बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 23 जून 2026
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिला अस्पताल में सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड जैसी महत्वपूर्ण जांच सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के चलते मरीजों को रिपोर्ट नहीं मिल पा रही है। स्थिति यह है कि पीड़ितों को बाराबंकी से लेकर लखनऊ के अस्पतालों तक बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे न केवल मरीज बल्कि पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।
स्वास्थ्य विभाग पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद यदि मरीजों को सामान्य मेडिकल रिपोर्ट के लिए दूसरे जिलों की दौड़ लगानी पड़े, तो यह व्यवस्था की गंभीर खामी को उजागर करता है।
मारपीट के पीड़ित को 15 दिनों से नहीं मिल सकी सीटी स्कैन रिपोर्ट
थाना सुबेहा क्षेत्र के निवासी इस्तखार अहमद एक मारपीट के मामले में मेडिकल परीक्षण के लिए जिला अस्पताल पहुंचे थे। उन्हें सिर की चोटों की जांच के लिए सीटी स्कैन कराने की आवश्यकता थी, लेकिन रिपोर्ट तैयार करने वाले विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध न होने के कारण उन्हें लखनऊ रेफर कर दिया गया।
पीड़ित का आरोप है कि पिछले लगभग 15 दिनों में वह दो बार लखनऊ ट्रॉमा सेंटर और एक बार डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल का चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन अब तक उनका सीटी स्कैन नहीं हो पाया। हर बार उन्हें किसी न किसी कारण से वापस भेज दिया गया।
इस्तखार अहमद का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट न मिलने के कारण उनके मामले की कानूनी प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।
महिला मरीज का अल्ट्रासाउंड भी विशेषज्ञ चिकित्सक के अभाव में अटका
यह समस्या केवल एक मरीज तक सीमित नहीं है। हाल ही में लोनीकटरा थाना क्षेत्र की एक महिला को मारपीट के मामले में अल्ट्रासाउंड जांच की आवश्यकता थी। जिला अस्पताल में विशेषज्ञ उपलब्ध न होने के कारण उसे महिला अस्पताल भेजा गया।
बताया गया कि महिला अस्पताल में भी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट जारी करने वाले चिकित्सक अवकाश पर थे, जिसके चलते महिला को भी रिपोर्ट नहीं मिल सकी और उसे वापस लौटना पड़ा।
जांच मशीनें मौजूद, लेकिन रिपोर्ट देने वाले विशेषज्ञ नहीं
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड जैसी जांचें तकनीकी कर्मचारी कर सकते हैं, लेकिन उनकी रिपोर्ट पर अंतिम चिकित्सकीय प्रमाणन केवल अधिकृत विशेषज्ञ डॉक्टर ही कर सकते हैं।
ऐसे में जब विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध नहीं होते, तो जांच होने के बावजूद मरीजों को रिपोर्ट नहीं मिल पाती। इसका सीधा असर मेडिकल, कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर पड़ता है।
पुलिसकर्मियों को भी भुगतनी पड़ रही परेशानी
मारपीट, सड़क हादसों और अन्य आपराधिक मामलों में पुलिस को पीड़ितों का मेडिकल परीक्षण कराना अनिवार्य होता है। लेकिन रिपोर्ट न मिलने के कारण पुलिसकर्मियों को भी मरीजों के साथ अस्पतालों के बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
इससे पुलिस का समय और संसाधन दोनों प्रभावित हो रहे हैं। वहीं गंभीर मामलों में मेडिकल रिपोर्ट में देरी न्यायिक प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकती है।
जिला अस्पताल रेफर सेंटर बना, फिर भी नहीं मिल रही पूरी सुविधा
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिले भर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) से मरीजों को बाराबंकी जिला अस्पताल रेफर किया जाता है, तो फिर जिला अस्पताल में ही सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट की समुचित व्यवस्था क्यों नहीं है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध नहीं हैं तो मरीजों को सीधे उच्च चिकित्सा संस्थानों के लिए रेफर करने की स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि उन्हें अनावश्यक रूप से भटकना न पड़े।
सीएमओ बोले—मामला संज्ञान में, जल्द निकलेगा समाधान
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. रंजन गौतम ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने कहा कि संबंधित अस्पतालों के अधिकारियों और चिकित्सकों से वार्ता कर समस्या का समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
सीएमओ ने आश्वासन दिया कि मरीजों को होने वाली असुविधा को गंभीरता से लिया जा रहा है और जल्द ही आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठ रहे गंभीर सवाल
बाराबंकी जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी और जांच रिपोर्ट जारी न हो पाने की समस्या ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीजों का कहना है कि यदि जिला अस्पताल में ही आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं और विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होंगे, तो आम लोगों को समय पर इलाज और न्याय दोनों से वंचित होना पड़ेगा।
अब लोगों की निगाहें स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि आखिर इस समस्या का स्थायी समाधान कब तक किया जाता है।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद / उस्मान अली











