बाराबंकी एक्सप्रेस के 2027 विधानसभा चुनाव सर्वे में 15,434 लोगों ने अपनी राय दी।
मुख्यमंत्री पद के लिए लोगों ने सबसे ज्यादा योगी आदित्यनाथ पर भरोसा जताया।
अखिलेश यादव दूसरे और मायावती तीसरे स्थान पर रहीं। पढ़ें पूरी सर्वे रिपोर्ट।
बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 08 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां धीरे-धीरे तेज होने लगी हैं। इसी बीच बाराबंकी एक्सप्रेस द्वारा अपने पाठकों के बीच कराए गए एक ऑनलाइन सर्वे में मुख्यमंत्री पद को लेकर लोगों की स्पष्ट राय सामने आई है। सर्वे के अनुसार, प्रदेश की जनता की पहली पसंद मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं।
बाराबंकी एक्सप्रेस के ऑनलाइन सर्वे में 15,434 लोगों ने दी अपनी राय
बाराबंकी एक्सप्रेस की वेबसाइट पर आयोजित इस सर्वे में 15,434 लोगों ने अपनी राय दर्ज कराई। प्रतिभागियों से सवाल पूछा गया कि “उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में आप मुख्यमंत्री के रूप में किसे देखना चाहेंगे?”

योगी आदित्यनाथ को मिला सबसे अधिक समर्थन
सर्वे के नतीजों के मुताबिक, 80 प्रतिशत (लगभग 12,347) प्रतिभागियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पक्ष में मतदान किया। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि सर्वे में शामिल अधिकांश लोगों ने एक बार फिर योगी आदित्यनाथ पर अपना भरोसा जताया।

अखिलेश यादव दूसरे स्थान पर
वहीं, 17 प्रतिशत (लगभग 2,623) लोगों ने अपनी पसंद के तौर पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का नाम चुना। इससे पता चलता है कि सर्वे में उन्हें भी उल्लेखनीय समर्थन प्राप्त हुआ, हालांकि वे योगी आदित्यनाथ से काफी पीछे रहे।

बसपा सुप्रीमो मायावती को मिला सीमित समर्थन
दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश की तीन बार मुख्यमंत्री रह चुकीं मायावती को इस सर्वे में अपेक्षाकृत कम समर्थन मिला। उनके पक्ष में 3 प्रतिशत (लगभग 463) प्रतिभागियों ने मतदान किया।
इसके अलावा, 1 प्रतिशत (लगभग 154) लोगों ने “इनमें से कोई नहीं” विकल्प को चुना।
सर्वे के नतीजे एक नजर में
कुल प्रतिभागी: 15,434
- योगी आदित्यनाथ: 80% (12,347 वोट)
- अखिलेश यादव: 17% (2,623 वोट)
- मायावती: 3% (463 वोट)
- इनमें से कोई नहीं: 1% (154 वोट)

नोट: यह सर्वे किन लोगों पर आधारित है?
हालांकि यह सर्वे केवल बाराबंकी एक्सप्रेस के पाठकों और वेबसाइट पर स्वेच्छा से भाग लेने वाले लोगों की राय पर आधारित है। इसे पूरे उत्तर प्रदेश के सभी मतदाताओं का प्रतिनिधि चुनावी सर्वे नहीं माना जाना चाहिए। फिर भी यह सर्वे प्रदेश के एक वर्ग की राजनीतिक पसंद और रुझान की एक दिलचस्प तस्वीर पेश करता है।












