Barabanki News: बाराबंकी के रोटीगांव में किसान मुलायम यादव ने गुप्ता बीज भंडार पर खराब धान का बीज बेचने का आरोप लगाया। चार महीने बाद भी बालियां नहीं आने से 35 हजार रुपये के नुकसान का दावा। कृषि विभाग ने जांच के बाद कार्रवाई की बात कही।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 12 अक्टूबर 2026
बाराबंकी जिले में धान के बीज की गुणवत्ता को लेकर किसानों की शिकायतें सामने आ रही हैं। ताजा मामला जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के रोटीगांव का है, जहां एक किसान ने बिंदौरा चौराहे स्थित गुप्ता बीज भंडार पर खराब धान का बीज बेचने का आरोप लगाया है। किसान का दावा है कि बीज की बुवाई के करीब चार महीने बाद भी फसल में बालियां नहीं आईं, जिससे उसे लगभग 35 हजार रुपये का नुकसान हुआ है। किसान ने सहायक विकास अधिकारी (कृषि) से शिकायत कर खेत का निरीक्षण कराने, मामले की जांच और नुकसान की भरपाई की मांग की है।
इससे पहले मसौली क्षेत्र के इन्धौलिया गांव के एक अन्य किसान ने भी धान की फसल में दाने नहीं आने और बड़े पैमाने पर फसल खराब होने की शिकायत की थी। लगातार सामने आ रही इन शिकायतों ने धान के बीज की गुणवत्ता और कृषि विभाग की निगरानी को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
रोटीगांव के किसान ने गुप्ता बीज भंडार पर लगाया खराब बीज देने का आरोप
जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के रोटीगांव निवासी मुलायम यादव पुत्र जंग बहादुर ने अपने शिकायती पत्र में बताया कि उन्होंने करीब चार महीने पहले बिंदौरा चौराहे स्थित गुप्ता बीज भंडार से तीन किलो धान का बीज खरीदा था। किसान के मुताबिक, इसी बीज से उन्होंने अपने खेत में धान की बुवाई की थी।
मुलायम यादव का कहना है कि बुवाई के बाद उन्होंने फसल की देखभाल में कोई कमी नहीं छोड़ी। खेत में समय से खाद-पानी देने सहित जरूरी कृषि कार्य किए, लेकिन चार महीने बीतने के बाद भी धान की फसल में बालियां नहीं आईं।
चार महीने बाद भी नहीं आईं बालियां, 35 हजार रुपये के नुकसान का दावा
किसान का आरोप है कि फसल में बालियां नहीं आने के कारण उसे भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने नुकसान की राशि लगभग 35 हजार रुपये बताई है।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, उन्होंने इस संबंध में कई बार दुकानदार से संपर्क किया, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों से शिकायत कर मामले की जांच कराने की मांग की।

कृषि विभाग से खेत का निरीक्षण और कार्रवाई की मांग
मुलायम यादव ने सहायक विकास अधिकारी (कृषि) से मांग की है कि उनके खेत का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए और इस्तेमाल किए गए बीज की गुणवत्ता की जांच की जाए। किसान ने शिकायत में गुप्ता बीज भंडार के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने और नुकसान की भरपाई दिलाने की मांग भी उठाई है।
इस संबंध में नोडल अधिकारी डॉ. दलबीर सिंह ने बताया कि जांच के उपरांत कार्रवाई की जाएगी।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कृषि विभाग की जांच में बीज की गुणवत्ता को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं और किसान के नुकसान का आकलन किस प्रकार किया जाता है।
मसौली के इन्धौलिया गांव में भी किसान ने की थी शिकायत
धान की फसल में दाने नहीं आने की शिकायत का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले बाराबंकी जिले के मसौली विकासखंड के इन्धौलिया गांव निवासी किसान अवधेश कुमार वर्मा पुत्र रामप्रताप वर्मा ने भी कृषि विभाग से शिकायत की थी।
अवधेश कुमार वर्मा के मुताबिक, उन्होंने सफदरगंज-बांसा रोड पर मुश्किनगर रेलवे क्रॉसिंग के पास स्थित एक दुकान से बायोसीड कंपनी के ‘गजराज मोटा धान’ किस्म का करीब चार किलो बीज खरीदा था। किसान ने इस बीज को अपने लगभग चार बीघा खेत में बोया था।

फसल में दाने नहीं आने और करीब 50 प्रतिशत नुकसान का दावा
किसान का आरोप था कि उन्होंने समय पर धान की बुवाई की और फसल में खाद-पानी देने के साथ दवाओं का छिड़काव भी किया। इसके बावजूद फसल तैयार होने के समय पौधों में धान के दाने नहीं आए।
अवधेश कुमार वर्मा ने दावा किया था कि उनके लगभग चार बीघा खेत में बोई गई धान की फसल का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा खराब हो गया। उन्होंने भी कृषि विभाग से जांच कराने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की थी।
दोनों शिकायतों में किसानों ने फसल की खराब स्थिति और आर्थिक नुकसान की बात कही है। हालांकि, इन मामलों के बीच किसी समान कारण या बीज की गुणवत्ता में गड़बड़ी की पुष्टि अभी जांच के बिना नहीं की जा सकती।
बीज की गुणवत्ता की जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग
धान की फसल किसानों की आय का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में यदि बीज की गुणवत्ता या किसी अन्य कारण से फसल प्रभावित होती है, तो किसान को आर्थिक नुकसान के साथ अगली खेती की तैयारी में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
बाराबंकी में सामने आई इन शिकायतों के बाद किसानों की मांग है कि कृषि विभाग खेतों का निरीक्षण करे, बीज की गुणवत्ता की जांच कराए और तथ्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय करे। यदि जांच में बीज की गुणवत्ता में गड़बड़ी या नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद
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