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बाराबंकी में वर्षों से बंद अस्पताल को चालू कराने की मांग तेज़: किसानों और आम जनता ने डीएम को सौंपा ज्ञापन, समयबद्ध कार्ययोजना की मांग

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बाराबंकी में वर्षों से बंद पड़े गरीब अस्पताल को दोबारा शुरू कराने की मांग तेज हो गई है।

भाकियू (टिकैत) ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर अस्पताल की जांच, डॉक्टरों की नियुक्ति और समयबद्ध कार्ययोजना की मांग की।

कार्रवाई न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 08 जून 2026

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में वर्षों से बंद पड़े गरीब अस्पताल को पुनः संचालित कराने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। नगर पालिका परिषद नवाबगंज के पीरबटावन वार्ड स्थित गरीब अस्पताल को दोबारा शुरू कराने की मांग को लेकर सोमवार को भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह को ज्ञापन सौंपा।

भाकियू (टिकैत) के जिलाध्यक्ष फैसल मलिक के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में अस्पताल की वर्तमान स्थिति की उच्चस्तरीय जांच कराते हुए उसे जल्द से जल्द पुनः संचालित किए जाने की मांग उठाई गई। संगठन का कहना है कि यह अस्पताल कभी गरीबों, किसानों, मजदूरों, रिक्शा चालकों, महिलाओं और जरूरतमंद लोगों के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य सुविधा हुआ करता था, लेकिन कई वर्षों से बंद पड़े होने के कारण हजारों लोग इसका लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।

गरीबों और मजदूरों के इलाज का महत्वपूर्ण केंद्र था अस्पताल

ज्ञापन में कहा गया है कि गरीब अस्पताल की स्थापना समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। अस्पताल बंद होने के बाद क्षेत्र के लोगों को इलाज के लिए दूर-दराज स्थित सरकारी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है या फिर मजबूरी में महंगे निजी अस्पतालों में उपचार कराना पड़ता है।

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भाकियू नेताओं का कहना है कि अस्पताल बंद होने से सबसे अधिक परेशानी गरीब और दैनिक मजदूरी करने वाले परिवारों को उठानी पड़ रही है। समय पर उपचार न मिलने के कारण कई मरीजों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

जनता जानना चाहती है आखिर अस्पताल बंद क्यों हुआ?

भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिलाध्यक्ष फैसल मलिक ने कहा कि गरीब अस्पताल का मुद्दा केवल एक भवन का नहीं बल्कि हजारों लोगों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर यह अस्पताल किसके आदेश पर बंद किया गया और इतने वर्षों बाद भी इसे पुनः शुरू करने के लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया।

उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि अस्पताल बंद होने के पीछे क्या कारण रहे और अब तक इसकी सेवाएं बहाल क्यों नहीं की गईं।

अस्पताल की भूमि, भवन और उपकरणों की जांच कराने की मांग

ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने प्रशासन से कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से—

प्रमुख मांगें

  • गरीब अस्पताल की भूमि, भवन एवं अन्य संपत्तियों की जांच कराई जाए।
  • अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सा उपकरणों और अभिलेखों का सत्यापन कराया जाए।
  • अस्पताल को पुनः संचालित करने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना घोषित की जाए।
  • पर्याप्त संख्या में चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए।
  • अस्पताल को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं से लैस कर क्षेत्रीय जनता को समर्पित किया जाए।
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भाकियू नेताओं का कहना है कि यदि अस्पताल की संपत्तियों और संसाधनों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी

फैसल मलिक ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि गरीब अस्पताल को दोबारा शुरू करने के लिए जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) जनता के सहयोग से व्यापक जनआंदोलन शुरू करने को मजबूर होगी।

उन्होंने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण होगा, लेकिन तब तक जारी रहेगा जब तक गरीब अस्पताल को पुनः चालू नहीं कर दिया जाता।

अस्पताल शुरू होने से हजारों परिवारों को मिलेगा लाभ

क्षेत्रीय लोगों का मानना है कि यदि गरीब अस्पताल दोबारा संचालित हो जाता है तो हजारों गरीब परिवारों को राहत मिलेगी। स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होने से लोगों को छोटे-मोटे इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा और आर्थिक बोझ भी कम होगा।

ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकार को इस अस्पताल को पुनर्जीवित करने की दिशा में प्राथमिकता के आधार पर कदम उठाने चाहिए ताकि इसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।

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स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बढ़ रही जनचिंता

बाराबंकी में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में गरीब अस्पताल को पुनः शुरू कराने की मांग को स्थानीय लोग जनहित का मुद्दा मान रहे हैं। अब निगाहें जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर टिकी हैं कि वे इस संबंध में क्या निर्णय लेते हैं और बंद पड़े अस्पताल को दोबारा शुरू करने की दिशा में कब तक ठोस कार्रवाई करते हैं।

रिपोर्ट – मंसूफ अहमद 

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