Barabanki: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली ख़ामेनेई की अमेरिका-इज़राइल संयुक्त एयरस्ट्राइक में शहादत के बाद दुनिया भर में विरोध प्रदर्शन।
बाराबंकी के जैदपुर मोहल्ला पछचरी में भारी संख्या में लोगों ने विरोध प्रदर्शन और शोक सभा में ग़म और गुस्से का किया इज़हार।
मौलाना बिजात हुसैन ने सभा को संबोधित किया। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 03 मार्च 2026
अमेरिका-इजराइल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की शहादत के बाद
दुनिया के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन, शोक सभा और राजनीतिक तनाव देखे जा रहे हैं। इसी क्रम में आज जैदपुर मोहल्ला पछचरी के लोगों ने अपने रहबर का ग़म दिलों मे दबाये हुये नारेबाजी करते हुए चिकना महल छोटा इमामबाड़ा बडी बाजार होते सबीहे कर्बला पहुंचकर आक्रोश जाहिर किया।

विरोध प्रदर्शन और शोक सभा
बाराबंकी के जैदपुर मोहल्ला पछचरी में आज भारी संख्या में लोग इकट्ठा हुए। लोगों ने नारोंबाजी करते हुए अपना आक्रोश और दुःख जताया।
प्रदर्शनकारियों ने चिकना महल, छोटा इमामबाड़ा, और बड़ी बाजार होते हुए सबीहे कर्बला तक मार्च किया। भीड़ में शोक और विरोध दोनों भाव देखने को मिले।
उपस्थित लोगों ने “खामेनेई जिंदाबाद” और “लब्बैक या हुसैन” जैसे नारे लगाए, जिससे विरोध प्रदर्शन का स्वरूप स्पष्ट हुआ।

मौलाना बिजात हुसैन का भावुक संबोधन
सबीहे कर्बला में सभा को संबोधित करते हुए मौलाना बिजात हुसैन ने कहा कि अयातुल्ला खामेनेई किसी एक समुदाय या देश के नेता नहीं थे, बल्कि आलम-ए-इंसानियत के भीरू रहबर थे।
उन्होंने कहा कि अमेरिका चाह रहा था कि हम मानें और झुकें, लेकिन खामेनेई की नेतृत्वयोग्यता इसे स्वीकार नहीं कर सकती थी। मौलाना ने यह भी कहा कि “शहादत हार नहीं है; शहीद कभी मरता नहीं।”
मौलाना के संबोधन के दौरान भीड़ भावुक होकर रोने लगी और शोक जताया।

राजनीतिक और सामाजिक माहौल तनावपूर्ण
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खामेनेई की मौत ने मध्य पूर्व के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित किया है और बहुत से देशों तथा समुदायों में प्रतिक्रिया चल रही है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर भी विरोध प्रदर्शनों का माहौल उत्पन्न होना कोई असामान्य बात नहीं है।
रिपोर्ट – आसिफ हुसैन













