विद्यालय की कानूनी जिम्मेदारी है।
- शासन और शिक्षा विभाग के निर्देशों का पालन करना सभी मान्यता प्राप्त विद्यालयों के लिए अनिवार्य है।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद












