Barabanki News: बाराबंकी के सफेदाबाद रेलवे क्रॉसिंग के पास मिले 18 वर्षीय मोहम्मद सैफ के शव को 40 दिन बाद कब्र से निकाला गया।
परिजनों ने बाराबंकी पुलिस पर शव की पहचान में लापरवाही, रिकॉर्ड का मिलान न करने और सूचना सार्वजनिक न करने के गंभीर आरोप लगाए।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 24 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। करीब 40 दिन पहले सफेदाबाद रेलवे क्रॉसिंग के पास अज्ञात अवस्था में मिले 18 वर्षीय युवक मोहम्मद सैफ के शव को शुक्रवार को जिला प्रशासन के आदेश पर कब्र से बाहर निकाला गया। यह कार्रवाई जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह के निर्देश पर प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस की मौजूदगी में पूरी कराई गई। शव को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के बाद आगे की कार्रवाई के लिए लखनऊ भेज दिया गया।
मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब मृतक के परिजनों ने बाराबंकी पुलिस पर शव की पहचान में गंभीर लापरवाही बरतने, रिकॉर्ड का मिलान न करने और समय पर सूचना सार्वजनिक न करने जैसे गंभीर आरोप लगाए।
14 जून को लापता हुआ था युवक, अगले ही दिन मिला था रेलवे ट्रैक के पास शव
जानकारी के अनुसार, लखनऊ के सआदतगंज निवासी 18 वर्षीय मोहम्मद सैफ 14 जून 2026 की रात लगभग 8 बजे घर से निकला था, जिसके बाद वह लापता हो गया। परिवार ने काफी तलाश के बाद 17 जून 2026 को थाना सआदतगंज में गुमशुदगी दर्ज कराई।
इसी बीच 15 जून 2026 को बाराबंकी जिले के सफेदाबाद रेलवे क्रॉसिंग के पास एक अज्ञात युवक का शव बरामद हुआ। स्थानीय पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम कराया, लेकिन पहचान न होने का हवाला देते हुए 19 जून 2026 को उसे थाना जहांगीराबाद क्षेत्र स्थित सोता कब्रिस्तान में दफना दिया गया।
पिता ने शव की पहचान बेटे के रूप में की, हत्या की आशंका जताई
कुछ समय बाद मृतक के पिता मोहम्मद आसिफ, निवासी सआदतगंज, लखनऊ ने शव की पहचान अपने पुत्र मोहम्मद सैफ के रूप में की। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले में हत्या की आशंका व्यक्त करते हुए मुकदमा दर्ज कराया।
परिजनों का दावा है कि मामले में नामजद आरोपियों को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है, लेकिन अब भी कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच बाकी है।
डीएम के आदेश पर कब्र से निकाला गया शव
शुक्रवार को जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह के आदेश पर नायब तहसीलदार सदर (देवा), थाना जहांगीराबाद के प्रभारी निरीक्षक हरि प्रसाद उपाध्याय तथा अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में कब्र से शव बाहर निकाला गया।
कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शव को आगे की जांच और आवश्यक प्रक्रिया के लिए लखनऊ भेज दिया गया।
परिजनों का आरोप- हाथ पर ‘सैफ’ लिखा था, फिर भी नहीं हो सकी पहचान
शव निकाले जाने के दौरान मृतक के परिजनों ने बाराबंकी पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।
परिवार का आरोप है कि मृतक के हाथ पर स्पष्ट रूप से “सैफ” नाम लिखा हुआ था, इसके बावजूद पुलिस ने उसकी पहचान सुनिश्चित करने का गंभीर प्रयास नहीं किया और शव को अज्ञात मानकर दफना दिया।
परिजनों का कहना है कि यदि गुमशुदगी के रिकॉर्ड का समय पर मिलान किया जाता या शव की पहचान की प्रक्रिया गंभीरता से अपनाई जाती, तो उन्हें अपने बेटे का अंतिम दर्शन करने के लिए 40 दिन तक इंतजार नहीं करना पड़ता।
पोस्टमार्टम से जुड़ी फाइल में देरी का भी आरोप
मृतक के परिजनों ने पोस्टमार्टम और पंचनामा संबंधी कार्य देखने वाले सिपाही नितेश पाल पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
परिवार का कहना है कि जिला प्रशासन के आदेश जारी होने के बावजूद दो दिनों तक संबंधित फाइल आगे नहीं बढ़ाई गई, जिसके कारण शव को कब्र से निकालने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित पुलिसकर्मी समय पर मौके पर नहीं पहुंचे।
सोशल मीडिया और मीडिया में तस्वीर जारी होती तो पहले हो जाती पहचान
परिवार ने यह भी कहा कि यदि अज्ञात शव की तस्वीर और पहचान संबंधी जानकारी समय रहते स्थानीय मीडिया, सोशल मीडिया या पुलिस के सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर जारी की जाती, तो संभव था कि मोहम्मद सैफ की पहचान पहले ही हो जाती।
उनका कहना है कि पुलिस की इस चूक के कारण उनका बेटा लावारिस शव के रूप में दफना दिया गया, जो परिवार के लिए बेहद पीड़ादायक है।
एसपी से शिकायत कर कार्रवाई की मांग
परिजनों ने पूरे मामले में बाराबंकी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अज्ञात शवों की पहचान, रिकॉर्ड मिलान और परिजनों तक सूचना पहुंचाने की प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही हुई है।
उन्होंने कहा कि वे पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय से मिलकर पूरे मामले की शिकायत करेंगे तथा दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की मांग करेंगे।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद / उस्मान अली











