बाराबंकी के राज्यानुदानित मदरसा दारुल उलूम, पीरबटावन में फर्जी प्रबंध समिति, अवैध नियुक्तियों और अनियमितताओं के आरोपों पर शासन ने जांच के आदेश दिए हैं।
RTI एक्टिविस्ट मोहम्मद तल्हा अंसारी की शिकायत पर एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी गई है।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 05 जुलाई 2026
बाराबंकी के राज्यानुदानित मदरसा दारुल उलूम, पीरबटावन को लेकर दायर शिकायत पर उत्तर प्रदेश शासन ने बड़ा कदम उठाया है। आरटीआई एवं ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट मोहम्मद तल्हा अंसारी द्वारा मदरसे में कथित फर्जी प्रबंध समिति, अवैध नियुक्तियों, वित्तीय अनियमितताओं और आधारभूत सुविधाओं की कमी समेत कई गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद शासन ने मामले की जांच के आदेश जारी किए हैं। शासन ने गठित जांच समिति को एक सप्ताह के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
RTI एक्टिविस्ट की शिकायत पर शासन ने लिया संज्ञान
रसौली निवासी सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट मोहम्मद तल्हा अंसारी ने 25 मई 2026 को प्रमुख सचिव, अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग, उत्तर प्रदेश शासन को विस्तृत शिकायत भेजी थी। शिकायत में राज्यानुदानित मदरसा दारुल उलूम, पीरबटावन के संचालन से जुड़े कई बिंदुओं पर गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था।
शिकायत का संज्ञान लेते हुए अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग ने निदेशक, अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय को जांच कर बिंदुवार रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
दो सदस्यीय जांच समिति गठित
शासन के निर्देश के बाद निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण शीलधर सिंह यादव ने मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय समिति गठित की है।
समिति में शामिल अधिकारी:
- एच.पी. अम्बेडकर, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी (निदेशालय सम्बद्ध)
- सोन कुमार, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी (निदेशालय सम्बद्ध)
समिति को निर्देश दिया गया है कि शिकायतकर्ता का पक्ष सुनने, आवश्यक दस्तावेजों एवं साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट निर्धारित समय सीमा में प्रस्तुत की जाए।
शिकायत में लगाए गए प्रमुख आरोप
फर्जी प्रबंध समिति बनाकर नियुक्तियों का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि तत्कालीन अधिकारियों की कथित मिलीभगत से मदरसे में फर्जी प्रबंध समिति का गठन कर लगभग एक दर्जन शिक्षकों की नियुक्तियां कर दी गईं, जो नियमों के विपरीत हैं।
अभिलेखों में कथित कूटरचना का आरोप
शिकायत में दावा किया गया है कि मदरसे की सोसायटी संबंधी पत्रावली में मूल दस्तावेज हटाकर कथित रूप से फर्जी सदस्य सूची संलग्न कर दी गई। साथ ही कई अभिलेखों में हस्ताक्षर और मुहर न होने के बावजूद उन्हें वैध दर्शाने का आरोप लगाया गया है।
भवन और मूलभूत सुविधाओं पर उठाए सवाल
शिकायत में कहा गया है कि मदरसा निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है। आरोप है कि:
- भवन का अधिकांश हिस्सा व्यावसायिक दुकानों के रूप में उपयोग हो रहा है।
- छात्र-छात्राओं के लिए पर्याप्त कक्षाएं नहीं हैं।
- बरामदे में पढ़ाई कराई जाती है।
- पेयजल, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था और फर्नीचर जैसी सुविधाएं अपर्याप्त हैं।
- मानवाधिकारों और शिक्षा के न्यूनतम मानकों का पालन नहीं किया जा रहा।
छात्र संख्या और आधारभूत संरचना पर भी सवाल
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि मदरसा पोर्टल पर अपलोड छात्र संख्या, कमरों की संख्या तथा अन्य विवरण वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाते। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज और अन्य अभिलेखों के आधार पर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
नियुक्तियों में परिवारवाद और नियमों के उल्लंघन का आरोप
शिकायत में कई शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्तियों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि विभिन्न रिश्तेदारों एवं परिचितों को नियमों की अनदेखी कर नियुक्त किया गया।
इसके अलावा कोविड-19 लॉकडाउन अवधि में लागू सरकारी प्रतिबंधों के बावजूद शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने इन नियुक्तियों की वैधता की जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
जांच रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्रवाई
फिलहाल शासन ने शिकायत की सत्यता पर कोई टिप्पणी नहीं की है। जांच समिति को सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद शासन स्तर पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद












