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Barabanki: 10 मार्च को आनी थी बेटी की बारात, उससे पहले उठ गई पिता की अर्थी! आर्या हॉस्पिटल पर लापरवाही के गंभीर आरोप

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बाराबंकी आर्या हॉस्पिटल में मरीज की मौत

Barabanki News: आर्या हॉस्पिटल में ऑपरेशन के दौरान सत्येंद्र सिंह की मौत के बाद परिजनों ने लापरवाही, एक लाख रुपये से अधिक वसूली और मौत की जानकारी छिपाने के आरोप लगाए। डॉक्टर रोहित अग्रवाल का पक्ष नहीं मिल सका। पोस्टमार्टम और जांच का इंतजार।

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बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 20 अक्टूबर 2026

जिस पिता के घर में बेटी की शादी की तैयारियां चल रही थीं, जो अपने परिवार के सुनहरे भविष्य के सपने संजो रहा था, वह अब इस दुनिया में नहीं है। बेटी की बारात आने में अभी कुछ महीने बाकी थे, लेकिन पिता सत्येंद्र सिंह की जिंदगी की डोर बीच रास्ते में टूट गई। सड़क हादसे में पैर टूटने के बाद इलाज कराने पहुंचे 44 वर्षीय सत्येंद्र की बाराबंकी के एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान मौत हो गई। अब पीछे रह गई है बदहवास पत्नी, पिता को खो चुके बच्चे और ऐसे सवाल, जिनके जवाब परिवार मांग रहा है।

मामला शहर के पैसार क्षेत्र स्थित चौधरी नगर के आर्या हॉस्पिटल का है। मृतक के परिजनों ने अस्पताल संचालक डॉ. रोहित अग्रवाल पर इलाज में लापरवाही, मौत की जानकारी छिपाने, ऑपरेशन के नाम पर एक लाख रुपये से अधिक वसूलने और मृतक की पत्नी को अस्पताल में रोककर रखने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। घटना के बाद अस्पताल में हंगामा हुआ। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

परिवार का आरोप है कि सत्येंद्र को ऑपरेशन थिएटर में ले जाने के बाद उनकी मौत हो गई, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी स्पष्ट रूप से नहीं दी गई। परिजनों ने एनेस्थीसिया या किसी अन्य दवा की ओवरडोज की आशंका भी जताई है। हालांकि, मौत की असल वजह और इलाज में लापरवाही हुई या नहीं, इसकी पुष्टि जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।

Barabanki Express बाराबंकी आर्या हॉस्पिटल में मरीज की मौत
फाइल फ़ोटो – सत्येंद्र सिंह (मृतक)

बेटी की शादी की खुशियों के बीच मातम, परिवार का सहारा छिन गया

सत्येंद्र सिंह की मौत ने उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिजनों के मुताबिक, उनकी बेटी स्वाती सिंह की शादी तय है और आगामी 10 मार्च को बारात आनी है। घर में शादी की तैयारियों को लेकर पिता के अपने सपने थे। वह बेटी को विदा करने की खुशियों का इंतजार कर रहे थे, लेकिन अब परिवार को इस बड़े दुख का सामना करना पड़ रहा है।

पत्नी रजनी सिंह का रो-रोकर बुरा हाल है। वह बार-बार बेसुध हो रही हैं। बेटे अंश सिंह और बेटी स्वाती सिंह के लिए भी पिता की मौत का सदमा असहनीय है। जिस परिवार को बेटी की शादी के लिए एकजुट होना था, वह अब अपने मुखिया को खोने के दर्द से जूझ रहा है।

यह केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि उस भरोसे पर भी सवाल है जिसके साथ कोई मरीज और उसके परिजन इलाज के लिए अस्पताल पहुंचते हैं। इस मामले में परिवार न्याय और घटना की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।

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स्वाति सिंह (मृतक की बेटी)

9 अक्टूबर को डंपर ने मारी थी बाइक में टक्कर, टूट गया था बायां पैर

रामनगर थाना क्षेत्र के धौखरिया, कधईपुर निवासी सत्येंद्र सिंह (44), पुत्र भूधर सिंह, 9 अक्टूबर 2026 को शहाबपुर टोल प्लाजा के पास सड़क हादसे में घायल हो गए थे। बताया गया कि उनकी बाइक में तेज रफ्तार डंपर ने टक्कर मार दी थी। हादसे में उनके बाएं पैर में फ्रैक्चर हो गया।

