Barabanki News:
बाराबंकी के जिला और महिला अस्पताल में आउटसोर्स सुरक्षा कर्मियों को हटाने के आदेश से आक्रोश। वेतन, पीएफ कटौती और बकाया भुगतान को लेकर कर्मचारियों ने सीएमओ को सौंपा ज्ञापन।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 03 फरवरी 2026
जनपद के सरकारी अस्पतालों में आउटसोर्सिंग पर तैनात सुरक्षा कर्मियों को हटाने के आदेश के बाद हड़कंप मच गया है। जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में कार्यरत सुरक्षा कर्मियों में इस फैसले को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है। कर्मचारियों का कहना है कि बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के सेवा से हटाया जाना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है, जिससे उनके सामने रोज़ी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
जानकारी के अनुसार, बाराबंकी जिला पुरुष और महिला अस्पताल में फरवरी 2024 से आईटी वर्ल्ड प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के माध्यम से आउटसोर्सिंग पर सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई थी। कई कर्मी लंबे समय से अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे हैं, इसके बावजूद अब अचानक उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू की दी गई है।
सुरक्षा कर्मियों का आरोप है कि आउटसोर्सिंग के नियमों के अनुसार ये पद रिटायर्ड सैनिकों के लिए आरक्षित होते हैं, लेकिन व्यवहार में रिटायर्ड सैनिक इस कार्य में रुचि नहीं लेते। ऐसे में निजी कंपनियां सरकार से ठेका लेकर सामान्य नागरिकों से काम कराती हैं और उनका आर्थिक शोषण किया जाता है।
कर्मचारियों के मुताबिक, कंपनी द्वारा वेतन ₹12,000 दर्शाया जाता है, लेकिन वास्तव में उन्हें केवल ₹9,000 ही भुगतान किया जाता है, जिसका भुगतान न तो समय पर किया जाता और न ही कर्मचारियों को उसका स्पष्ट विवरण दिया जाता है। इसके अलावा, महिला अस्पताल में तैनात कई सुरक्षा कर्मियों को पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं मिला है।
जैसे ही हटाए जाने की सूचना मिली, सभी आउटसोर्स सुरक्षा कर्मी जिला अस्पताल परिसर में एकत्र हो गए और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) अवधेश कुमार यादव को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से कर्मियों ने मांग की कि उन्हें पुनः सेवा में रखा जाए और वेतन व पीएफ से जुड़ी समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए।
सुरक्षा कर्मियों ने कहा कि वे पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। इसके बावजूद बिना नोटिस हटाया जाना न केवल अमानवीय है, बल्कि उनके परिवारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी है। उन्होंने प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए आदेश पर पुनर्विचार करने की मांग की।
वही, सीएमओ अवधेश कुमार यादव ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए मामले में उचित कार्रवाई और इसे उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। हालांकि जब उनसे पूछा गया कि आउटसोर्सिंग का नया ठेका किस कंपनी को दिया जा रहा है, तो उन्होंने इस पर कोई स्पष्ट जानकारी देने से परहेज किया, जिससे कर्मचारियों में असंतोष और बढ़ गया।
कर्मचारियों का आरोप है कि आउटसोर्सिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है और ठेका देने में धांधली की जाती है। साथ ही बाद में अपने चहेते लोगों को नौकरी देने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।
इस मामले में प्रभावित सुरक्षा कर्मियों में संजीव कुमार, जितेन्द्र कुमार, अब्दुल बारी, उमेश, प्रदीप कुमार, मोनू, विपिन यादव, अमित कुमार और चंद्र प्रकाश शामिल हैं।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले पर क्या रुख अपनाता है और वर्षों से सेवा दे रहे सुरक्षा कर्मियों को न्याय मिल पाता है या नहीं।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद / उस्मान















