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Barabanki: जनता हॉस्पिटल की लापरवाही से मरीज की टांग काटने की नौबत, पीड़ित के वकील ने ठोका ₹90 लाख मुआवजे का दावा

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Barabanki: निजी अस्पताल में कथित लापरवाही से मरीज की टांग काटने की नौबत।

पीड़ित ने ₹90 लाख मुआवजे के लिए उपभोक्ता आयोग में केस दर्ज किया, जांच शुरू।

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बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 27 मार्च 2026

बाराबंकी जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। तहसील नवाबगंज क्षेत्र में संचालित एक निजी अस्पताल पर इलाज में घोर लापरवाही बरतने का आरोप लगा है, जिसके चलते एक मरीज की हालत इतनी बिगड़ गई कि उसकी टांग काटने की नौबत आ गई। इस मामले में पीड़ित ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में ₹90 लाख मुआवजे का दावा किया है।

Barabanki: जनता हॉस्पिटल की लापरवाही से मरीज की टांग काटने की नौबत, पीड़ित ने वकील ने ठोका ₹90 लाख मुआवजे का दावा
फ़ोटो: जनता हॉस्पिटल

 

सड़क हादसे के बाद अस्पताल में भर्ती, ऑपरेशन के बाद बिगड़ी हालत

शुगर हाई होने के बावजूद किया गया ऑपरेशन

शिकायत के अनुसार, पीड़ित मनोज कुमार 22 मार्च 2024 की रात एक सड़क दुर्घटना में घायल हो गए थे। इसके बाद उन्हें उपचार के लिए नवाबगंज क्षेत्र के बरेठी में स्थित जनता हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।

आरोप है कि अस्पताल संचालक डॉ. अवधेश कुमार वर्मा और सर्जन डॉ. सौरभ सिंह ने आश्वासन दिया कि ऑपरेशन कर पैर में रॉड डालने के बाद मरीज ठीक हो जाएगा।

लेकिन 23 मार्च 2024 को मरीज का शुगर लेवल 265 mg/dL होने के बावजूद ऑपरेशन कर दिया गया, जो चिकित्सा मानकों पर सवाल खड़े करता है।

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ऑपरेशन के बाद बढ़ी तकलीफ, पैर में सड़न शुरू

दो दिन में हालत बिगड़ी, लखनऊ किया रेफर

परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद मरीज को राहत नहीं मिली, बल्कि दर्द बढ़ता गया।

महज दो दिन के भीतर ही पैर में सड़न (इन्फेक्शन) शुरू हो गई।

स्थिति गंभीर होते देख अस्पताल प्रबंधन ने मरीज को लखनऊ रेफर कर दिया, जिससे लापरवाही के आरोप और गहरे हो गए।

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कई अस्पतालों के चक्कर, अंत में टांग काटने की नौबत

लाखों खर्च के बाद भी नहीं बच सका पैर

पीड़ित के अधिवक्ता विष्णु कांत के अनुसार, लखनऊ समेत कई अस्पतालों में इलाज कराया गया, लेकिन सभी डॉक्टरों ने पैर काटने की सलाह दी।

आखिरकार मरीज को मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां लंबे इलाज के बावजूद सुधार नहीं हुआ और डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया कि अब पैर काटना ही एकमात्र विकल्प बचा है।

इस पूरी प्रक्रिया में पीड़ित परिवार लगभग ₹12 लाख खर्च कर चुका है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति भी बेहद खराब हो गई है।

डॉक्टरों पर गंभीर आरोप—लापरवाही और वादाखिलाफी

इलाज का खर्च उठाने के वादे से मुकरने का आरोप

पीड़ित का आरोप है कि जब मामला बिगड़ा, तो अस्पताल संचालक ने इलाज का खर्च उठाने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में वह अपने वादे से मुकर गए।

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शिकायत में कहा गया है कि उपचार और सर्जरी दोनों में घोर लापरवाही बरती गई, जिसके कारण मरीज की स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई और अब टांग काटना अनिवार्य हो गया है।

Barabanki: जनता हॉस्पिटल की लापरवाही से मरीज की टांग काटने की नौबत, पीड़ित ने वकील ने ठोका ₹90 लाख मुआवजे का दावा
फ़ोटो: एडवोकेट विष्णु कांत (पीड़ित के अधिवक्ता)

उपभोक्ता आयोग में मामला दर्ज, नोटिस जारी

 ₹90 लाख मुआवजे की मांग

पीड़ित ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बाराबंकी में वाद दायर किया है।

आयोग ने 23 मार्च को मामले का संज्ञान लेते हुए अस्पताल प्रबंधन, डाक्टर अवधेश कुमार वर्मा व सर्जन डॉ. सौरभ को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

साथ ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) बाराबंकी ने भी अस्पताल संचालक को नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा है।

मानसिक और शारीरिक पीड़ा का हवाला

मरीज को झेलनी पड़ी असहनीय तकलीफ़

शिकायत में यह भी कहा गया है कि ऑपरेशन के बाद मरीज को लगातार असहनीय दर्द, जटिलताओं और मानसिक आघात का सामना करना पड़ा।

चिकित्सकीय मानकों की अनदेखी और मरीज की सुरक्षा में लापरवाही को इस स्थिति का मुख्य कारण बताया गया है।

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न्याय की लड़ाई जारी, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

अधिवक्ता ने कही बड़ी बात

मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता विष्णु कांत (उच्च न्यायालय) ने कहा कि यह कार्रवाई न केवल पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भी जरूरी है।

इस घटना के बाद क्षेत्र में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

रिपोर्ट – मंसूफ अहमद

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Author: Kamran Alvi

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