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Barabanki News: फ़र्ज़ी चिटफंड कंपनी बनाकर करोड़ो की ठगी, कोर्ट ने चेयरमैन, सीएमडी और डायरेक्टर के खिलाफ़ केस दर्ज करने के दिए आदेश

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फर्जी चिटफंड कंपनी बनाकर एफडी-आरडी योजनाओं के नाम पर करोड़ों की ठगी का मामला सामने आया है। सीजेएम कोर्ट के आदेश पर कोतवाली नगर पुलिस को मुकदमा दर्ज कर जांच करने के निर्देश।

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बाराबंकी, उत्तर प्रदेश।

बाराबंकी में फ़र्जी चिटफंड कंपनी के जरिए लोगों से करोड़ों की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मोटे मुनाफे का लालच देकर एफडी, आरडी समेत अन्य निवेश योजनाओं के नाम पर जालसाजों ने बड़ी रकम जमा कराई और मैच्योरिटी का समय पूरा होते ही फरार हो गए। ठगी का शिकार बने पीड़ितों की शिकायत पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम), बाराबंकी ने कोतवाली नगर पुलिस को मुकदमा दर्ज कर विवेचना के आदेश दिए हैं।

 

निवेश के नाम पर दिया गया बड़ा झांसा

बीएनएस की धारा 173(4) के तहत सीजेएम कोर्ट में दाखिल प्रार्थना पत्र में पीड़ित सुशील कुमार, अमर सिंह एवं अनीता देवी ने बताया कि रिच डायमंड इंडिया निधि लिमिटेड एवं डायमंड कृषक सहकारी समिति लिमिटेड, बाराबंकी के नाम से संचालित कंपनियों में उनसे निवेश कराया गया।

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आरोप है कि कंपनी की चेयरमैन भावना वर्मा, सीएमडी शैलेन्द्र वर्मा, डायरेक्टर चन्द्र मोहन तथा सचिव उपेंद्र वर्मा सहित अन्य लोगो ने एफडी, आरडी, एमआईएस, डेली डिपॉजिट और अन्य स्कीमों में निवेश कराकर अधिक आर्थिक लाभ का झांसा दिया। इतना ही नहीं, मैच्योरिटी पर लाभ न मिलने की स्थिति में मैच्योरिटी अमाउंट से दोगुनी कीमत की जमीन देने का वादा किया गया।

 

आरबीआई लाइसेंस और दस्तावेज निकले फर्जी

शिकायतकर्ताओ के अनुसार आरोपियों ने आरबीआई से लाइसेंस प्राप्त होने और वैध प्लाटिंग के दस्तावेज दिखाकर निवेशकों का भरोसा जीता, लेकिन बाद में यह सभी दस्तावेज फर्जी पाए गए।

पीड़ितों ने बताया कि—

  • सुशील कुमार ने लगभग 18 लाख रूपये
  • अमर सिंह ने 2 लाख रूपये
  • अनीता देवी ने करीब 3.87 लाख रूपये कंपनी में निवेश किए थे।
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अक्टूबर 2024 में जब अखबारों के माध्यम से कंपनी के फरार होने की खबर आई, तब पीड़ितों को ठगी का एहसास हुआ।

 

पुलिस में सुनवाई न होने पर पहुंचे न्यायालय

पीड़ितों ने पहले कोतवाली नगर और पुलिस अधीक्षक बाराबंकी को शिकायती पत्र देकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, लेकिन कोई सुनवाई न होने पर उन्हें मजबूरन न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।

मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कोर्ट संख्या-18, सुधा सिंह ने पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों के अवलोकन के बाद इस गंभीर प्रकृति का अपराध मानते हुए तत्काल जांच की आवश्यकता बताई।

 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला

22 जनवरी 2026 को पारित आदेश में सीजेएम ने ललिता कुमारी बनाम राज्य सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए कोतवाली नगर पुलिस को अभियोग पंजीकृत कर विधिक विवेचना करने के निर्देश दिए हैं।

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रिपोर्ट – मंसूफ अहमद

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Author: Kamran Alvi

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