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बाराबंकी ट्रॉमा सेंटर की बदहाली पर भड़की भारतीय किसान मजदूर यूनियन दशहरी, CMO को सौंपा ज्ञापन; 32 लाख लोगों की स्वास्थ्य सुरक्षा पर उठाए सवाल

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बाराबंकी में भारतीय किसान मजदूर यूनियन दशहरी ने जिला अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर CMO को ज्ञापन सौंपा।

संगठन ने ICU, पैथोलॉजी, दवा वितरण, संक्रमण नियंत्रण और ट्रॉमा सेंटर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 17 जून 2026

जनपद बाराबंकी की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भारतीय किसान मजदूर यूनियन दशहरी ने जिला अस्पताल एवं ट्रॉमा सेंटर में व्याप्त कथित अव्यवस्थाओं को लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को ज्ञापन सौंपते हुए उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। संगठन का आरोप है कि करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित ट्रॉमा सेंटर वर्षों बाद भी अपने मूल उद्देश्य को पूरा नहीं कर पा रहा है, जिसके कारण गंभीर मरीजों को इलाज के लिए लखनऊ समेत अन्य जनपदों में रेफर किया जा रहा है।

यूनियन के प्रदेश सचिव एवं जिलाध्यक्ष निहाल अहमद सिद्दीकी ने कहा कि यह केवल स्वास्थ्य सेवाओं का मामला नहीं बल्कि जिले के लगभग 32 लाख लोगों के जीवन और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है।

अनुच्छेद-21 के तहत स्वास्थ्य अधिकार का हवाला

मुख्य चिकित्सा अधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत प्रत्येक नागरिक को जीवन एवं स्वास्थ्य सुरक्षा का अधिकार प्राप्त है, लेकिन बाराबंकी में स्वास्थ्य सेवाओं की मौजूदा स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

संगठन का आरोप है कि जिला अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में उपलब्ध संसाधनों का समुचित उपयोग नहीं हो रहा है, जिससे मरीजों को अपेक्षित चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

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ICU और पैथोलॉजी सेवाओं पर उठे सवाल

ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि ट्रॉमा सेंटर परिसर में स्थापित लगभग 10 बेड का ICU लंबे समय से पूर्ण क्षमता के साथ संचालित नहीं हो रहा है। इसके अलावा ट्रॉमा सेंटर में पैथोलॉजी सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद रात के समय आवश्यक जांच सेवाएं बंद रहती हैं।

यूनियन का कहना है कि ऐसी स्थिति में गंभीर मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है तथा कई बार उपचार में देरी मरीजों के लिए घातक साबित हो सकती है।

विशेषज्ञ डॉक्टरों और संसाधनों की कमी का आरोप

संगठन ने ट्रॉमा सेंटर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्वीकृत मानकों के अनुरूप विशेषज्ञ चिकित्सकों, प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई है।

यही कारण है कि सड़क दुर्घटना, हार्ट अटैक, सिर की गंभीर चोट और अन्य आपातकालीन मामलों में मरीजों को तत्काल लखनऊ या अन्य बड़े अस्पतालों के लिए रेफर कर दिया जाता है।

संक्रमण नियंत्रण और बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन पर भी चिंता

ज्ञापन में अस्पताल की संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था और बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन को लेकर भी गंभीर चिंताएं व्यक्त की गई हैं।

संगठन ने स्थानीय स्तर पर प्राप्त सूचनाओं का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि जीवित मरीजों और शवों के एक्स-रे के लिए एक ही मशीन का उपयोग किए जाने संबंधी शिकायतें सामने आई हैं। यूनियन ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है ताकि स्वास्थ्य मानकों का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।

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महिला अस्पताल की व्यवस्था पर भी उठे सवाल

भारतीय किसान मजदूर यूनियन दशहरी ने महिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि ओपीडी में आने वाली महिलाओं के साथ मौजूद पुरुष परिजनों को प्रवेश द्वार पर ही रोक दिया जाता है।

संगठन का कहना है कि वृद्ध, अशिक्षित और गंभीर रूप से बीमार महिला मरीजों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस व्यवस्था की समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है।

दवा वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग

ज्ञापन में अस्पताल की दवा वितरण व्यवस्था को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई गई है। यूनियन का आरोप है कि चिकित्सकों द्वारा लिखी गई कई दवाएं अस्पताल में उपलब्ध नहीं होतीं, लेकिन इसकी स्पष्ट जानकारी मरीजों को नहीं दी जाती।

इससे गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ उपचार संबंधी भ्रम का सामना करना पड़ता है। संगठन ने अस्पताल में उपलब्ध एवं अनुपलब्ध दवाओं की सूची सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने की मांग की है।

2016 में बना ट्रॉमा सेंटर अब भी पूरी क्षमता से नहीं संचालित

ज्ञापन में विशेष रूप से वर्ष 2016 में करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित ट्रॉमा सेंटर का उल्लेख करते हुए कहा गया कि लगभग एक दशक बीत जाने के बावजूद यह केंद्र पूरी क्षमता के साथ संचालित नहीं हो सका है।

राष्ट्रीय राजमार्गों और व्यस्त यातायात मार्गों से जुड़े बाराबंकी जिले में प्रतिदिन बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, लेकिन गंभीर मरीजों को समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती।

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जांच और कार्रवाई की मांग, आंदोलन की चेतावनी

भारतीय किसान मजदूर यूनियन दशहरी ने मांग की है कि जिला अस्पताल, ट्रॉमा सेंटर, ICU, पैथोलॉजी सेवाओं, संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था और दवा वितरण प्रणाली की किसी वरिष्ठ अधिकारी अथवा सक्षम समिति से निष्पक्ष जांच कराई जाए।

संगठन ने मांग की है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता पाई जाए तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाए तथा जांच रिपोर्ट को जनहित में सार्वजनिक किया जाए।

यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े इन गंभीर मुद्दों पर शीघ्र प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।

ज्ञापन सौंपने के दौरान सुशील कुमार, रमेश चंद वर्मा एडवोकेट, रिजवान, निधीश एडवोकेट, अलीम, दिलशाद, रविंद्र, सोनू, इमरान, जियाउद्दीन सहित कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।

रिपोर्ट – मंसूफ अहमद / उस्मान अली

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