Barabanki News: बाराबंकी के ईंट भट्ठा व्यापारी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर सूदखोरों से जान का खतरा बताया।
आरोप है कि 74 लाख रुपये के कर्ज पर 6 साल में 2 करोड़ 44 लाख रुपये ब्याज चुकाने के बाद भी उत्पीड़न जारी है।
व्यापारी ने पुलिस-प्रशासन पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया। रिपोर्ट पढ़ें।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 25 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 20 जुलाई 2026 को बाराबंकी के विश्व प्रसिद्ध लोधेश्वर महादेवा धाम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर बड़ा दावा किया था। मुख्यमंत्री ने कहा था कि उनकी सरकार में बेटियां और व्यापारी पूरी तरह सुरक्षित हैं तथा किसी भी अपराधी के लिए केवल दो ही जगह हैं—जेल या जहन्नुम।
लेकिन मुख्यमंत्री के इस बयान के महज दो दिन बाद बाराबंकी के एक ईंट भट्ठा व्यापारी द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए शिकायती पत्र ने इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। व्यापारी ने आरोप लगाया है कि वर्षों से सफेदपोश सूदखोरों द्वारा मानसिक, आर्थिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है, लेकिन पुलिस और प्रशासन से शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
भट्ठा व्यापारी ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में सुनाई अपनी दर्दभरी कहानी
देवा ब्लॉक के ग्राम एवं पोस्ट माधौपुर निवासी श्री जैसीराम वर्मा, जो रामनगर तृतीय से जिला पंचायत सदस्य होने के साथ-साथ ईंट भट्ठा व्यवसाय से जुड़े हैं, ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे पत्र में बताया कि कोरोना काल के दौरान व्यापार और पारिवारिक आवश्यकताओं के कारण उन्हें विभिन्न लोगों से भारी ब्याज पर कर्ज लेना पड़ा।
व्यापारी का आरोप है कि उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर सूदखोरों ने अवैध और अमानवीय तरीके से धन उगाही शुरू कर दी, जो आज तक जारी है।
34 लाख का कर्ज, 87 लाख ब्याज चुकाया, फिर भी बंद नहीं हुआ बहीखाता
शिकायत के अनुसार वर्ष 2020 में उन्होंने चौहान गेस्ट हाउस के संचालक सुरेश चौहान से 34 लाख रुपये का कर्ज लिया था।
व्यापारी का आरोप है कि—
- कर्ज पर 4 प्रतिशत प्रतिमाह ब्याज तय किया गया।
- हर महीने 1.36 लाख रुपये ब्याज के रूप में चुकाए।
- छह वर्षों में लगभग 87 लाख रुपये ब्याज के रूप में दे चुके हैं।
इसके बावजूद मूल रकम समाप्त नहीं मानी जा रही और लगातार वसूली की जा रही है।
उन्होंने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में दावा किया है कि जब उन्होंने आर्थिक स्थिति खराब होने का हवाला देकर भुगतान में असमर्थता जताई, तब सुरेश चौहान ने उन्हें फोन पर गालियां दीं, धमकियां दीं और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।
व्यापारी ने यह भी कहा कि उनके पास 14 और 15 जुलाई 2026 की कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है, जिसमें उन्हें अपमानित और धमकाया जा रहा है।
20 लाख के बदले 13 बीघा जमीन, फिर भी जारी है कथित वसूली
व्यापारी ने अपने शिकायती पत्र में आरोप लगाया कि उन्होंने कोरोना काल के दौरान जगदीश सिंह, निवासी अल्लापुर, थाना फतेहपुर, से 20 लाख रुपये का कर्ज लिया था।
आरोप है कि—
- कर्ज के एवज में दबाव बनाकर उनकी 13 बीघा जमीन अपने नाम लिखवा ली गई।
- जमीन की वर्तमान बाजार कीमत लगभग 90 लाख रुपये बताई गई है।
- इसके बावजूद आरोपित लगातार 3 प्रतिशत मासिक ब्याज की मांग कर रहा है।
व्यापारी का दावा है कि वह लगभग 47 लाख रुपये मूल्य की ईंटें भी दे चुके हैं, लेकिन कथित रूप से वसूली अभी भी जारी है।
एक कर्ज चुकाने के लिए दूसरा कर्ज, फिर तीसरा… बढ़ता गया आर्थिक संकट
व्यापारी ने बताया कि पहले दो लोगों का ब्याज चुकाने के लिए वर्ष 2024 में उन्हें रामकरन, निवासी अगानपुर, थाना रामनगर, से भी 20 लाख रुपये का कर्ज लेना पड़ा।
उनका आरोप है कि—
- यहां भी 4 प्रतिशत प्रतिमाह ब्याज लिया जा रहा है।
- मूलधन लौटाने के बाद भी ब्याज की मांग समाप्त नहीं हुई।
- लगातार आर्थिक दबाव बनाया जा रहा है।
परिवार को जान से मारने, चेक बाउंस केस में फंसाने की भी धमकी
व्यापारी ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि कथित सूदखोर लगातार उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि—
