Barabanki: प्रभारी मंत्री सुरेश राही ने हेतमापुर में बाढ़ राहत का निरीक्षण किया।
भूसे की बोरी का वजन कम मिलने पर अफसरों को फटकार लगाई और 20 किलो भूसा देने के निर्देश दिए।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 18 अगस्त 2026
बाराबंकी में सरयू नदी की बाढ़ के बीच मंगलवार को बाढ़ प्रभावित हेतमापुर पहुंचे उत्तर प्रदेश के कारागार राज्य मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री सुरेश राही ने राहत व्यवस्था का स्थलीय निरीक्षण किया। मंत्री ने जलमग्न गांवों का जायजा लेने के साथ बाढ़ पीड़ित करीब 50 परिवारों को राहत सामग्री वितरित की और ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं।
निरीक्षण के दौरान पशुओं के लिए बांटे जा रहे भूसे को लेकर ऐसा मामला सामने आया, जिसने मंत्री को भी नाराज कर दिया। ग्रामीणों ने भूसे की बोरी का वजन कम होने की शिकायत की। इसके बाद मंत्री ने खुद बोरी उठाकर वजन का अंदाजा लगाया तो 20 किलो निर्धारित भूसे की बोरी करीब 7-8 किलो की नजर आई। मंत्री ने मौके पर ही पशु विभाग और तहसील प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि आपदा के समय किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बाढ़ राहत केंद्र पहुंचे प्रभारी मंत्री, 50 परिवारों को बांटी राहत सामग्री
प्रभारी मंत्री सुरेश राही सबसे पहले हेतमापुर के बाढ़ राहत केंद्र पहुंचे। यहां उन्होंने बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों से बातचीत की और उनके हालात की जानकारी ली।
सुंदरनगर के प्रकाश, इमरान अली, राम सिंह, यूनुस, सबीरा और ललता प्रसाद समेत अन्य ग्रामीणों से मंत्री ने बाढ़, राहत और बचाव व्यवस्था के बारे में जानकारी ली। इसके बाद प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री वितरित की गई।
मंत्री ने अधिकारियों से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की भी जानकारी ली और ग्रामीणों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर करने के निर्देश दिए।

भूसे की बोरी पर उठे सवाल, मंत्री ने खुद उठाकर देखा वजन
राहत केंद्र के निरीक्षण के बाद प्रभारी मंत्री तटबंध पर पहुंचे, जहां बाढ़ प्रभावित पशुपालकों को पशुओं के चारे के लिए भूसा वितरित किया जा रहा था।
मंत्री ने ग्रामीणों से पूछा कि उन्हें कितनी मात्रा में भूसा मिल रहा है। इस पर ललपुरवा के मायाराम और हेतमापुर के शोभाराम ने बताया कि उनके पास पशुओं की संख्या काफी अधिक है, लेकिन प्रशासन की ओर से केवल एक-एक बोरी भूसा दिया जा रहा है।
जब मंत्री ने एक ग्रामीण से बोरी में मौजूद भूसे के वजन के बारे में पूछा तो ग्रामीण ने करीब 8 से 10 किलो भूसा होने की बात बताई।
इसके बाद मंत्री ने खुद बोरी उठाकर उसका वजन महसूस किया। उन्हें भी बोरी का वजन निर्धारित मात्रा से काफी कम प्रतीत हुआ।
कागजों में 20 किलो, मंत्री के हाथ में बोरी 7-8 किलो की!
मामला सामने आने के बाद मंत्री ने पशु चिकित्सक डा. बीआर पाटिल से जानकारी ली। चिकित्सक ने मंत्री को बताया कि पशुपालकों को 20-20 किलो भूसे की बोरी वितरित की जा रही है।
लेकिन मौके पर मौजूद ग्रामीणों की शिकायत और मंत्री द्वारा खुद बोरी उठाकर किए गए आकलन के बीच अंतर देखकर मंत्री नाराज हो गए।
उन्होंने अधिकारियों को साफ शब्दों में कहा कि आपदा के समय राहत सामग्री में किसी भी तरह की गड़बड़ी या अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी।

