बाराबंकी के DIOS ओपी त्रिपाठी पर लखनऊ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए STF जांच और FIR के आदेश दिए हैं।
सिटी इंटर कॉलेज में शिक्षक की अवैध जॉइनिंग और वेतन भुगतान मामले में कोर्ट ने तत्काल ट्रांसफर और जांच के निर्देश दिए।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 25 अप्रैल 2026
लखनऊ हाईकोर्ट की बेंच ने बाराबंकी के जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) ओपी त्रिपाठी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उनके तत्काल तबादले के निर्देश दिए हैं। साथ ही मामले में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को FIR दर्ज कर विस्तृत जांच करने का आदेश भी दिया गया है।
यह आदेश सिटी इंटर कॉलेज बाराबंकी में सहायक अध्यापक अभय कुमार की अवैध पुनर्नियुक्ति और वेतन भुगतान के मामले को लेकर कॉलेज के प्रबंधक सरदार आलोक सिंह की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए गए है।
क्या है पूरा मामला?
बिना अनुमति दूसरी नौकरी, फिर दोबारा ज्वाइनिंग
मामले के अनुसार, अभय कुमार को वर्ष 2018 में सिटी इंटर कॉलेज बाराबंकी में सहायक अध्यापक (संस्कृत) के पद पर नियुक्त किया गया था। इसके बाद उन्होंने बिना प्रबंधन समिति की अनुमति के छत्तीसगढ़ के बीजापुर स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में प्रवक्ता (PGT) पद पर जॉइन कर लिया।
इसके बावजूद, उन्होंने बाराबंकी में पुनः ज्वाइनिंग के लिए आवेदन किया, जिसे नियमों के विरुद्ध स्वीकार कर लिया गया।

मिलीभगत से हुआ वेतन भुगतान
याचिका में आरोप लगाया गया कि DIOS ओपी त्रिपाठी और कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. शिवचरण गौतम की मिलीभगत से अभय कुमार को दोबारा ज्वाइन करा दिया गया और अक्टूबर 2025 का वेतन भी जारी कर दिया गया, जबकि वह विधिवत कार्यमुक्त नहीं थे।
कोर्ट ने क्या कहा?
नियमों का उल्लंघन और रिकॉर्ड में हेरफेर
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि—
- बिना प्रबंधन समिति की अनुमति के ज्वाइनिंग अवैध है
- DIOS द्वारा रिकॉर्ड में हेरफेर और गलत शपथपत्र दाखिल किया गया
- वेतन भुगतान भी नियमों के खिलाफ किया गया
STF को जांच और FIR के निर्देश
कोर्ट ने निर्देश दिया कि—
- STF के DSP स्तर के अधिकारी से जांच कराई जाए
- सभी संबंधित अधिकारियों (DIOS, प्रधानाचार्य, शिक्षक) की भूमिका की जांच हो
- यदि आपराधिक मामला बनता है तो FIR दर्ज की जाए

तत्काल तबादला और वेतन वसूली के आदेश
हाईकोर्ट ने DIOS ओपी त्रिपाठी को तत्काल स्थानांतरित करने के निर्देश दिए हैं ताकि निष्पक्ष जांच हो सके। साथ ही, अभय कुमार को दिए गए वेतन की वसूली संबंधित अधिकारियों से करने के भी आदेश दिए गए हैं।
शिक्षा विभाग को सख्त निर्देश
कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि—
- दोषी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए
- भविष्य में आदेशों की डिजिटल और फिजिकल दोनों माध्यम से सही तरीके से सूचना दी जाए
निष्कर्ष
यह मामला शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। हाईकोर्ट के सख्त रुख से यह स्पष्ट है कि नियमों की अनदेखी और मिलीभगत किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद













