बाराबंकी के हरख ब्लॉक के कोला गांव में संचालित सिलाई सेंटर का USA टीम ने निरीक्षण किया।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाले इस मॉडल की सराहना, प्रशिक्षण से रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 28 अप्रैल 2026
जनपद बाराबंकी के विकास खंड हरख अंतर्गत ग्राम पंचायत कोला में संचालित सिलाई प्रशिक्षण केंद्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। हाल ही में अमेरिका (USA) से आई 15 सदस्यीय टीम ने सेंटर का दौरा कर यहां चल रहे प्रशिक्षण, महिलाओं के कौशल विकास और रोजगार सृजन मॉडल का गहन अवलोकन किया।
अंतरराष्ट्रीय टीम ने ग्राउंड जीरो पर देखा महिला सशक्तिकरण मॉडल
निरीक्षण के दौरान संस्था की स्टेट हेड नुज़हत मालिक ने टीम का स्वागत करते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह पहल सिर्फ सिलाई प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।
उन्होंने कहा कि—
👉 यह कार्यक्रम महिलाओं को पहचान, आत्मविश्वास और आर्थिक स्वतंत्रता देने का माध्यम बन रहा है।
👉 प्रशिक्षण के जरिए महिलाओं को बाजार की मांग के अनुरूप कौशल सिखाया जा रहा है।
👉 इससे महिलाएं रोजगार और स्वरोजगार से जुड़कर अपने परिवार और समाज के विकास में योगदान दे रही हैं।

लर्नर्स के हुनर से प्रभावित हुई टीम
दिल्ली से आई टीम के सदस्य सावेरी और पल्लवी ने सेंटर पर तैयार किए गए उत्पादों का निरीक्षण किया। उन्होंने—
- प्रशिक्षार्थियों द्वारा बनाए गए बैग और अन्य सैंपल देखे
- लर्नर्स के प्लेसमेंट और रोजगार अवसरों पर चर्चा की
- टीम ने प्रशिक्षण की गुणवत्ता और महिलाओं के हुनर की सराहना की।
प्रशिक्षार्थियों ने अपने हाथों से बने उत्पाद भेंट किए
कार्यक्रम के अंत में सेंटर की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए हैंडमेड बैग सभी विजिटर्स को भेंट किए गए। इस पहल ने न केवल महिलाओं की कला को प्रदर्शित किया बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी बढ़ाया।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और टीम की मौजूदगी
इस अवसर पर ग्राम प्रधान बंशीलाल, सहायक पंचायत अधिकारी रूपेश कुमार, लाइवलीहुड कोऑर्डिनेटर दीपक यादव, फैजान खान, सुरेश गुप्ता, सीमा देवी एवं मास्टर ट्रेनर काजोल सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई दिशा
यह सिलाई सेंटर ग्रामीण महिलाओं के लिए न सिर्फ रोजगार का माध्यम बन रहा है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला मॉडल भी साबित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रयासों से महिला सशक्तिकरण को जमीनी स्तर पर नई गति मिल रही है।
रिपोर्ट – नूर मोहम्मद












