बाराबंकी में कथित चिकित्सीय लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है।
गले के दर्द का इलाज कराने पहुंची महिला का कथित रूप से कान का उपचार करते समय पर्दा फट गया।
स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर क्लीनिक संचालक को नोटिस जारी किया है।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 16 मई 2026
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में झोलाछाप डॉक्टरों और कथित चिकित्सीय लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। गले के दर्द का इलाज कराने पहुंची एक महिला का कथित रूप से कान का उपचार किए जाने के दौरान कान का पर्दा फट गया। इस मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि शिकायत के कई दिन बाद भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जबकि आरोपी डॉक्टर खुलेआम धमकी देता रहा।
इलाज के दौरान कान का पर्दा फटने का आरोप
जानकारी के अनुसार लखनऊ जनपद के ग्राम अनौरा कला निवासी हर्षित यादव ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी बाराबंकी को दिए शिकायती पत्र में बताया कि 3 मई 2026 को वह अपनी 38 वर्षीय माता छाया को गले में दर्द की शिकायत होने पर बाराबंकी शहर के घोसियाना स्थित राहुल कान-नाक-गला क्लीनिक लेकर गया था।
आरोप है कि वहां मौजूद डॉक्टर राहुल गुप्ता ने गले का उपचार करने के बजाय महिला के कान की सफाई शुरू कर दी। इसी दौरान कथित लापरवाही से महिला के कान का पर्दा फट गया।
परिजनों के मुताबिक घर लौटने के कुछ समय बाद महिला के कान में तेज और असहनीय दर्द शुरू हो गया। हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें लखनऊ के तिवारीगंज स्थित दूसरे डॉक्टर के पास लेकर पहुंचे, जहां जांच में कान का पर्दा फटा होने की पुष्टि हुई और ऑपरेशन की जरूरत बताई गई।

शिकायत करने पर धमकी देने का आरोप
पीड़ित परिवार का आरोप है कि जब उन्होंने संबंधित डॉक्टर से शिकायत की तो उनके द्वारा अपनी गलती मानने से इनकार किया गया। कभी कहा गया कि महिला ने वहां इलाज ही नहीं कराया, तो कभी यह दावा किया गया कि वह सफेदाबाद क्रॉसिंग पर गिर गई थी, जिससे चोट आई।
परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर ने धमकी देते हुए कहा, “जो करना है कर लो, मेरा कुछ नहीं बिगाड़ पाओगे, स्वास्थ्य विभाग मेरी जेब में है।”
इस बयान के बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया है तथा स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
जांच में सामने आया पंजीकरण से जुड़ा बड़ा तथ्य
हर्षित यादव ने 8 मई 2026 को मुख्य चिकित्सा अधिकारी बाराबंकी को लिखित शिकायत देकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की थी।
मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अवधेश यादव ने जांच के आदेश दिए। इसके बाद एसीएमओ चिकित्सा एवं पंजीयन डॉ. एल.बी. गुप्ता मौके पर जांच करने पहुंचे।
जांच के दौरान सामने आया कि कंपनी बाग मोड़ स्थित राहुल कान-नाक-गला क्लीनिक संचालित करने वाले डॉ. रोहित का पंजीकरण होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति में है।
एसीएमओ डॉ. एल.बी. गुप्ता ने बताया कि होम्योपैथिक पंजीकरण रखने वाला चिकित्सक कान-नाक-गला (ईएनटी) संबंधी ऑपरेशन या विशेषज्ञ उपचार नहीं कर सकता। इस मामले में क्लीनिक संचालक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

स्वास्थ्य विभाग पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे प्रकरण ने बाराबंकी में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले में कई बिना मानक और कथित अवैध क्लीनिक खुलेआम संचालित हो रहे हैं, जहां मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है।
लोगों का सवाल है कि आखिर इतने दिनों से कथित रूप से अवैध तरीके से चल रहे क्लीनिक पर विभाग की नजर क्यों नहीं पड़ी।
अब कार्रवाई पर टिकी लोगों की नजर
स्वास्थ्य विभाग की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बाद अब लोगों की नजर आगामी कार्रवाई पर टिकी है। स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवार का कहना है कि यदि इस मामले में सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों के हौसले और बढ़ेंगे।
अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले में वास्तव में कड़ी कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद / उस्मान














