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बाराबंकी में कुत्ते की मौत के बाद वन विभाग की टीम पर हमला: डिप्टी रेंजर समेत कई कर्मी घायल; ठेकेदार ने लगाए डेढ़ लाख रुपये मांगने के आरोप

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बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 07 जून 2026

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के कुर्सी थाना क्षेत्र के चकिया गांव में अवैध लकड़ी कटान की सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम और ग्रामीणों के बीच विवाद का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। घटना में वन विभाग के डिप्टी रेंजर समेत कई कर्मचारी घायल हुए हैं। वहीं दूसरी ओर लकड़ी ठेकेदार ने वन विभाग के अधिकारियों पर डेढ़ लाख रुपये की मांग करने का गंभीर आरोप लगाया है। दोनों पक्षों के आरोपों के बीच मामला अब पुलिस जांच का विषय बन गया है।

घटना के अगले दिन डिप्टी रेंजर द्वारा कुर्सी थाने में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की गई है, जबकि ठेकेदार और ग्रामीण भी वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला जिले भर में चर्चा का विषय बन गया है।

डिप्टी रेंजर का आरोप – सरकारी कार्रवाई रोकने के लिए किया गया हमला

कुर्सी थाने में दी गई तहरीर में डिप्टी रेंजर प्रशांत कुमार ने बताया कि 6 जून 2026 की रात लगभग 10:45 बजे उन्हें ग्राम चकिया में अवैध लकड़ी कटान की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर वह अपने सहयोगियों और मुखबिर के साथ मौके पर पहुंचे।

तहरीर के अनुसार ग्राम चकिया निवासी जगदीश कुमार के बाग से अपंजीकृत ट्रैक्टर-ट्रॉली पर अपंजीकृत हाइड्रा लोडर की सहायता से आम के पेड़ों की लकड़ी लादी जा रही थी। वन विभाग की टीम ने ट्रैक्टर-ट्रॉली और हाइड्रा लोडर को कब्जे में लेकर वन रेंज कार्यालय देवा ले जाने की कार्रवाई शुरू की।

डिप्टी रेंजर का आरोप है कि जब टीम गांव के तिराहे के पास पहुंची तो बाग मालिक जगदीश कुमार, लकड़ी ठेकेदार अनूप सिंह, अरविंद सिंह तथा कई अन्य ग्रामीणों ने रास्ता रोक लिया और वाहन छोड़ने का दबाव बनाने लगे।

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मारपीट, जातिसूचक टिप्पणियों और सरकारी कार्य में बाधा का आरोप

डिप्टी रेंजर प्रशांत कुमार का आरोप है कि जब उन्होंने वाहनों को रेंज कार्यालय ले जाने की बात कही तो आरोपित पक्ष भड़क गया। तहरीर में कहा गया है कि सरकारी कार्रवाई का विरोध करते हुए गाली-गलौज की गई तथा जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया।

आरोप है कि इसके बाद वन विभाग की टीम पर लाठी-डंडों और ईंट-पत्थरों से हमला कर दिया गया। इस हमले में विभागीय वाहन चालक मनोज कुमार वर्मा गंभीर रूप से घायल हो गए और उनके पैर की दो उंगलियां फ्रैक्चर हो गईं। वनकर्मी करन गौतम समेत अन्य कर्मचारियों को भी चोटें आई हैं।

वन विभाग का कहना है कि पुलिस के हस्तक्षेप के बाद ही जब्त वाहन सुरक्षित रूप से देवा रेंज कार्यालय पहुंचाए जा सके।

ग्रामीणों का दावा – कुत्ते की मौत से शुरू हुआ विवाद

वहीं ग्रामीणों की कहानी वन विभाग के आरोपों से अलग है।

ग्रामीणों के अनुसार 6 जून की रात लगभग 11 बजे लकड़ी लादकर जा रही एक गाड़ी की चपेट में आने से गांव निवासी राममूरत के पालतू कुत्ते की मौत हो गई थी। इससे ग्रामीण आक्रोशित हो गए और उन्होंने वाहन रोककर ठेकेदार से जवाब मांगा।

ग्रामीणों का कहना है कि इसी दौरान वन विभाग की टीम भी वहां पहुंच गई। आरोप है कि बहस के दौरान कुछ कर्मचारियों द्वारा आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया, जिससे माहौल और बिगड़ गया। इसके बाद विवाद इतना बढ़ गया कि हाथापाई की नौबत आ गई।

ग्रामीणों का कहना है कि घटना का मूल कारण अवैध कटान से अधिक कुत्ते की मौत और उसके बाद हुई कहासुनी थी।

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अगले दिन वन रेंज कार्यालय में फिर हुआ हंगामा

मामला यहीं नहीं रुका। घटना के अगले दिन वन रेंज कार्यालय देवा में भी दोनों पक्षों के बीच कहासुनी और धक्का-मुक्की हुई।

कार्यालय परिसर में हुए विवाद के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। वीडियो में लोगों के बीच बहस, आरोप-प्रत्यारोप और हंगामे जैसी स्थिति दिखाई दे रही है।

इन वीडियो के सामने आने के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।

ठेकेदार पक्ष का आरोप – मांगे गए डेढ़ लाख रुपये

लकड़ी ठेकेदार की ओर से भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

ठेकेदार पक्ष का कहना है कि वन विभाग के कुछ लोगों द्वारा उनसे डेढ़ लाख रुपये की मांग की जा रही थी। उनका दावा है कि इसी बात को लेकर वन रेंज कार्यालय में विवाद हुआ।

हालांकि इस आरोप को लेकर अब तक कोई स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

डिप्टी रेंजर ने आरोपों को बताया निराधार

वन विभाग के डिप्टी रेंजर प्रशांत कुमार ने ठेकेदार के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि विभाग नियमानुसार कार्रवाई कर रहा था।

उनका कहना है कि अवैध कटान की सूचना के आधार पर वाहनों को जब्त किया गया था। इसी कार्रवाई से नाराज होकर आरोपित पक्ष ने पहले रात में हमला किया और बाद में कार्यालय पहुंचकर दबाव बनाने का प्रयास किया।

उन्होंने कुर्सी पुलिस को तहरीर देकर सभी आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

कई सवालों के घेरे में पूरा घटनाक्रम

इस पूरे मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि घटना रात लगभग 11 बजे हुई थी तो पुलिस को औपचारिक तहरीर अगले दिन कई घंटे बाद क्यों दी गई?

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दूसरा सवाल यह है कि वन रेंज कार्यालय में अगले दिन दोबारा विवाद और हंगामा क्यों हुआ?

तीसरा सवाल ठेकेदार द्वारा लगाए गए डेढ़ लाख रुपये मांगने के आरोपों को लेकर उठ रहा है, जिसकी जांच होना आवश्यक माना जा रहा है।

इन सभी पहलुओं को लेकर अब लोगों की निगाहें पुलिस और वन विभाग की जांच पर टिकी हुई हैं।

पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई

फिलहाल दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। वन विभाग सरकारी कार्य में बाधा, मारपीट और अवैध कटान का मामला बता रहा है, जबकि ग्रामीण और ठेकेदार वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।

पुलिस का कहना है कि प्राप्त तहरीर और उपलब्ध वीडियो फुटेज के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

चकिया गांव की यह घटना अब केवल अवैध लकड़ी कटान तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि वन विभाग, ग्रामीणों और ठेकेदार के बीच आरोप-प्रत्यारोप का बड़ा विवाद बन चुकी है।

रिपोर्ट – मंसूफ अहमद 

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Author: Kamran Alvi

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