बाराबंकी की गदिया ग्राम पंचायत स्थित साईं गार्डेन कॉलोनी में बारिश के बाद एक सप्ताह से अधिक समय से जलभराव। जल निकासी न होने से घरों में रहने वाले लोग परेशान, अवैध प्लाटिंग पर सवाल।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 03 अक्टूबर 2026
बाराबंकी में नियम-कायदों को दरकिनार कर विकसित की जा रही अवैध प्लाटिंग अब पाई-पाई जोड़कर अपना आशियाना बनाने वाले लोगों के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है। इसका ताजा उदाहरण नवाबगंज तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत गदिया में लखनऊ रोड स्थित साईं गार्डेन कॉलोनी में देखने को मिल रहा है।
बताया जा रहा है कि मेयो हॉस्पिटल के बगल में विकसित की गई इस कॉलोनी में कथित तौर पर जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था किए बिना ही दर्जनों लोगों को प्लॉट बेच दिए गए। लोगों ने अपनी जमा पूंजी लगाकर यहां घर बनवाए और रहना शुरू कर दिया, लेकिन बारिश ने कॉलोनी की बदहाल व्यवस्था की पोल खोल दी।
बीते दिनों हुई बारिश के बाद पूरी कॉलोनी में पानी भर गया है। हालत यह है कि एक सप्ताह से अधिक समय से कॉलोनी की सड़कों पर बारिश का पानी जमा है और कई स्थानों पर सड़कें तालाब जैसी नजर आ रही हैं। जलभराव के कारण स्थानीय लोगों को घरों से निकलने और आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
प्लॉट खरीदा, घर बनाया और अब पानी में फंसा आशियाना
साईं गार्डेन कॉलोनी में रहने वाले लोगों ने आरोप लगाया कि प्लॉट खरीदते समय उन्हें ऐसी समस्या की जानकारी नहीं दी गई थी। लोगों ने अपनी मेहनत की कमाई लगाकर प्लॉट खरीदे और उसके बाद मकान बनाकर रहने लगे।
लेकिन कॉलोनी में समुचित जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश के बाद स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई।
स्थानीय लोगों के मुताबिक बारिश का पानी निकलने का पर्याप्त रास्ता नहीं है। इसके चलते पानी कॉलोनी की गलियों और सड़कों पर जमा है।

एक सप्ताह से ज्यादा समय से सड़क पर जमा पानी
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जलभराव कोई कुछ घंटों की समस्या नहीं है। एक सप्ताह से अधिक समय बीतने के बाद भी कॉलोनी की सड़कों से पानी नहीं निकल सका है।
जलभराव के कारण पैदल चलना मुश्किल हो गया है। दोपहिया वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। घरों में रहने वाले परिवारों को रोजमर्रा के काम के लिए पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है।

ग्राम प्रधान से शिकायत, फिर भी नहीं निकला समाधान
कॉलोनी के लोगों का कहना है कि उन्होंने जलभराव और जल निकासी की समस्या को लेकर ग्राम प्रधान से कई बार शिकायत की, लेकिन अभी तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
लोगों का सवाल है कि यदि कॉलोनी में पहले से जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं थी तो यहां प्लाटिंग और निर्माण की अनुमति कैसे मिली? और यदि किसी अनुमति की आवश्यकता थी तो संबंधित विभागों ने इसकी जांच क्यों नहीं की?
अवैध प्लाटिंग पर जिम्मेदार विभागों की निगरानी पर सवाल
साईं गार्डेन कॉलोनी का मामला सामने आने के बाद बाराबंकी शहर और आसपास के इलाकों में तेजी से विकसित हो रही कॉलोनियों की निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
आरोप है कि शहर के आसपास कई स्थानों पर बिना पर्याप्त बुनियादी सुविधाओं के प्लाटिंग की जा रही है। इनमें कई जगह जल निकासी, सीवर, सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं की समुचित व्यवस्था नहीं होने के बावजूद प्लॉट बेचे जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
मेहनत की कमाई लगाकर प्लॉट खरीदने वालों पर पड़ता है असर
अवैध या अनियोजित प्लाटिंग का सबसे बड़ा असर उन आम लोगों पर पड़ता है जो अपनी वर्षों की बचत लगाकर जमीन खरीदते हैं और वहां घर बनाकर परिवार के साथ रहने का सपना देखते हैं।
प्लॉट खरीदते समय उन्हें सड़क, नाली, जल निकासी और अन्य सुविधाओं का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन घर बनने के बाद बारिश के मौसम में वास्तविक स्थिति सामने आने पर लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
सवाल यह भी- प्लाटिंग से पहले क्यों नहीं हुई व्यवस्था की जांच?
साईं गार्डेन कॉलोनी के जलभराव ने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं—
- क्या कॉलोनी में प्लाटिंग से पहले जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी?
- क्या संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमति ली गई थी?
- क्या कॉलोनी का लेआउट और सड़क-नाली व्यवस्था मानकों के अनुरूप है?
- बारिश के पानी की निकासी के लिए कोई स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं है?
- यदि शिकायतें पहले से की गई थीं तो समस्या का समाधान क्यों नहीं हुआ?
इन सवालों के जवाब संबंधित विभागों की जांच और रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
अब प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद
स्थानीय लोगों की परेशानी को देखते हुए अब प्रशासन से उम्मीद है कि वह मौके का निरीक्षण कर कॉलोनी की वैधता, प्लाटिंग से संबंधित अनुमतियों और जल निकासी की व्यवस्था की जांच कराएगा।
साथ ही यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई और जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान कराया जाना चाहिए।
क्योंकि सवाल सिर्फ एक कॉलोनी में भरे पानी का नहीं है, बल्कि उन परिवारों का है जिन्होंने अपनी मेहनत की कमाई लगाकर यहां अपना आशियाना बनाया है और अब बारिश के पानी के बीच रहने को मजबूर हैं।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद
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