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बाराबंकी में नाबालिग किशोरी को बंधक बनाकर सामूहिक दुष्कर्म: पुलिस पर मामले को दबाने के आरोप, लोगों ने महिला सुरक्षा के दावों पर उठाए सवाल

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बाराबंकी के कोठी थाना क्षेत्र में युवती से कथित सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है।

पीड़िता पक्ष ने पुलिस पर गंभीर धाराएं हटाने और आरोपियों को बचाने के आरोप लगाए हैं।

घटना के बाद केंद्र और प्रदेश सरकार के महिला सुरक्षा व मिशन शक्ति जैसे अभियानों पर सवाल उठने लगे हैं।

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बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 18 मई 2026

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के कोठी थाना क्षेत्र में युवती के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। पीड़िता पक्ष ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मामले में लीपापोती की गई और आरोपियों को बचाने का प्रयास हुआ।

घटना के बाद केंद्र और प्रदेश सरकार के महिला सुरक्षा, “मिशन शक्ति” और “नारी सशक्तिकरण” जैसे अभियानों पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब इतने गंभीर मामलों में भी पीड़ित पक्ष को न्याय के लिए भटकना पड़े, तो महिला सुरक्षा के दावों की हकीकत पर बहस होना स्वाभाविक है।

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बहला-फुसलाकर ले जाने और दुष्कर्म का आरोप

पीड़िता की मां के अनुसार असंद्रा थाना क्षेत्र के ममरखापुर गांव निवासी हमजा पुत्र खलील 6 मई 2026 की रात उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया।

परिवार का आरोप है कि आरोपी ने युवती को दो दिन तक अपने घर में रखा और उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद उसे लखनऊ के एक होटल में ले जाया गया, जहां चार अन्य अज्ञात लोगों द्वारा भी सामूहिक दुष्कर्म किए जाने का आरोप लगाया गया है।

पीड़िता पक्ष का कहना है कि मामला बढ़ने के बाद आरोपी युवती को जैदपुर क्षेत्र में छोड़कर फरार हो गया।

पुलिस पर गंभीर धाराएं हटाने और लीपापोती करने के आरोप

महिला का आरोप है कि 8 मई 2026 को कोठी थाने पहुंचकर पूरी घटना की जानकारी देने के बावजूद पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। परिवार का कहना है कि अनपढ़ होंने का फायदा उठाते हुए उनसे सादे कागज पर अंगूठा लगवाया गया और बाद में मामूली धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई।

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पीड़िता पक्ष ने आरोप लगाया कि एफआईआर में कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना व उसमें शामिल अन्य चार आरोपियों का उल्लेख तक नहीं किया गया।

घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का सवाल है कि आखिर इतनी गंभीर शिकायत के बावजूद कठोर धाराओं में तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

धमकियों से दहशत में परिवार

पीड़िता पक्ष का आरोप है कि आरोपी और उसका एक रिश्तेदार असलम खान विदेश से मैसेज और कॉल के जरिए परिवार को धमकी भरे संदेश भेज रहे हैं। परिवार ने दावा किया कि उनके पास धमकी से जुड़ी रिकॉर्डिंग भी मौजूद है।

परिवार का कहना है कि शिकायत के बावजूद उन्हें सुरक्षा का भरोसा नहीं मिल पाया है, जिससे पूरा परिवार भय के माहौल में जी रहा है।

पुलिस अधीक्षक से न्याय और सुरक्षा की मांग

स्थानीय पुलिस से निराश परिवार ने अब बाराबंकी के पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय से निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग की है।

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परिवार ने सभी आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई, निष्पक्ष जांच और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने की मांग उठाई है।

महिला सुरक्षा व्यवस्था पर फिर खड़े हुए बड़े सवाल

इस घटना ने एक बार फिर भाजपा सरकारों के महिला सुरक्षा के दावों और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पीड़ित पक्ष के आरोप सही हैं, तो यह केवल एक आपराधिक घटना नहीं बल्कि महिला सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी विफलता भी है।

अब लोगों की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई और जांच पर टिकी हुई है।

रिपोर्ट – मंसूफ अहमद 

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Author: Kamran Alvi

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