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Barabanki: लाखों खर्च के बाद भी “सफेद हाथी” बना सामुदायिक शौचालय, खुले में शौच जाने को मजबूर महिलाएं व युवतियां

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बाराबंकी के नगर पंचायत बेलहरा के वार्ड नंबर 5 जल्नान नगर में लाखों रुपये खर्च कर बना सामुदायिक शौचालय 2–3 साल बाद भी बंद पड़ा है। भुगतान न होने और प्रशासनिक लापरवाही से वार्डवासी खुले में शौच को मजबूर।

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बाराबंकी, उत्तर प्रदेश।

सरकार द्वारा स्वच्छता अभियान के तहत लाखों रुपए खर्च कर बनाए गए सामुदायिक शौचालय कई जगहों पर लोगों के काम नहीं आ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला बाराबंकी जनपद की नगर पंचायत बेलहरा से सामने आया है, जहां वार्ड नंबर 5 जल्नान नगर में करीब दो से तीन साल पहले बना सामुदायिक शौचालय आज तक चालू नहीं हो सका है। हालात यह है कि शौचालय पर हमेशा ताला लटका रहता है और यह वार्डवासियों के लिए केवल “सफेद हाथी” बनकर रह गया है।

स्थानीय निवासी प्रदीप कश्यप, रिंकू शर्मा, अजय शर्मा और संजय कश्यप ने बताया कि शौचालय का निर्माण कार्य वर्षों पहले पूरा हो चुका है, इसके बावजूद आज तक इसे आम जनता के उपयोग के लिए नहीं खोला गया। शौचालय बंद होने के कारण वार्ड के पुरुषों और महिलाओं को खुले में शौच के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे न केवल स्वच्छता अभियान की पोल खुल रही है बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

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वार्डवासियों का कहना है कि कई बार नगर पंचायत प्रशासन से शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। लोगों ने मांग की है कि सामुदायिक शौचालय को तत्काल चालू कराया जाए, ताकि उन्हें इस गंभीर समस्या से राहत मिल सके।

 

भुगतान न होने से अटका संचालन

इस जनसमस्या को लेकर जब हमारे सहयोगी नीरज निगम ने शौचालय का निर्माण कराने वाले ठेकेदार से संपर्क किया, तो ठेकेदार ने बताया कि निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद उसका भुगतान नहीं किया गया है, इसी कारण शौचालय का संचालन शुरू नहीं हो सका।

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ईओ ने दिया जांच का आश्वासन

वही, इस संबंध में जब नगर पंचायत बेलहरा के अधिशासी अधिकारी (ईओ) राजेश चौधरी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि शौचालय का निर्माण पूर्ण होने के बाद भी उसका उपयोग नहीं हो रहा है, तो पूरे प्रकरण की जांच कराकर जल्द से जल्द सामुदायिक शौचालय को चालू कराया जाएगा।

फिलहाल सवाल यह है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत करोड़ो रुपए खर्च होने के बावजूद जब ऐसी बुनियादी सुविधाएं आम जनता तक नहीं पहुंच पा रही है, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

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रिपोर्ट – नीरज निगम

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Author: Kamran Alvi

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