Barabanki News: घुंघटेर थाना क्षेत्र के डिंगरी गांव में वन माफियाओं द्वारा हरे-भरे नीम, आम और जामुन के पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया।
पत्रकारों ने परमिट मांगा तो ठेकेदार मौके से भाग निकला।
ग्रामीणों ने वन विभाग की मिलीभगत का आरोप लगाया।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 18 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश सरकार जहां “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के माध्यम से प्रदेशभर में पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही है, वहीं राजधानी लखनऊ से सटे बाराबंकी जिले में इस अभियान की जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। निंदूरा क्षेत्र के घुंघटेर थाना इलाके में वन माफियाओं द्वारा लगातार हरे-भरे पेड़ों की कटाई किए जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ वन कर्मियों की मिलीभगत से सीमित परमिट की आड़ में बड़े पैमाने पर अवैध कटान कराया जा रहा है।
डिंगरी गांव में फिर गरजा आरा, नीम, आम और जामुन के पेड़ काटे गए
मामला घुंघटेर थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत डिंगरी का है। ग्रामीणों के अनुसार करीब एक सप्ताह पहले भी गांव में नीम, आम और अमरूद जैसे हरे-भरे पेड़ों का बड़े पैमाने पर कटान किया गया था। शनिवार को एक बार फिर इसी गांव में दो आम, दो नीम और एक जामुन के हरे-भरे पेड़ों पर आरा चला दिया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लगातार पेड़ों की कटाई हो रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बना हुआ है।

पत्रकारों ने मांगा परमिट तो मौके से खिसक गया ठेकेदार
ग्रामीणों की सूचना पर जब स्थानीय पत्रकार मौके पर पहुंचे तो ठेकेदार और उसके साथी आरा मशीन से पेड़ों की कटाई करते मिले।
पत्रकारों ने जब पेड़ काटने का वैध परमिट दिखाने को कहा तो ठेकेदार पहले टालमटोल करता रहा और फिर मौके से निकल गया। इस पूरे घटनाक्रम ने कटान की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

वन विभाग बोला- 4 पेड़ों का परमिट है, लेकिन कटान स्थल अलग
मामले में जब क्षेत्रीय वन दरोगा से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि संबंधित क्षेत्र में चार पेड़ काटने का परमिट जारी किया गया है।
हालांकि मौके पर मौजूद लोगों का दावा है कि जिस स्थान पर कटान किया जा रहा था, वह परमिट में दर्ज स्थान से अलग है। ऐसे में यह आशंका और गहरा गई है कि परमिट का दुरुपयोग कर अन्य स्थानों पर भी अवैध रूप से पेड़ों की कटाई की जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप- 4 पेड़ों के परमिट पर दर्जनों पेड़ों की कटाई
ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से चार पेड़ों के परमिट की आड़ में अलग-अलग गांवों में दर्जनों हरे-भरे पेड़ काटे जा रहे हैं।
एक किसान ने बताया कि क्षेत्र में आए दिन पेड़ों का कटान होता है। शिकायतें भी की जाती हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी कर दी जाती हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते इस अवैध कटान पर रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले समय में क्षेत्र का हरित क्षेत्र तेजी से समाप्त हो जाएगा।

‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान पर उठे सवाल
उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले ही पर्यावरण दिवस के अवसर पर बाराबंकी के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने जिले में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान चलाकर पौधरोपण किया था।
ऐसे में एक ओर सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर पौधे लगाने का संदेश दे रही है, वहीं दूसरी ओर वर्षों पुराने हरे-भरे पेड़ों पर लगातार आरा चलने से पूरे अभियान की गंभीरता पर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अवैध कटान की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और पूरे क्षेत्र में जारी पेड़ कटान पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद











