बाराबंकी में समाजवादी पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है।
रामनगर विधायक फरीद महफूज किदवई के खिलाफ सोशल मीडिया पर ‘गुमशुदगी’ पोस्टर वायरल
2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 24 मई 2026
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी बीच राजधानी लखनऊ से सटे बाराबंकी जिले में समाजवादी पार्टी के अंदर चल रही गुटबाजी अब खुलकर सामने आने लगी है। जिले की रामनगर विधानसभा सीट पर पार्टी के भीतर ही विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। सोशल मीडिया पर वर्तमान सपा विधायक फरीद महफूज किदवई और उनके करीबी नेताओं के खिलाफ चल रहे पोस्टरों और टिप्पणियों ने सियासी हलचल बढ़ा दी है।
स्थानीय राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को 2027 चुनाव से पहले टिकट की लड़ाई और वर्चस्व की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। आम मतदाताओं के बीच भी इस मुद्दे को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

विधायक की “गुमशुदगी” वाला पोस्टर बना चर्चा का विषय
इन दिनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक और व्हाट्सएप पर एक पोस्टर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें रामनगर से समाजवादी पार्टी विधायक फरीद महफूज किदवई की “गुमशुदगी” की बात लिखी गई है।
पोस्टर में लिखा गया है—
“!! गुमशुदा की तलाश !!
रामनगर समाजवादी पार्टी के विधायक माननीय फरीद महफूज किदवई आप जहां कहीं भी हों वापस आ जाएं, कोई आपसे कुछ नहीं कहेगा…
— निवेदक: चांद बाबू”

इस पोस्टर के वायरल होने के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। खास बात यह है कि इसे शेयर करने वाले अधिकतर लोगों को समाजवादी पार्टी के ही नेता अरविंद सिंह गोप का समर्थक बताया जा रहा है।
सोशल मीडिया पोस्ट से बढ़ा सियासी विवाद
रामनगर विधानसभा क्षेत्र के बिठौरा गांव निवासी और खुद को समाजवादी पार्टी का कार्यकर्ता बताने वाले अमित सिंह आजाद ने भी फेसबुक पर विधायक को लेकर कई तीखी टिप्पणियां पोस्ट की हैं।
एक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि
“कौन है जो विधायक जी के बारे मे गलत अफवाह फैला रहे है विधायक जी अपने बेटे फैजान किदवई के लिए कुर्सी से टिकट लेने के फिराक में लगे हैं इसलिए क्षेत्र में कम आते हैं और दूसरी बात कि विधायक जी देश के यशस्वी प्रधानमंत्री जी के दिशा-निर्देश पर डीजल तेल की बचत कर रहे हैं, तीसरी बात कि इस समय गर्मी अपने प्रचंड रूप में हावी है इसलिए विधायक जी क्षेत्र में नहीं आ रहे हैं, कहीं लूं न लग जाए, वैसे विधायक जी को हमने भी लगभग चार साल से नहीं देखा है, किसी को अगर दिखाई पड़ेंगे तो मेरा सलाम कहना शायद हमारे नाम को विधायक जी भूल गये होंगे क्योंकि उनके पास भी दो चापलूस चापलूसी करते हैं”

वहीं दूसरी पोस्ट में उन्होंने दावा किया कि
“जितने भी फरीद महफूज किदवई के समर्थक हैं या उनके कराए गये कार्यों से खुश हैं तो उन सबसे निवेदन है कि इनको या इनके पुत्र या इनके चेले किसी एक को मैदान में रामनगर से फिर से टिकट दिलाऐ फिर पता चलेगा कि कौन कौन वोट मांगने क्षेत्र में जाएगा और मुद्दा क्या होगा, अगर पचास हजार से पूर्व विधायक शरद अवस्थी जी इनको नहीं हराए तो हम राजनीति से संन्यास ले लेंगे”

इन पोस्टों में राजनीतिक कटाक्ष के साथ “जय समाजवाद” और “जय महाराणा” जैसे नारे भी लिखे गए हैं, जिससे राजनीतिक और जातीय समीकरणों की चर्चा भी तेज हो गई है।
2022 चुनाव के बाद से बढ़ी अंदरूनी खींचतान
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक रामनगर सीट पर मौजूदा विवाद की जड़ें 2022 विधानसभा चुनाव से जुड़ी हुई हैं। उस समय समाजवादी पार्टी से अरविंद सिंह गोप और पूर्व मंत्री राकेश कुमार वर्मा दोनों टिकट के प्रबल दावेदार थे।
लेकिन पार्टी नेतृत्व ने संतुलन साधने के लिए वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री फरीद महफूज किदवई को रामनगर से चुनाव मैदान में उतार दिया था। अरविंद सिंह गोप को दरियाबाद और राकेश कुमार वर्मा को कुर्सी विधानसभा सीट से टिकट दिया गया था।
2022 के चुनाव में जहां रामनगर सीट पर फरीद महफूज किदवई सिटिंग विधायक व भाजपा प्रत्याशी शरद अवस्थी को हराने में सफल रहे, वहीं अरविंद सिंह गोप को दरियाबाद सीट पर भाजपा के सतीश चंद्र शर्मा के हाथों शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था।

रामनगर सीट पर टिकट को लेकर तेज हुई सियासी सरगर्मी
स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 चुनाव करीब आते ही रामनगर विधानसभा सीट पर टिकट की दावेदारी को लेकर अंदरखाने संघर्ष तेज हो गया है। चूंकि फरीद महफूज किदवई मौजूदा विधायक हैं, इसलिए टिकट के लिए उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है।

अरविंद सिंह गोप के समर्थकों के बीच यह चर्चा है कि 2027 में दरियाबाद सीट पर भाजपा के सिटिंग विधायक और वर्तमान सरकार में राज्य मंत्री सतीश चंद्र शर्मा के मजबूत जनाधार के चलते अरविंद सिंह गोप की दाल गलना लगभग असंभव जैसा ही है।
वही जनपद की अन्य किसी सीट के समीकरण भी उनके पक्ष में नहीं नज़र आ रहे है। ऐसे में क्षत्रिय मतदाताओं की अच्छी जनसंख्या वाली रामनगर सीट ही उनके लिए सबसे उपयुक्त विकल्प हो सकती है। इसी कारण सोशल मीडिया के जरिए माहौल बनाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं।
कार्यकर्ताओं में बढ़ रही नाराजगी, हाईकमान से हस्तक्षेप की मांग
स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी नेताओं की आपसी खींचतान पहले भी समाजवादी पार्टी को नुकसान पहुंचा चुकी है। कभी बाराबंकी को सपा का मजबूत गढ़ माना जाता था, लेकिन पंचायत चुनाव से लेकर विधानसभा और लोकसभा चुनाव तक पार्टी को कई बार हार का सामना करना पड़ा।
हालांकि 2024 लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन की जीत से कार्यकर्ताओं में नई उम्मीद जगी थी, लेकिन अब दोबारा खुलकर सामने आई गुटबाजी ने कार्यकर्ताओं को निराश कर दिया है।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि पार्टी हाईकमान ने समय रहते इस अंदरूनी संघर्ष पर नियंत्रण नहीं किया तो आने वाले विधानसभा चुनाव में इसका सीधा नुकसान समाजवादी पार्टी को उठाना पड़ सकता है।
रिपोर्ट – कामरान अल्वी / निरंकार त्रिवेदी















