बाराबंकी के बदोसराय थाना क्षेत्र में एक वृद्ध ने पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय से शिकायत कर अपने पुत्र को फर्जी आयुध अधिनियम के मुकदमे में फंसाने का आरोप लगाया है।
शिकायत में उपनिरीक्षक समेत अन्य पुलिसकर्मियों पर रिश्वत मांगने, मारपीट करने और झूठा मुकदमा दर्ज कराने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 17 जून 2026
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करने वाला एक मामला सामने आया है। जिले के बदोसराय थाना क्षेत्र निवासी एक वृद्ध ने पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय से मिलकर अपने पुत्र को कथित रूप से फर्जी मुकदमे में फंसाए जाने की शिकायत की है। शिकायत में थाना बदोसराय में तैनात एक उपनिरीक्षक, एक कांस्टेबल और अन्य पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
पीड़ित ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
एसपी कार्यालय पहुंचकर सौंपा शिकायती पत्र
थाना बदोसराय क्षेत्र के ग्राम मरकामऊ निवासी बाबू पुत्र मजीद ने पुलिस अधीक्षक को दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि उनके पुत्र अबू सालिम को सुनियोजित तरीके से आयुध अधिनियम के मुकदमे में फंसाया गया है।
शिकायतकर्ता के अनुसार उनका पुत्र अबू सालिम मुंबई में एक होटल में नौकरी करता है और छुट्टी पर अपने घर आया हुआ था। इसी दौरान स्थानीय पुलिस द्वारा उसके खिलाफ कार्रवाई की गई।
50 हजार रुपये मांगने का आरोप
शिकायती पत्र में कहा गया है कि 23 मई 2026 की शाम करीब छह बजे थाना बदोसराय में तैनात उपनिरीक्षक लक्ष्मीकांत तिवारी, कांस्टेबल वीरेन्द्र कुमार तथा दो अन्य पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे और अबू सालिम को अपने साथ ले गए।
आरोप है कि थाने के पीछे ले जाकर पुलिसकर्मियों ने उससे 50 हजार रुपये की मांग की। शिकायतकर्ता का कहना है कि रकम देने में असमर्थता जताने पर उसके पुत्र के साथ कथित रूप से गाली-गलौज और मारपीट की गई।
चाकू पकड़ा कर वीडियो बनाने का आरोप
वृद्ध द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र में एक गंभीर आरोप यह भी लगाया गया है कि पुलिसकर्मियों ने अपने पास मौजूद एक चाकू जमीन पर गिराकर अबू सालिम से उसे उठाने को कहा।
शिकायत के अनुसार उसी दौरान उसका वीडियो भी बनाया गया और बाद में इसी आधार पर उसके खिलाफ मुकदमा अपराध संख्या 117/2026 दर्ज कर दिया गया।
आरोप है कि पुलिस ने अबू सालिम के विरुद्ध धारा 25/4 आयुध अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर उसे अवैध रूप से फंसाने का प्रयास किया।
निष्पक्ष जांच और मुकदमा समाप्त करने की मांग
शिकायतकर्ता बाबू ने पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। उन्होंने अपने पुत्र के खिलाफ दर्ज मुकदमे को समाप्त करने तथा कथित रूप से षड्यंत्र रचने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई किए जाने की मांग उठाई है।
उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने आ सकती है।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी सच्चाई
फिलहाल यह आरोप शिकायतकर्ता द्वारा पुलिस अधीक्षक को दिए गए प्रार्थना पत्र में लगाए गए हैं। मामले में पुलिस विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अब पूरे मामले में पुलिस अधीक्षक स्तर पर होने वाली जांच और उसके निष्कर्षों पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाती है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस प्रकरण ने एक बार फिर पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर चर्चा छेड़ दी है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला पुलिस विभाग के लिए गंभीर चिंता का विषय बन सकता है। वहीं यदि आरोप निराधार साबित होते हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद











