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Barabanki: पुलिस की एक FIR और उजड़ गया हँसता-खेलता परिवार! 8 साल की बच्ची को बनाया आरोपी, सदमे में पूर्व बीडीसी सदस्य की मौत, परिजनों का अंतिम संस्कार से इंकार

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Barabanki News: लोनीकटरा थाना क्षेत्र में 8 वर्षीय बच्ची सहित 8 लोगों पर कथित फर्जी मुकदमा दर्ज होने के सदमे से पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य सियारानी की मौत।

परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए, अंतिम संस्कार रोककर न्याय की मांग की।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 14 जुलाई 2026

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार जहां पुलिसिंग में पारदर्शिता और निष्पक्ष कार्रवाई का दावा करती है, वहीं राजधानी लखनऊ से सटे बाराबंकी जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि लोनीकटरा थाना पुलिस ने पड़ोसियों के आपसी विवाद में बिना जांच-पड़ताल किए एक पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य, उनके परिवार के सात अन्य लोगों और यहां तक कि एक 8 वर्षीय मासूम बच्ची तक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया।

परिजनों का दावा है कि जैसे ही पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य सियारानी पत्नी रामनाथ को अपने और परिवार के खिलाफ दर्ज कथित फर्जी मुकदमे की जानकारी मिली, उन्हें गहरा सदमा लगा और हार्ट अटैक आ गया। अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद गांव में शोक के साथ-साथ भारी आक्रोश व्याप्त है।

मुकदमे की जानकारी मिलते ही बिगड़ी तबीयत, इलाज के दौरान तोड़ा दम

यह पूरा मामला बाराबंकी जिले के लोनीकटरा थाना क्षेत्र के खैरा वीरू गांव का है। परिजनों के अनुसार, पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मुकदमे की जानकारी मिलते ही पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य सियारानी मानसिक रूप से टूट गईं। आरोप है कि इसी सदमे के चलते उन्हें हार्ट अटैक आया।

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गंभीर हालत में उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। महिला की मौत की खबर फैलते ही पूरे गांव में मातम और तनाव का माहौल बन गया।

अंतिम संस्कार से किया इंकार, न्याय मिलने तक अड़े परिजन

महिला की मौत के बाद परिजनों ने अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया। उनका कहना था कि जब तक कथित फर्जी मुकदमा वापस नहीं लिया जाएगा और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी, तब तक वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।

घटना की सूचना मिलने पर लोनीकटरा थाना प्रभारी निरीक्षक अभिमन्यु मल्ल मौके पर पहुंचे और परिजनों से वार्ता की।

परिजनों का दावा है कि थाना प्रभारी ने आश्वासन दिया कि यदि आवश्यक प्रार्थना-पत्र दिया जाता है तो मुकदमे को समाप्त कराने की कार्रवाई की जाएगी। परिजनों का यह भी आरोप है कि थाना प्रभारी ने इस संबंध में एक सादे कागज पर हस्ताक्षर कर आश्वासन भी दिया।

इसके बाद परिवार के लोग कुछ शांत हुए, लेकिन उन्होंने बताया कि बाहर से रिश्तेदारों के आने के बाद ही अंतिम संस्कार किया जाएगा।

पहले एक पक्ष ने कराया मुकदमा, अगले दिन दूसरे पक्ष पर भी दर्ज हो गया केस

परिवार के अनुसार विवाद की शुरुआत 10 जुलाई 2026 को हुई थी।

आरोप है कि मृतका की देवरानी मालती पत्नी सूर्यपाल ने गांव के ही नीरज पुत्र परीदीन के खिलाफ मारपीट का मुकदमा दर्ज कराया था।

इसके अगले ही दिन 11 जुलाई 2026 को नीरज अपनी पत्नी के साथ लोनीकटरा थाने पहुंचा और मालती की जेठानी सियारानी सहित परिवार के आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया।

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परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने मौके पर आकर मामले की निष्पक्ष जांच किए बिना ही विपक्षी पक्ष से मिलीभगत कर मुकदमा दर्ज कर लिया।

8 साल की मासूम बच्ची को भी बना दिया आरोपी, पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल

परिवार का सबसे गंभीर आरोप यह है कि पुलिस ने मुकदमे में एक 8 वर्षीय मासूम बच्ची तक को आरोपी बना दिया।

परिजनों का कहना है कि पुलिस यदि निष्पक्ष जांच करती तो यह स्पष्ट हो जाता कि बच्ची का विवाद से कोई लेना-देना नहीं था। इसके बावजूद उसका नाम मुकदमे में शामिल कर दिया गया।

इस घटनाक्रम ने पुलिस की विवेकपूर्ण कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि कानून के दुरुपयोग का मामला है।

पुलिस का पक्ष—महिला पहले से हार्ट की मरीज थी

इस पूरे मामले पर लोनीकटरा थाना प्रभारी अभिमन्यु मल्ल ने बताया कि महिला पहले से हृदय रोग से पीड़ित थीं और उनका इलाज चल रहा था।

उन्होंने कहा कि अचानक उन्हें हार्ट अटैक आया था, जिसके बाद इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हुई।

हालांकि पुलिस ने इस बात पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया कि 8 वर्षीय बच्ची का नाम मुकदमे में किस आधार पर शामिल किया गया और मुकदमा दर्ज करने से पहले क्या तथ्यात्मक जांच की गई थी।

निष्पक्ष जांच की मांग, पुलिस की भूमिका पर उठ रहे गंभीर सवाल

घटना के बाद ग्रामीणों और परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

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उनका कहना है कि यदि बिना पर्याप्त जांच के मुकदमा दर्ज किया गया है और उसके कारण एक महिला की जान चली गई, तो यह केवल एक कानूनी गलती नहीं बल्कि एक गंभीर प्रशासनिक और मानवीय विफलता है।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि जिला पुलिस प्रशासन इस पूरे प्रकरण की जांच किस तरह करता है और क्या कथित फर्जी मुकदमे तथा पुलिस की भूमिका की निष्पक्ष समीक्षा कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होती है या नहीं।

रिपोर्ट – कामरान अल्वी 

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Kamran Alvi
Author: Kamran Alvi

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