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Barabanki: आर्थिक तंगी ने मातम में बदली त्योहार की खुशियां, नए कपड़े न मिलने से आहत किशोर ने फांसी लगाकर दी जान, परिवार में कोहराम

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Barabanki: घुंघटेर थाना क्षेत्र के ऊधापुर गांव में आर्थिक तंगी के चलते एक परिवार की खुशियां मातम में बदल गई।

होली पर नए कपड़े न मिलने से आहत परिवार के 14 वर्षीय किशोर ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।

पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी है। पढ़ें पूरी खबर।

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बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 05 मार्च 2026

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जनपद के घुंघटेर थाना क्षेत्र अंतर्गत ऊधापुर गांव में होली के दिन एक दुखद घटना सामने आई। यहां आर्थिक तंगी के चलते त्योहार की खुशियां मातम में बदल गई।

बताया जा रहा है कि आर्थिक तंगी के चलते एक पिता होली पर अपने बेटे को नए कपड़े नहीं दिला सका, जिससे आहत होकर 14 वर्षीय किशोर ने आत्मघाती कदम उठा लिया। घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर है।

सुबह घर से निकला, देर रात बाग में मिला शव

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ऊधापुर निवासी राजेश कुमार रावत गांव में बने घर में पत्नी व दो बेटों 14 वर्षीय श्यामू व 9 वर्षीय अक्षय कुमार के साथ रहते हैं। राजेश कुमार मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं।

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बताया जा रहा है कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह इस बार होली पर बच्चों के लिए नए कपड़े नहीं खरीद पाए। इसे लेकर घर में कुछ कहासुनी भी हुई थी।

परिजनों के मुताबिक, बुधवार की सुबह राजेश का बड़ा बेटा श्यामू रावत (14 वर्ष) पिता के पास रखे 2000 रुपये और मोबाइल लेकर घर से चला गया। परिवार को लगा कि वह होली खेलने गया है।

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दोपहर बाद भी जब वह वापस नहीं लौटा तो परिजनों ने तलाश शुरू की। देर रात गांव के प्राथमिक विद्यालय के पीछे आम के बाग में एक पेड़ से उसका शव लटका मिला।

पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के भेजा

परिजनों ने रात के ही इसकी सूचना पुलिस को दी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

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चौकी प्रभारी वीरेंद्र कुमार ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला फांसी लगाने का प्रतीत हो रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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फाइल फ़ोटो: मृतक श्यामू रावत
आर्थिक तंगी और मानसिक दबाव बना चिंता का विषय

ग्रामीण इलाकों में आर्थिक तंगी और पारिवारिक दबाव कई बार बच्चों और किशोरों पर गहरा मानसिक प्रभाव डालते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में संवाद, समझ और भावनात्मक सहयोग बेहद जरूरी है।

प्रशासन और समाज के जिम्मेदार लोगों का कहना है कि त्योहार खुशियों का प्रतीक हैं, ऐसे में परिवारों को बच्चों के साथ संवेदनशील व्यवहार अपनाना चाहिए और किसी भी मानसिक तनाव की स्थिति में तुरंत परामर्श लेना चाहिए।

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(यदि आपके आसपास कोई बच्चा या किशोर मानसिक तनाव में दिखे, तो उसे समझाने और सहयोग देने की कोशिश करें तथा जरूरत पड़ने पर स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं या काउंसलर से संपर्क करें।)

रिपोर्ट – ललित राजवंशी

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Author: Kamran Alvi

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