- घर पहुंचकर पत्नी, बेटे और बेटी को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी जा रही है।
- सभी आरोपितों के पास उनके हस्ताक्षरित चेक मौजूद हैं।
- चेक बाउंस के मामलों में फंसाकर जेल भेजने की धमकी भी दी जा रही है।
उन्होंने लिखा कि लगातार मानसिक उत्पीड़न के कारण वह गहरे अवसाद (डिप्रेशन) में हैं और पूर्व से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण उन्हें किसी भी समय गंभीर शारीरिक नुकसान हो सकता है।
एसपी और डीएम से शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं
व्यापारी का कहना है कि उन्होंने इससे पहले जिलाधिकारी बाराबंकी और पुलिस अधीक्षक बाराबंकी को भी शिकायत पत्र दिया था।
इसके बावजूद, उनके अनुसार, सूदखोरी जैसे गंभीर मामले में अभी तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
मुख्यमंत्री से जान माल की सुरक्षा की गुहार
भट्ठा व्यापारी ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
बाराबंकी में सूदखोरी के कारण कई व्यापारी गंवा चुके हैं जान
शिकायत में व्यापारी ने यह भी उल्लेख किया कि वह अकेले ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जो कथित सूदखोरी का शिकार हुए हों। हाल के वर्षों में कई व्यापारी आर्थिक और मानसिक उत्पीड़न के कारण आत्महत्या कर चुके हैं।
केस नंबर-1: कृष्णा स्वीट्स के मालिक अनूप गुप्ता
6 जुलाई 2026 को शहर के प्रतिष्ठित मिठाई कारोबारी अनूप गुप्ता ने फरक्का एक्सप्रेस के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली थी। परिजनों और करीबी लोगों के अनुसार व्यवसाय विस्तार के लिए उन्होंने कथित तौर पर भारी ब्याज पर करीब दो करोड़ रुपये उधार लिए थे और सूदखोर लगातार वसूली का दबाव बना रहे थे।
केस नंबर-2: टेंट कारोबारी संजय जायसवाल
21 जनवरी 2026 को शहर कोतवाली क्षेत्र के आजाद नगर निवासी टेंट एवं किराना व्यवसायी संजय जायसवाल ने अपने घर में लाइसेंसी पिस्टल से गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। उस मामले में भी आर्थिक दबाव और कथित सूदखोरी की चर्चा सामने आई थी।
केस नंबर-3: कल्पना साड़ी के मालिक नीरज जैन
12 अक्टूबर 2025 को प्रतिष्ठित कपड़ा व्यापारी नीरज जैन ने कथित सूदखोरों के दबाव और धमकियों से परेशान होकर आत्महत्या कर ली थी। उस मामले में मोबाइल कॉल रिकॉर्डिंग भी सामने आई थी। जिसमें सफेदपोश सूदखोर द्वारा भद्दी-भद्दी गालियां देकर अपमानित कर पैसा वापसी के लिए धमकाया जा रहा था।
केस नंबर-4: व्यापारी नेता हर्षित टंडन
वर्ष 2024 में व्यापार मंडल और भाजपा से जुड़े शहर के बड़े व्यापारी हर्षित टंडन ने भी कथित कर्ज और ब्याज के दबाव में आत्महत्या कर ली थी। उस मामले में भी कथित सूदखोरी और उत्पीड़न के आरोप सामने आए थे।
जनपद में किसके संरक्षण में फल-फूल रहा है सूदखोरी का नेटवर्क
ये चार मामले केवल उदाहरण भर हैं। बाराबंकी में कथित सफेदपोश सूदखोरों के जाल में फंसकर कई लोगों को अपनी जीवनभर की कमाई, जमीन-जायदाद और यहां तक कि अपनी जान तक गंवानी पड़ी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक के बाद एक ऐसे मामले सामने आने के बावजूद अब तक इस अवैध सूदखोरी नेटवर्क पर कोई व्यापक और निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि आज भी शहर के कई इलाकों में खुलेआम ब्याज पर रुपये देने का कारोबार संचालित हो रहा है। समय पर ब्याज या रकम न चुका पाने वाले लोगों को कथित तौर पर धमकाने, गाली-गलौज करने और मारपीट जैसी घटनाओं की शिकायतें भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। इसके बावजूद पीड़ितों का कहना है कि संबंधित लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होती।
बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर बाराबंकी में कथित सूदखोरी का यह नेटवर्क किसके संरक्षण में संचालित हो रहा है?
राजनेताओं और अधिकारियों के संरक्षण की चर्चा
क्षेत्र में यह चर्चा भी आम है कि इस कथित सूदखोरी के कारोबार को प्रभावशाली लोगों (राजनेताओं और अधिकारियों) का संरक्षण प्राप्त है। इसके एवज में सूदखोरी के अवैध कारोबार से होने वाली मोटी कमाई का एक बड़ा हिस्सा भी उन्हें पहुंचाया जाता है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन लगातार सामने आ रहे मामलों ने पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली और राजनेताओं की भूमिका पर प्रश्नचिन्ह लगाने के साथ इस पूरे नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिपोर्ट – कामरान अल्वी












