Barabanki News: बाराबंकी के सुबेहा थाने में चल रही पंचायत के बीच 16 साल की नाबालिग को हुआ दर्द, थाने में ही नवजात का जन्म।
पुलिस पर POCSO आरोपी से 40 हजार दिलवाकर सुलह कराने का गंभीर आरोप। पढ़ें पूरी खबर।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 07 सितंबर 2026
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की कार्यशैली से लेकर बाल विवाह और नाबालिगों की सुरक्षा तक कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुबेहा थाना क्षेत्र में एक 16 वर्षीय किशोरी के शादी के करीब दो महीने बाद ही सात माह की गर्भवती पाए जाने पर विवाद हो गया। मामला थाने पहुंचा तो पुलिस ने कथित तौर पर पंचायत और समझौते की कोशिश शुरू कर दी। इसी दौरान किशोरी को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई और देखते ही देखते थाने में ही नवजात की किलकारी गूंज उठी।
घटना के बाद किशोरी की हालत गंभीर होने के चलते उसे स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जिला महिला अस्पताल रेफर किया गया है।
शादी के दो महीने बाद तबीयत बिगड़ने पर हुआ खुलासा
बाराबंकी जिले के सुबेहा थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने बाल विवाह निषेध कानून का उल्लंघन करते हुए 20 जून 2026 को अपनी 16 साल की नाबालिग पुत्री का विवाह कोठी थाना क्षेत्र के एक युवक से कर दिया। शादी के महज दो महीने बाद ही किशोरी की तबीयत ख़राब हुई, जांच में 7 माह की गर्भवती होने की जानकारी सामने आते ही ससुराल में हड़कंप मच गया।
किशोरी का चौंकाने वाला खुलासा
परिजनों द्वारा पूछताछ करने पर किशोरी ने बताया कि गांव के ही एक शख्स के रिश्तेदार से उसका पिछले दो साल से प्रेम-प्रसंग चल रहा था और उसके पेट में उसी युवक का बच्चा पल रहा है।
इस खुलासे के बाद किशोरी के पति ने डिलीवरी का खर्च उठाने से इनकार कर दिया, उसका कहना था कि यदि बच्चा प्रेमी का है, तो प्रसव का खर्च भी प्रेमी को उठाना चाहिए।
पिता की तहरीर पर हरकत में आई पुलिस
इस मामले का खुलासा होने के बाद किशोरी के पिता ने सुबेहा थाने में तहरीर देकर गुजरात के अहमदाबाद में रह रहे पूर्व प्रेमी के खिलाफ नाबालिग को बहला-फुसलाकर दुष्कर्म करने और गर्भवती करने का आरोप लगाया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी युवक के पिता को थाने में बैठा लिया। दबाव बनते ही युवक अहमदाबाद से सुबेहा थाने पहुंच गया।
बताया जा रहा है कि आरोपी के परिवार वालों ने थाने के कुछ दलालों के माध्यम से मामले को मैनेज करने और सुलह कराने के प्रयास शुरू कर दिए।
पुलिस का यू-टर्न: POCSO के गंभीर आरोपों के बावजूद सुलह
बताया जा रहा है कि सौदा पटते ही POCSO और दुष्कर्म जैसे गंभीर मामलों के बावजूद पुलिस ने यू-टर्न मारते हुए आरोपी का पक्ष लेना शुरू कर दिया। किशोरी के पिता और पति को बाल विवाह कानून के तहत जेल भेजने का भय दिखाकर दोनों पक्षों को सुलह के लिए राजी कर लिया गया।
थाने में पंचायत और 40 हजार का समझौता
सुबेहा थाने में हुई पंचायत में पुलिस ने POCSO एक्ट और दुष्कर्म के आरोपी से डिलीवरी में आने वाले खर्च के तौर पर 40 हजार रुपये दिलवाए और दोनों पक्षों के बीच सुलह समझौता करा दिया। कानून के अनुसार ऐसे गंभीर अपराधों में समझौते की कोई गुंजाइश नहीं होती, लेकिन पुलिस ने मामले को रफा-दफा कर दिया।
थाने में ही नवजात का जन्म
पंचायत के दौरान ही किशोरी को लेबर पेन शुरू हो गया और वह दर्द से चिल्लाने लगी। पुलिस ने 102 एंबुलेंस बुलाई, लेकिन एंबुलेंस के आने से पहले ही थाने में डिलीवरी हो गई और नवजात की किलकारियां गूंजने लगीं।
इसके बाद परिजन किशोरी को स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे जिला महिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।
जनता में आक्रोश: पुलिस की भूमिका पर सवाल
लोग क्यों खड़े कर रहे सवाल?
इस घटना के बाद काफी देर तक सुबेहा थाने में लोगों की भीड़ जमा रही और तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। स्थानीय लोग पुलिस की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिस आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म, जान से मारने की धमकी और POCSO एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजना चाहिए था, उससे महज 40 हजार रुपये डिलीवरी खर्च के तौर पर दिलवाकर मामला रफा-दफा क्यों किया गया?
बच्चे के भविष्य का क्या होगा?
किशोरी के पिता और पति को बाल विवाह कानून का भय दिखाकर पुलिस ने भले ही वक़्ती तौर पर मामला रफा-दफा कर दिया हो, लेकिन भविष्य में यदि किशोरी के पति ने किसी और के बच्चे को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, तो उस बच्चे का भविष्य क्या होगा? यह सवाल हर किसी के मन में है।
एक ओर नाबालिग किशोरी की सुरक्षा और उसके अधिकारों का सवाल है, तो दूसरी ओर नवजात के संरक्षण और भविष्य की चिंता भी सामने है।
POCSO एक्ट में समझौते की कोई गुंजाइश नहीं
सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट के फैसलों के मुताबिक, POCSO एक्ट के तहत दर्ज मामलों में समझौते या सुलह की कोई गुंजाइश नहीं होती। ऐसे मामलों में आरोपी को जेल भेजना और कानूनी कार्रवाई करना अनिवार्य है।
बाल विवाह निषेध कानून का उल्लंघन
18 साल से कम उम्र की लड़की की शादी कराना बाल विवाह निषेध कानून के तहत दंडनीय अपराध है। ऐसे में किशोरी के पिता और पति दोनों कानूनी शिकंजे में आ सकते हैं।
उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग
इस मामले में उच्च स्तरीय जांच और पुलिस की लापरवाही की जांच की मांग तेज हो रही है। मानवाधिकार संगठन और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने भी पुलिस के आला अधिकारियों से इस मामले का संज्ञान लेने की अपील की है।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद












