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Barabanki: करणी सेना के शक्ति प्रदर्शन के बाद “बैकफुट” पर आया पुलिस-प्रशासन, सपा नेता सावन यादव के खिलाफ भी दर्ज की FIR

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Barabanki: फेसबुक पोस्ट विवाद में नया मोड़, 

बाराबंकी में फेसबुक पोस्ट को लेकर सपा नेता सावन यादव और करणी सेना के बीच विवाद बढ़ा। पहले करणी सेना के पदाधिकारियों पर FIR, अब शक्ति प्रदर्शन के बाद सावन यादव पर भी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज। जानिए पूरा मामला।

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बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 12 फरवरी 2026

बाराबंकी जिले में फेसबुक पोस्ट को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक और संगठनात्मक टकराव के बदल गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के दिव्यांग ब्लॉक उपाध्यक्ष सावन यादव और करणी सेना के पदाधिकारियों के बीच चल रहे विवाद में नया मोड़ तब आया जब 12 फरवरी 2026 को रामसनेहीघाट कोतवाली में करणी सेना के शक्ति प्रदर्शन के बाद पुलिस बैकफुट पर नजर आई और सपा नेता सावन यादव के खिलाफ भी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया।

इससे पहले 9 फरवरी 2026 को पुलिस ने सावन यादव की तहरीर पर करणी सेना के महामंत्री अभिनव सिंह समेत अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ अपहरण, मारपीट और धमकी जैसे आरोपों में मामला दर्ज किया था।

 

31 जनवरी 2026: श्रद्धांजलि कार्यक्रम से शुरुआत

31 जनवरी 2026 को पूर्व राज्य मंत्री स्वर्गीय राजा राजीव कुमार सिंह की चौथी पुण्यतिथि पर दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र के हड़ाहा स्टेट में एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में सपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे।

कार्यक्रम के दौरान करणी सेना के महामंत्री अभिनव सिंह भी मंच पर मौजूद थे। कार्यक्रम की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसमें अभिनव सिंह शिवपाल सिंह यादव के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद लेते दिखाई दे रहे।

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इसी तस्वीर को सपा नेता सावन यादव ने अपने फेसबुक अकाउंट पर एक कैप्शन के साथ पोस्ट कर दिया। इसके पोस्ट को लेकर विवाद की शुरुआत हुई।

सावन यादव के आरोप

सावन यादव ने आरोप लगाया है कि 2 फरवरी 2026 की सुबह करीब 11 बजे रामसनेहीघाट स्थित एक धर्मकांटा परिसर में उन्हें कुछ लोगों ने घेर लिया। उनके मुताबिक, तीन वाहनों से आए 15–20 लोगों ने उनके साथ मारपीट की और जबरन गाड़ी में बैठाकर ले गए।

उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें बाईपास क्षेत्र में ले जाकर दोबारा मारपीट की गई, जान से मारने की धमकी दी गई और अपमानित किया गया। सावन यादव का दावा है कि इस दौरान घटना का वीडियो भी बनाया गया।

इन आरोपों के आधार पर 9 फरवरी 2026 को पुलिस ने करणी सेना के महामंत्री अभिनव सिंह समेत अन्य नामजद और अज्ञात लोगों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।

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12 फरवरी: करणी सेना का शक्ति प्रदर्शन

करणी सेना ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए 12 फरवरी 2026 को रामसनेही घाट कोतवाली के घेराव की घोषणा की थी। तय कार्यक्रम के अनुसार संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीर प्रताप सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या पदाधिकारी और कार्यकर्ता जोरदार नारेबाजी करते हुए कोतवाली पहुंचे।

करणी सेना का शक्ति प्रदर्शन देख पुलिस प्रशासन के हाथ पैर फूल गए। करणी सेना के पदाधिकारियों से वार्ता के दौरान ही रामसनेहीघाट पुलिस ने आनन-फानन मे सपा नेता सावन यादव के खिलाफ न सिर्फ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया बल्कि करणी सेना के पदाधिकारियों का तो यहां तक कहना है कि पुलिस ने यह भी आश्वासन दिया है कि अभिनव सिंह के खिलाफ दर्ज मुकदमे को जल्द ही स्पंज कर दिया जाएगा।

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करणी सेना का पक्ष

करणी सेना के महामंत्री अभिनव सिंह की ओर से दी गई तहरीर में आरोप लगाया गया है कि संगठन हिंदू रक्षा, गौ रक्षा और राष्ट्रहित से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय है तथा क्षेत्र में जनहित के कार्य करता है। तहरीर के अनुसार, संगठन की बढ़ती लोकप्रियता से कुछ राजनीतिक तत्व असहज हैं।

अभिनव सिंह ने आरोप लगाया है कि सावन यादव पिछले कई महीनों से सोशल मीडिया पर संगठन और उनके खिलाफ भड़काऊ पोस्ट डाल रहे थे, जिससे सामाजिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती थी। तहरीर में यह भी कहा गया है कि संबंधित पोस्ट से साम्प्रदायिक सौहार्द प्रभावित होने की आशंका थी।

अभिनव सिंह के अनुसार, 2 फरवरी 2026 को जब उन्होंने सावन यादव से पोस्ट को लेकर बात की, तो कथित रूप से उन्हें धमकी दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय सावन यादव के साथ कई लोग मौजूद थे और उन्हें जान से मारने की नीयत से घेर लिया गया। किसी तरह वह वहां से निकलकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचे।

तहरीर में यह भी उल्लेख किया गया है कि घटना की सूचना तत्काल देने का प्रयास किया गया, लेकिन परिस्थितियों के कारण उसी दिन थाने नहीं पहुंच सके।

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पुलिस का पक्ष

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी भी पक्ष के साथ पक्षपात नहीं किया जाएगा।

 

राजनीतिक और सामाजिक असर

यह मामला अब केवल व्यक्तिगत विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक और संगठनात्मक प्रतिष्ठा से भी जुड़ गया है। सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ यह विवाद जिले की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियां कई बार बड़े टकराव का कारण बन जाती हैं, इसलिए सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

रिपोर्ट – मंसूफ अहमद 

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Author: Kamran Alvi

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