परिजन उन्हें पहले जिला अस्पताल ले गए। इसके बाद पैसार क्षेत्र के चौधरी नगर स्थित आर्या हॉस्पिटल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया। परिवार के मुताबिक, 14 अक्टूबर तक सत्येंद्र का इलाज अस्पताल में चला, लेकिन पैर की सूजन कम नहीं होने पर अस्पताल संचालक डॉ. रोहित अग्रवाल ने दवाइयां लिखकर उन्हें घर भेज दिया।

परिजनों का कहना है कि 17 अक्टूबर को हॉस्पिटल से फ़ोन आने के बाद 18 अक्टूबर को सत्येंद्र को फिर अस्पताल लाया गया। जरूरी जांच कराने के बाद डॉक्टर ने 19 अक्टूबर को ऑपरेशन करने की बात कही। परिवार को उम्मीद थी कि ऑपरेशन के बाद सत्येंद्र की परेशानी दूर होगी और वह स्वस्थ होकर घर लौटेंगे, लेकिन अगले दिन की सुबह उनके लिए कभी न भूलने वाला दुख लेकर आई।

बाराबंकी आर्या हॉस्पिटल में मरीज की मौत
कार में बेसुध पड़ी पत्नी रजनी सिंह

ऑपरेशन थिएटर में मौत, परिवार के सपने चकनाचूर

परिजनों के अनुसार, ऑपरेशन के लिए अस्पताल में रकम जमा कराई गई और 19 अक्टूबर की शाम करीब 6:30 बजे सत्येंद्र सिंह को ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया। परिवार का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया या किसी अन्य दवा की ओवरडोज के चलते उनकी हालत बिगड़ी और कुछ ही लम्हों में मौत हो गई।

परिजनों का दावा है कि ऑपरेशन से पहले कराई गई जांचों की रिपोर्ट सामान्य थीं और सत्येंद्र को पहले से ब्लड प्रेशर या हृदय संबंधी बीमारी नहीं थी। परिवार ने अस्पताल के इलाज संबंधी दस्तावेजों का हवाला देते हुए मौत की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

 

हार्ट अटैक बताकर लोहिया अस्पताल भेजने का आरोप

परिजनों का आरोप है कि सत्येंद्र की मौत ऑपरेशन थिएटर में ही हो गई थी, लेकिन अस्पताल संचालक डॉक्टर रोहित अग्रवाल ने अपना पल्ला झाड़ने के लिए मरीज को हार्ट अटैक आने की बात कहकर अस्पताल की एंबुलेंस से लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया गया।

परिजनों का कहना है कि जब वे सत्येंद्र को लेकर लोहिया अस्पताल पहुंचे तो वहां मौजूद चिकित्सकों ने एंबुलेंस में ही जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिवार शव लेकर वापस आर्या हॉस्पिटल पहुंचा। वहां परिजनों का आक्रोश फूट पड़ा और हंगामा शुरू हो गया।

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बाराबंकी आर्या हॉस्पिटल में मरीज की मौत
आर्या हॉस्पिटल में मौजूद पुलिस

35 हजार रुपये में ऑपरेशन की बात, एक लाख से अधिक वसूली का आरोप

मृतक के परिजनों ने इलाज के खर्च को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि 9 अक्टूबर को सत्येंद्र को भर्ती कराते समय ऑपरेशन के लिए करीब 35 हजार रुपये बताए गए थे, लेकिन बाद में ऑपरेशन के नाम पर एक लाख रुपये से अधिक वसूल लिए गए।

परिजनों ने यह आरोप भी लगाया कि सत्येंद्र की मौत के बाद उनकी पत्नी को अस्पताल में रोककर रखा गया और बकाया रकम जबरन वसूली गई। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो मामला केवल इलाज की गुणवत्ता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अस्पताल में मरीज के परिजनों के साथ हुए व्यवहार और भुगतान की प्रक्रिया की जांच भी जरूरी होगी।

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अस्पताल संचालक डॉ. रोहित अग्रवाल का पक्ष नहीं मिल सका

