Barabanki News: बाराबंकी के CHC घुंघटेर में नवजात बदलने का आरोप लगा है।
परिजनों का दावा है कि पहले बेटे के जन्म की जानकारी दी गई, बाद में लड़की सौंप दी गई। जांच की मांग।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 14 अगस्त 2026
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) घुंघटेर में नवजात को लेकर गंभीर आरोप सामने आया है। बिजौली गांव निवासी एक परिवार ने स्वास्थ्य केंद्र में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों और आशा बहू पर नवजात बदलने का आरोप लगाया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि प्रसव के बाद पहले उन्हें बेटे के जन्म की जानकारी दी गई, लेकिन कुछ समय बाद अस्पताल के कर्मचारियों ने उन्हें लड़की सौंप दी।
मामले को लेकर पीड़ित पिता राजेश कुमार ने थाने में तहरीर देकर पूरे घटनाक्रम की जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। परिवार ने जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से भी मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
रास्ते में हुआ प्रसव, गंभीर हालत में CHC घुंघटेर पहुंचा परिवार
पीड़ित परिवार के मुताबिक, गुरुवार रात राजेश कुमार की पत्नी को प्रसव पीड़ा हुई और अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में प्रसव हो गया। जच्चा और बच्चा की हालत गंभीर होने पर उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घुंघटेर लाया गया।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद वहां मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों और आशा बहू की ओर से उन्हें बेटा पैदा होने की जानकारी दी गई। बेटे के जन्म की खबर सुनकर परिवार में खुशी का माहौल हो गया।
परिजनों के मुताबिक, परिवार में पहले से छह बेटियां हैं और सातवें बच्चे के रूप में बेटे के जन्म की जानकारी मिलने पर उनकी खुशी और बढ़ गई।
पहले बताया गया बेटा, रात करीब 2 बजे लड़की सौंपने का आरोप
परिजनों का आरोप है कि आशा बहू ने उन्हें लड़का होने की जानकारी दी थी। इसके बाद परिवार के लोगों ने बेटे के जन्म की खुशी में वहां मौजूद कुछ स्टाफ को कथित तौर पर 500-500 रुपये खुशी के तौर पर दिए।
लेकिन परिवार का कहना है कि कुछ समय बाद स्थिति अचानक बदल गई। रात करीब 2 बजे अस्पताल के स्टाफ ने परिजनों को लड़की सौंप दी।
परिजनों का आरोप है कि पहले बेटे के जन्म की जानकारी देने और बाद में लड़की सौंपे जाने को लेकर जब उन्होंने सवाल उठाए तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
CHC प्रभारी और ड्यूटी स्टाफ की भूमिका पर भी सवाल
पीड़ित परिवार ने CHC घुंघटेर में तैनात जिम्मेदार अधिकारियों, डॉक्टरों, स्टाफ नर्स और आशा बहू की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। परिवार का आरोप है कि यह पूरा घटनाक्रम स्वास्थ्य केंद्र में तैनात कर्मचारियों की निगरानी में हुआ।

सूचना पर पहुंची 112 पुलिस, मामला शांत कराया
मामले की जानकारी मिलने के बाद 112 पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को शांत कराया। इसके बाद पीड़ित परिवार की ओर से थाने में तहरीर देकर पूरे मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की गई।
परिवार का कहना है कि नवजात को लेकर हुई इस कथित घटना से उन्हें मानसिक रूप से काफी परेशानी का सामना करना पड़ा है और वे चाहते हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए।
छह बेटियों के बाद बेटे के जन्म की खुशी मातम में बदली
परिजनों के अनुसार, दंपति की पहले से छह बेटियां हैं। सातवें बच्चे के रूप में बेटे के जन्म की जानकारी मिलने के बाद परिवार में खुशी का माहौल था। परिवार के लोगों को उम्मीद थी कि इस बार बेटे का जन्म हुआ है।
लेकिन कुछ देर बाद जब अस्पताल के कर्मचारियों ने उन्हें लड़की सौंप दी तो परिवार के लोगों ने इस पर आपत्ति जताई और पूरे मामले पर सवाल उठाए।
परिजनों का कहना है कि यदि अस्पताल में बच्चे की पहचान या रिकॉर्ड को लेकर कोई गलती हुई है तो उसे भी स्पष्ट किया जाना चाहिए और यदि किसी स्तर पर जानबूझकर लापरवाही या गड़बड़ी की गई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
जिलाधिकारी और CMO से निष्पक्ष जांच की मांग
पीड़ित राजेश कुमार ने जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), बाराबंकी से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने CHC घुंघटेर में तैनात डॉक्टर, स्टाफ नर्स, आशा बहू और अन्य संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है।
परिवार की मांग है कि अस्पताल में प्रसव से संबंधित रिकॉर्ड, नवजात के जन्म से जुड़े दस्तावेज, ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की जानकारी और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जाए, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि बेटे के जन्म की जानकारी परिवार को किस आधार पर दी गई और बाद में लड़की सौंपे जाने की स्थिति कैसे बनी।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
CHC घुंघटेर में सामने आए इस मामले ने स्वास्थ्य केंद्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच होना बाकी है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि यह मामला नवजात बदलने का है, पहचान संबंधी किसी गलती का है या फिर किसी अन्य कारण से यह स्थिति उत्पन्न हुई।
समाचार लिखे जाने तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से आरोपों पर आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। विभागीय जांच या पुलिस जांच के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
रिपोर्ट – ललित राजवंशी