‘आपदा में अवसर मत खोजिए’, मंत्री ने अधिकारियों को दी दो टूक चेतावनी
भूसे की मात्रा को लेकर नाराज मंत्री सुरेश राही ने पशु विभाग और तहसील प्रशासन को दो टूक शब्दों में हिदायत दी कि आपदा के समय आपदा में अवसर खोजने की कोशिश न की जाए।
उन्होंने पशु विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि निर्धारित मात्रा के अनुसार ही भूसा वितरित किया जाए और बेजुबान पशुओं के हक में किसी प्रकार की कटौती नहीं होनी चाहिए।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि बाढ़ जैसी आपदा में राहत सामग्री जरूरतमंदों तक पूरी मात्रा में पहुंचना चाहिए।

237 पशुओं के मुकाबले 96 पशुपालकों को भूसा वितरण की जानकारी
निरीक्षण के दौरान मंत्री के सामने उपलब्ध कराए गए रिकॉर्ड में 237 पशुओं के लिए 96 पशुपालकों को भूसा वितरित किए जाने की जानकारी प्रस्तुत की गई।
मंत्री ने अधिकारियों से राहत वितरण की व्यवस्था को पारदर्शी रखने और जरूरत के अनुसार पशुपालकों को चारा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
सुंदरनगर में घर डूबे, 25 परिवार तटबंध पर लेने को मजबूर
बाराबंकी में बाढ़ का कहर दूसरे दिन भी जारी रहा। सुंदरनगर, ललपुरवा, कोडरी, बेलहरी और बलाईपुर समेत कई गांव पूरी तरह जलमग्न रहे।
घरों में पानी भर जाने के कारण करीब 25 परिवार तटबंध पर झुग्गी-झोपड़ी बनाकर रहने को मजबूर हैं।
बाढ़ के कारण ग्रामीणों के सामने रहने, खाने और पशुओं के चारे की समस्या बनी हुई है।
सुंदरनगर के 400 लोगों को लगातार दूसरे दिन मिले लंच पैकेट
बाढ़ प्रभावित सुंदरनगर के करीब 400 लोगों को लगातार दूसरे दिन लंच पैकेट उपलब्ध कराए गए।
प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित लोगों तक भोजन और अन्य आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
हालांकि ग्रामीणों की शिकायत है कि बाढ़ की स्थिति गंभीर होने के कारण राहत व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है।
मंत्री ने जलमग्न सुंदरनगर और उधिया में सरयू के जलस्तर का लिया जायजा
प्रभारी मंत्री ने सुंदरनगर के जलमग्न क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। इसके बाद वह उधिया गांव पहुंचे और वहां सरयू नदी के जलस्तर का जायजा लिया।
उन्होंने ग्रामीणों से संवाद करते हुए उनकी समस्याओं और भविष्य की जरूरतों के बारे में जानकारी ली।
मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार बाढ़ प्रभावित लोगों के साथ खड़ी है और आपदा की स्थिति में प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
बाढ़ पीड़ितों के आवास और पट्टे के मुद्दे पर भी सवाल
ग्रामीणों से बातचीत के दौरान बाढ़ पीड़ित परिवारों के आवास और पट्टा उपलब्ध कराने से जुड़े मुद्दे भी सामने आए।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जाए और लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
पुलिस-प्रशासन के अधिकारी रहे मौजूद
निरीक्षण के दौरान पुलिस कप्तान अर्पित विजयवर्गीय, जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह, जिला पूर्ति निरीक्षक राकेश तिवारी, उप जिलाधिकारी रामनगर आकांक्षा गुप्ता, तहसीलदार विपुल सिंह, सीओ फतेहपुर जगत कनौजिया और खंड विकास अधिकारी देवेंद्र प्रताप सिंह समेत संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
बाढ़ के बीच सबसे बड़ा सवाल: राहत कितनी और किसे?
बाराबंकी में सरयू नदी के बढ़े जलस्तर के बीच कई गांवों के जलमग्न होने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं। ऐसे में राहत सामग्री और पशुओं के चारे की मात्रा को लेकर उठे सवाल प्रशासन के लिए गंभीर हैं।
मंत्री का मौके पर बोरी उठाकर भूसे की मात्रा पर सवाल उठाना इस बात का संकेत है कि बाढ़ राहत व्यवस्था की निगरानी केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जमीन पर भी उसकी जांच जरूरी है।
रिपोर्ट – निरंकार त्रिवेदी