इस मामले में अस्पताल संचालक डॉ. रोहित अग्रवाल का पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल नंबर पर कॉल की गई। लेकिन, कई बार घंटी जाने के बावजूद कॉल रिसीव नहीं हुई, जिसके चलते उनका पक्ष नहीं मिल सका।

स्थानीय लोगों ने भी उठाए सवाल, पहले भी हंगामे होने का दावा

स्थानीय लोगों के अनुसार, आर्या हॉस्पिटल पर इलाज में लापरवाही और मरीजों से अधिक रकम वसूलने के आरोप पहली बार नहीं लगे हैं। लोगों का दावा है कि इससे पहले भी इलाज के खर्च को लेकर अस्पताल परिसर में कई बार हंगामा हो चुका है।

स्थानीय लोगों ने अस्पताल के प्रचार-प्रसार के तरीके पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि अस्पताल संचालक डॉ. रोहित अग्रवाल शहर में बड़े-बड़े होर्डिंग लगवाकर मरीजों को आकर्षित करते हैं, जबकि अस्पताल पहुंचने के बाद इलाज के नाम पर उनसे मोटी रकम वसूले जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा, जांच से खुलेंगे अहम सवाल

अस्पताल में हंगामे की सूचना पर पुलिस मौक़े पर पहुंची। परिजनों के मुताबिक, पुलिस ने उन्हें समझाकर शांत कराया और कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।

अब इस मामले में कई अहम सवालों के जवाब सामने आना बाकी हैं—सत्येंद्र की मौत किस वजह से हुई? क्या ऑपरेशन और एनेस्थीसिया से जुड़े निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया गया? मरीज को लोहिया अस्पताल भेजने से पहले उसकी स्थिति क्या थी? इलाज पर खर्च हुई रकम का पूरा विवरण क्या है? इन सवालों का जवाब मेडिकल रिकॉर्ड, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और निष्पक्ष जांच से ही मिल सकता है।

नेहा यादव की मौत के मामले के बाद फिर निजी अस्पतालों की निगरानी पर सवाल

बाराबंकी में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली को लेकर इससे पहले भी गंभीर आरोप सामने आ चुके हैं। नगर कोतवाली क्षेत्र के आलापुर-सफीपुर मार्ग स्थित नंदलाल प्रभु देवी (NLPD) हॉस्पिटल में 22 वर्षीय नेहा यादव की मौत के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए थे।

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सतरिख थाना क्षेत्र के भारागंज गांव निवासी राजेश कुमार यादव ने 22 मई 2026 को बुखार और अत्यधिक कमजोरी की शिकायत पर अपनी बेटी नेहा को अस्पताल में भर्ती कराया था। परिवार का कहना था कि जांच के बाद प्लेटलेट्स और खून की कमी बताकर रक्त चढ़ाने की सलाह दी गई। आरोप है कि अस्पताल परिसर में संचालित ब्लड बैंक से 4,500 रुपये लेकर एक यूनिट रक्त चढ़ाया गया।

परिजनों के मुताबिक, रक्त चढ़ाने के करीब दो घंटे बाद नेहा की हालत बिगड़ने लगी और उसके शरीर पर फफोले निकल आए। बाद में उसे दूसरे निजी अस्पताल भेजा गया, जहां 1 जून 2026 को उसकी मौत हो गई। उस मामले में भी परिवार ने इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए थे।

परिवार को जवाब चाहिए, आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी

सत्येंद्र सिंह के परिवार के लिए अब सबसे बड़ा सवाल है कि सड़क हादसे में घायल होकर इलाज के लिए पहुंचे व्यक्ति की मौत किन परिस्थितियों में हुई। परिवार ने अस्पताल पर गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन इन आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड, अस्पताल के बिल और संबंधित पक्षों के बयान सामने आने के बाद ही घटना की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी। स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अधिकारियों की जांच से यह भी पता चल सकेगा कि इलाज के दौरान नियमों का पालन हुआ या नहीं।

एक परिवार ने अपना सहारा खो दिया है। अब जिम्मेदार अधिकारियों का दायित्व है कि जांच कर आरोपों और तथ्यों के बीच फर्क स्पष्ट करे, ताकि सत्येंद्र सिंह की मौत के कारणों पर सवाल उठा रहे परिजनों को उनके सवालों का जवाब मिल सके।

रिपोर्ट – मंसूफ अहमद 

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Author: Kamran Alvi

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