बाराबंकी के सुबेहा क्षेत्र के शरीफाबाद में दो माह से तेंदुए की दहशत है। ग्रामीण ने वीडियो बनाया। वन विभाग तीन दिन से कांबिंग कर रहा, बच्चे भी प्रभावित।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 07 अक्टूबर 2026
बाराबंकी जिले के सुबेहा थाना क्षेत्र के शरीफाबाद गांव और आसपास के इलाकों में करीब दो माह से तेंदुए की दहशत बनी हुई है। ग्रामीणों का दावा है कि तेंदुआ लगातार खेतों और जंगल के आसपास चहलकदमी करता दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों ने कई जंगली जानवरों के शिकार किए जाने और उनके शव अलग-अलग स्थानों पर मिलने की बात भी कही है।
ग्रामीणों के मुताबिक लगातार सूचना दिए जाने के बावजूद तेंदुआ अब तक वन विभाग की पकड़ में नहीं आया है। सोमवार को खेत में फसल काटते समय ग्रामीण रामजीत कश्यप ने तेंदुए को अपनी आंखों से देखा और मोबाइल फोन में उसकी चहलकदमी का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद वन विभाग की टीम सक्रिय हुई।
फिलहाल वन विभाग की टीम पिछले तीन दिनों से जंगल और आसपास के खेतों में कांबिंग कर रही है, लेकिन तेंदुए का कोई सुराग नहीं मिल सका है। तेंदुए की मौजूदगी को लेकर ग्रामीणों में डर का माहौल है और खेतों में खड़ी फसल होने के बावजूद कई लोग खेतों में जाने से बच रहे हैं।
दो महीने से तेंदुए की चहलकदमी
ग्रामीण रामजीत कश्यप के मुताबिक तेंदुआ करीब दो महीने से क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। उनका कहना है कि तेंदुआ कई बार खेतों और जंगल के आसपास चहलकदमी करता नजर आया। ग्रामीणों ने कई जंगली जानवरों के शिकार किए जाने और उनके शव मिलने की बात भी कही है।
रामजीत का कहना है कि क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी की जानकारी वन विभाग को कई बार दी गई, लेकिन शुरुआत में तेंदुए की मौजूदगी को लेकर विभाग की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं दिखाई दी।
सोमवार को जब रामजीत खेत में फसल काट रहे थे, तभी उन्होंने तेंदुए को सामने देखा। उन्होंने दूर से मोबाइल फोन से उसका वीडियो बना लिया। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद वन विभाग की टीम ने क्षेत्र में निगरानी और तलाश तेज कर दी।

वीडियो वायरल होने के बाद सक्रिय हुआ वन विभाग
तेंदुए का वीडियो सामने आने के बाद वन विभाग की टीम ने शरीफाबाद और आसपास के संभावित इलाकों में कांबिंग शुरू कर दी। पिछले तीन दिनों से वनकर्मी जंगल, खेतों और तेंदुए की आवाजाही की आशंका वाले क्षेत्रों में तलाश कर रहे हैं।
हालांकि अभी तक टीम को तेंदुए का कोई सुराग नहीं मिला है। वन विभाग की ओर से तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए निगरानी के इंतजाम किए जा रहे हैं।
कैमरा लगा होने के बावजूद फुटेज नहीं मिलने पर उठे सवाल
ग्रामीण रामजीत कश्यप ने तेंदुए को पकड़ने के लिए किए जा रहे इंतजामों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जिस स्थान पर उन्होंने तेंदुए की चहलकदमी का वीडियो बनाया था, उसी स्थान के आसपास वन विभाग का कैमरा भी लगाया गया था।
ग्रामीण का सवाल है कि यदि उसी स्थान पर तेंदुआ दिखाई दिया था तो कैमरे में उसकी गतिविधि की फुटेज क्यों नहीं मिली। हालांकि कैमरे में फुटेज नहीं मिलने के तकनीकी या अन्य कारणों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
खेतों में खड़ी फसल, लेकिन तेंदुए के डर से जाने से बच रहे ग्रामीण
तेंदुए की दहशत का असर ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी दिखाई दे रहा है। खेतों में फसल खड़ी है और इस समय किसानों को खेतों में काम करने की जरूरत है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुए के डर से वे अकेले खेतों में जाने से बच रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक तेंदुआ पकड़ा नहीं जाता, तब तक गांव में भय का माहौल बना रहेगा। जंगल और खेतों के आसपास रहने वाले लोगों को खास तौर पर चिंता सता रही है कि कहीं तेंदुआ किसी व्यक्ति या बच्चे को निशाना न बना दे।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की बढ़ी चिंता
तेंदुए की दहशत का असर स्कूली बच्चों पर भी पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में छोटे-छोटे बच्चे इसी रास्ते से होकर स्कूल जाते हैं। ऐसे में अभिभावक बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
बच्चों को समूह में स्कूल आने की सलाह
कंपोजिट विद्यालय के शिक्षक दुर्गेश कुमार ने बताया कि तेंदुए की दहशत बच्चों में भी बनी हुई है। विद्यालय आने वाले बच्चों को जागरूक किया जा रहा है कि वे समूह में स्कूल आएं।
जो बच्चे अकेले स्कूल आते हैं, उनके अभिभावकों को सूचना देकर कहा गया है कि वे बच्चों को स्कूल तक छोड़कर जाएं और छुट्टी के समय उन्हें अपने साथ लेकर घर लौटें।
स्कूल के आसपास झाड़ियां और जंगल जैसा क्षेत्र
शिक्षक दुर्गेश कुमार के मुताबिक विद्यालय के आसपास झाड़ियां और जंगल जैसा क्षेत्र मौजूद है। प्राथमिक विद्यालय की ओर चहारदीवारी भी नहीं है। ऐसे में तेंदुए की मौजूदगी की आशंका के बीच बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
शिक्षक ने बताया कि तेंदुए की दहशत के बीच पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों की निगरानी पर भी विशेष ध्यान देना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने की घेराबंदी और पिंजड़ा लगाने की मांग
ग्रामीणों ने वन विभाग से तेंदुए को पकड़ने के लिए संसाधन बढ़ाने और अभियान तेज करने की मांग की है। ग्रामीणों का सुझाव है कि तेंदुए की संभावित आवाजाही वाले क्षेत्र की पहचान कर वहां घेराबंदी की जाए और एक तरफ से जाल तथा पिंजड़ा लगाकर उसे पकड़ने का प्रयास किया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुए के पकड़े जाने के बाद ही गांव के लोगों और बच्चों में बना डर खत्म होगा। फिलहाल वन विभाग की टीम तेंदुए की तलाश में जुटी हुई है और ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि वन विभाग कब तक तेंदुए को पकड़ने में सफल होता है।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद
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