Barabanki News: त्रिलोकपुर गांव के किसान की बेटी महिमा मौर्या ने रचा इतिहास।
UPSSSC परीक्षा पास कर मंडी सचिव श्रेणी-3, ग्रेड-2 का पद हासिल किया। मुख्यमंत्री ने नियुक्ति पत्र सौंपा।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 27 अगस्त 2026
“हौसले बुलंद हों तो मंजिलें भी मिल ही जाती हैं, हवा की मौजों से नहीं, चट्टानों से राह बन जाती है।” इन पंक्तियों को बाराबंकी के त्रिलोकपुर गांव की बेटी महिमा मौर्या ने अपनी मेहनत और संघर्ष से सच कर दिखाया है। किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली महिमा ने UPSSC की परीक्षा में सफलता हासिल कर मंडी सचिव श्रेणी-3, ग्रेड-2 का पद हासिल किया है।
महिमा की इस उपलब्धि ने न सिर्फ उनके माता-पिता का सपना पूरा किया, बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम भी रोशन किया है। खास बात यह है कि ग्राम पंचायत त्रिलोकपुर की वह पहली बेटी हैं, जिन्हें मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र प्राप्त हुआ है।
पंचायत सहायक से मंडी सचिव तक पहुंचा महिमा का सफर
महिमा मौर्या की सफलता किसी एक परीक्षा या एक दिन की मेहनत का परिणाम नहीं है। इसके पीछे वर्षों का संघर्ष, लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और असफलताओं के बावजूद आगे बढ़ते रहने का जज्बा है।
वर्ष 2021 में महिमा ने पंचायत सहायक के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने लेखपाल पद की परीक्षा में भी सफलता हासिल की। अब अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने मंडी सचिव श्रेणी-3, ग्रेड-2 के पद पर चयन हासिल किया है।
उनकी तैनाती राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद मुख्यालय के लेखानुभाग में हुई है।
एक ग्रामीण बेटी का पंचायत स्तर की नौकरी से आगे बढ़ते हुए मंडी सचिव जैसे पद तक पहुंचना इलाके की बेटियों के लिए भी मिसाल माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री के हाथों मिला नियुक्ति पत्र, खुशी से भर उठा परिवार
महिमा मौर्या को मुख्यमंत्री द्वारा नियुक्ति पत्र प्रदान किया गया। नियुक्ति पत्र हाथ में आते ही महिमा के चेहरे पर खुशी और भावुकता साफ नजर आई।
जिस सपने को लेकर उन्होंने वर्षों तक मेहनत की, वह सपना अब हकीकत बन चुका था। इस उपलब्धि के साथ उनके परिवार और गांव में खुशी का माहौल है।
परिजनों और ग्रामीणों ने महिमा को उनकी सफलता पर बधाई देते हुए इसे पूरे त्रिलोकपुर के लिए गौरव का क्षण बताया।
माता-पिता, बाबा और गुरु को दिया सफलता का श्रेय
महिमा मौर्या अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, बाबा और अपने प्रेरणास्रोत कमलेश कुमार “ज्ञानी” सर को देती हैं।
महिमा के अनुसार, परिवार और गुरु के मार्गदर्शन ने उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा दी। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान उन्होंने लगातार मेहनत जारी रखी और एक के बाद एक सफलता हासिल करती गईं।
मंडी सचिव के पद पर चयन उनके इसी संघर्ष और निरंतर प्रयास का परिणाम है।
पिता ने खेती की कमाई का बड़ा हिस्सा बेटियों की पढ़ाई पर लगाया
महिमा के पिता राजपाल मौर्या पेशे से किसान हैं। उन्होंने बताया कि अपनी खेती से होने वाली कमाई का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा उन्होंने बेटियों की पढ़ाई पर खर्च किया।
उनका मानना है कि “बेटियों को पढ़ाना ही सबसे बड़ी पूंजी है।”
आज बेटी महिमा ने पिता के इसी विश्वास और त्याग को सफलता में बदलकर दिखाया है।
एक किसान पिता द्वारा अपनी सीमित आय का बड़ा हिस्सा बेटियों की शिक्षा पर खर्च करना और बेटी का मेहनत के दम पर सरकारी सेवा में आगे बढ़ना ग्रामीण समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।
ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों के लिए बनीं मिसाल
महिमा मौर्या की कहानी केवल उनके परिवार की सफलता की कहानी नहीं है। यह उन तमाम ग्रामीण बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखती हैं।
पंचायत सहायक से लेखपाल और अब मंडी सचिव तक का सफर यह बताता है कि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रहे तो परिस्थितियां मंजिल की राह नहीं रोक सकतीं।
त्रिलोकपुर की बेटी महिमा ने अपनी सफलता से यह साबित कर दिया कि किसान की बेटी भी मेहनत और प्रतिभा के दम पर प्रशासनिक एवं सरकारी सेवाओं में ऊंचा मुकाम हासिल कर सकती है।
रिपोर्ट – नूर मोहम्मद













