Barabanki News: बाराबंकी के बड्डूपुर कोतवाली कार्यालय में दो सिपाहियों की मारपीट का CCTV वीडियो वायरल होने से मचा हडकंप।
कथित अवैध वसूली की रकम के बंटवारे को लेकर विवाद का आरोप, SP ने दोनों को लाइन हाजिर किया।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 13 सितंबर 2026
अपने एक से बढ़कर एक कारनामों को लेकर अक्सर ही सुर्ख़ियों में रहने वाली उत्तर प्रदेश की बाराबंकी पुलिस एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। कोतवाली बड्डूपुर के कार्यालय में दो पुलिसकर्मियों के बीच मारपीट का CCTV फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि यह घटना 22 अगस्त 2026 को हुई थी, लेकिन करीब तीन सप्ताह तक थाना प्रभारी इसे दबाएं रहे और मामला सामने नहीं आया।
घटना को लेकर आरोप है कि दोनों सिपाहियों के बीच अवैध वसूली की रकम के कथित बंटवारे को लेकर विवाद हुआ और देखते ही देखते विवाद मारपीट में बदल गया। मामला सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय ने दोनों सिपाहियों को लाइन हाजिर कर दिया है।
हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल सिर्फ दो सिपाहियों के बीच हुई मारपीट का नहीं, बल्कि पुलिस कोतवाली के CCTV फुटेज के सोशल मीडिया तक पहुंचने और घटना के करीब तीन सप्ताह तक दबे रहने को लेकर भी उठ रहा है।
कोतवाली कार्यालय में 22 अगस्त को हुई थी मारपीट
जानकारी के अनुसार, कोतवाली बड्डूपुर में तैनात सिपाही हरि बाबू और अमरीश वर्मा के बीच 22 अगस्त 2026 को कोतवाली कार्यालय में ही विवाद हो गया था।
बताया जा रहा है कि विवाद का कारण अवैध वसूली की कथित रकम के बंटवारे को लेकर हुआ विवाद था। इसी दौरान दोनों के बीच कहासुनी बढ़ गई और मामला हाथापाई तक पहुंच गया।
कोतवाली कार्यालय में लगे CCTV कैमरे में पूरी घटना रिकॉर्ड हो गई। इस घटना ने पुलिस थाने के भीतर पुलिसकर्मियों के आचरण और आपसी विवाद को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कार्यालय में काम कर रहा था एक सिपाही, तभी शुरू हुई मारपीट
वायरल CCTV फुटेज में दिखाई दे रहा है कि एक सिपाही कोतवाली कार्यालय में बैठकर अपना काम कर रहा है। इसी दौरान दूसरा सिपाही कार्यालय में पहुंचता है।
फुटेज के अनुसार, वहां पहुंचने के बाद दोनों के बीच विवाद होता दिखाई देता है और देखते ही देखते एक सिपाही दूसरे को जमीन पर गिराकर मारपीट करने लगता है। कुछ देर तक दोनों के बीच हाथापाई जारी रहती है।
इस दौरान कार्यालय में मौजूद अन्य पुलिसकर्मी भी बीच-बचाव करते नजर आते हैं। अचानक हुई मारपीट के चलते कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बन जाता है।
करीब तीन सप्ताह तक सामने नहीं आया मामला
इस घटना को लेकर सबसे गंभीर सवाल यह है कि 22 अगस्त को हुई मारपीट का मामला करीब तीन सप्ताह तक सार्वजनिक रूप से सामने क्यों नहीं आया।
आरोप है कि घटना की जानकारी पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक होने के बावजूद मामले को तत्काल सार्वजनिक नहीं किया गया। खबर सामने आने के बाद अब यह भी सवाल उठ रहा है कि घटना के बाद विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई की गई थी और यदि कार्रवाई हुई थी तो उसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं हुई।
हालांकि, इस संबंध में संबंधित पुलिस अधिकारियों का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
CCTV फुटेज मोबाइल से रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर किया गया वायरल
मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब कोतवाली कार्यालय में लगे CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
बताया जा रहा है कि कोतवाली में तैनात किसी सिपाही या दारोगा ने CCTV स्क्रीन पर चल रही घटना की रिकॉर्डिंग अपने मोबाइल फोन से की और बाद में उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
CCTV फुटेज के वायरल होने के बाद ही मामला चर्चा में आया और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने इसका संज्ञान लिया।
फुटेज बाहर कैसे पहुंचा, यह भी बड़ा सवाल
पुलिस थानों और कोतवाली परिसरों में लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग में कई बार संवेदनशील गतिविधियां दर्ज होती हैं। ऐसे में सवाल यह है कि इस घटना की रिकॉर्डिंग किसने निकाली, किसने मोबाइल से रिकॉर्ड की और इसे सोशल मीडिया तक पहुंचाने की अनुमति या पहुंच किस स्तर पर थी।
यह भी जांच का विषय हो सकता है कि CCTV सिस्टम तक किन पुलिसकर्मियों की पहुंच थी और घटना के बाद रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई।
SP अर्पित विजयवर्गीय ने दोनों सिपाहियों को किया लाइन हाजिर
CCTV फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय ने मामले का संज्ञान लिया।
इसके बाद दोनों सिपाहियों को लाइन हाजिर कर दिया गया। विभागीय स्तर पर मामले को लेकर आगे की कार्रवाई और जांच की स्थिति पर पुलिस की ओर से विस्तृत जानकारी का इंतजार है।
बताया जा रहा है कि दोनों सिपाहियों में से एक की तैनाती बड्डूपुर कोतवाली में थी, जबकि दूसरा वर्तमान में कुर्सी थाने में तैनात था।
कोतवाली प्रभारी की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
मामले में कोतवाली प्रभारी मनोज कुमार सोनकर की भूमिका और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
मुख्य सवाल यह है कि यदि कोतवाली कार्यालय के अंदर पुलिसकर्मियों के बीच इतनी गंभीर मारपीट हुई थी तो इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल क्यों नहीं दी गई? घटना के बाद विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई हुई? और यदि CCTV में पूरी घटना रिकॉर्ड थी तो इसकी जानकारी सामने आने में करीब तीन सप्ताह क्यों लग गए?
इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
कथित अवैध वसूली की रकम का विवाद कितना सच?
इस पूरे मामले में अवैध वसूली की रकम के बंटवारे को विवाद की वजह बताए जाने का दावा भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। यह स्पष्ट नहीं है कि पुलिस की विभागीय जांच में अवैध वसूली से जुड़े आरोपों की पुष्टि हुई है या नहीं।
यदि जांच में इस तरह के आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल पुलिसकर्मियों के बीच मारपीट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पुलिसकर्मियों के कथित भ्रष्ट आचरण से जुड़ा गंभीर विषय भी बन सकता है।
रिपोर्ट – ललित राजवंशी











