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बाराबंकी में तालाब की जमीन पर अवैध मकान: दो साल बाद भी नहीं हुआ बेदखली आदेश का पालन, राजस्व विभाग की कार्यशैली पर सवाल

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बाराबंकी के फतेहपुर तहसील क्षेत्र के नन्दरासी गांव में सरकारी तालाब की जमीन पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है।

तहसीलदार कोर्ट द्वारा बेदखली आदेश जारी हुए दो साल बीतने के बावजूद कब्जा नहीं हटाया गया।

राजस्व विभाग की कार्यशैली और आदेशों के पालन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

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बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 18 मई 2026

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले की फतेहपुर तहसील क्षेत्र के नन्दरासी गांव में सरकारी तालाब की जमीन पर अवैध कब्जे का मामला राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यहां न्यायालय द्वारा बेदखली का आदेश जारी हुए करीब दो वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज तक कब्जा नहीं हटाया जा सका।

आरोप है कि सरकारी तालाब की जमीन पर अवैध कब्जा कर पक्का मकान बना लिया गया, जबकि न्यायालय ने स्पष्ट आदेश देते हुए कब्जा हटाने और जुर्माना वसूलने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद मौके की स्थिति जस की तस बनी हुई है।

तहसीलदार कोर्ट ने 2024 में दिया था बेदखली का आदेश

जानकारी के अनुसार, 24 जनवरी 2024 को न्यायिक तहसीलदार नरसिंह नारायण वर्मा की अदालत ने ग्राम नन्दरासी के गाटा संख्या 49 में दर्ज 0.014 हेक्टेयर तालाब की भूमि पर अवैध कब्जे के मामले में अंतिम आदेश पारित किया था।

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वाद संख्या 3323/2021 “गांव सभा बनाम राजकुमार” में कोर्ट ने राजकुमार पुत्र शिवबरन लाल को अवैध कब्जेदार मानते हुए 14 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति लगाने के साथ ही 15 दिन के भीतर बेदखली सुनिश्चित करने का आदेश दिया था।

कोर्ट ने क्षेत्रीय लेखपाल को आरसी प्रपत्र 67क और 67ख दाखिल करने के भी निर्देश दिए थे।

दो साल बाद भी नहीं हटा कब्जा, आदेश सिर्फ फाइलों में सीमित

हैरानी की बात यह है कि आदेश जारी होने के दो साल बाद भी तालाब की जमीन से कब्जा नहीं हटाया गया। न तो जुर्माने की वसूली हुई और न ही राजस्व अभिलेखों में आवश्यक कार्रवाई पूरी की गई।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि न्यायालय के आदेश को खुलेआम नजरअंदाज किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकारी जमीनों पर कब्जा हटाने के आदेशों का भी पालन नहीं होगा, तो आम लोगों का कानून और प्रशासन से भरोसा उठ जाएगा।

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मिलीभगत और राजनीतिक दबाव के आरोप

ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों का आरोप है कि कब्जाधारियों और कुछ जिम्मेदार कर्मचारियों के बीच मिलीभगत के चलते कार्रवाई जानबूझकर टाली जा रही है। वहीं विभागीय सूत्र राजनीतिक दबाव की भी चर्चा कर रहे हैं।

तहसील प्रशासन से इस मामले में पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।

तालाब खत्म होने से बढ़ रही जलभराव की समस्या

स्थानीय लोगों का कहना है कि तालाब की जमीन पर कब्जे के कारण गांव में जल निकासी की समस्या गंभीर होती जा रही है। बरसात के दौरान पानी भर जाता है और आसपास के इलाकों में जलभराव की स्थिति बन जाती है।

ग्रामीणों का कहना है कि तालाब का अस्तित्व धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है, जिससे पर्यावरण और भूजल स्तर पर भी असर पड़ सकता है।

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राजस्व संहिता के नियमों पर भी उठे सवाल

उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 67 के तहत तालाब, चरागाह और अन्य सार्वजनिक भूमि से अवैध कब्जा हटाने के आदेश का निर्धारित समय में पालन कराया जाना अनिवार्य है। नियमों के अनुसार कार्रवाई न होने पर संबंधित राजस्व कर्मियों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर दो साल बाद भी न्यायालय के आदेश का पालन क्यों नहीं कराया गया और जिम्मेदार अधिकारियों पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

रिपोर्ट – मंसूफ अहमद 

 

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