Barabanki News: बाराबंकी में रसौली रजबहा नहर कटने से 250 बीघे से अधिक धान की फसल जलमग्न हो गई।
किसानों ने सिंचाई विभाग की लापरवाही का आरोप लगाया और मुआवजे की मांग की।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 02 अगस्त 2026
बाराबंकी जिले में सिंचाई विभाग की कथित लापरवाही ने सैकड़ों किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया। शारदा सहायक शाहबपुर शाखा से निकली रसौली रजबहा मिर्जापुर गांव के निकट कट जाने से नहर का पानी खेतों में घुस गया, जिससे करीब 250 बीघे से अधिक धान की फसल जलमग्न हो गई। लगातार बढ़ते जलभराव से दादरा, मिर्जापुर, डमौरा समेत आसपास के कई गांवों के किसानों के सामने भारी संकट खड़ा हो गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि नहर में पहले मामूली कटाव हुआ था, लेकिन सिंचाई विभाग ने समय रहते उसकी मरम्मत नहीं कराई। लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि धीरे-धीरे कटान बढ़ता गया और आखिरकार नहर की पटरी पूरी तरह टूट गई। इसके बाद तेज बहाव सीधे खेतों की ओर मुड़ गया और देखते ही देखते हरे-भरे धान के खेत पानी में डूब गए।
समय पर मरम्मत होती तो नहीं होती इतनी बड़ी तबाही
स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि शुरुआती कटान के समय ही सिंचाई विभाग सक्रिय हो जाता और मरम्मत करा दी जाती, तो सैकड़ों बीघे फसल को बर्बाद होने से बचाया जा सकता था। ग्रामीणों ने अपने स्तर पर कटान रोकने का प्रयास भी किया, लेकिन तेज जलधारा के सामने उनकी कोशिशें नाकाम साबित हुईं।
किसानों का आरोप है कि विभाग की उदासीनता के कारण अब हजारों नहीं बल्कि लाखों रुपये की फसल बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई है।
डीजल से सिंचाई कर तैयार की थी धान की फसल
इस वर्ष सामान्य से कम बारिश होने के कारण किसानों ने महंगा डीजल जलाकर खेतों की सिंचाई की थी। महंगे बीज, खाद, मजदूरी और सिंचाई पर भारी खर्च करने के बाद धान की फसल तैयार हुई थी, लेकिन अब नहर टूटने से पूरी मेहनत पानी में बहती नजर आ रही है।
किसानों का कहना है कि खेती की लागत पहले ही काफी बढ़ चुकी है। ऐसे में फसल बर्बाद होने से उनकी आर्थिक स्थिति और अधिक खराब हो जाएगी।

किसानों ने सुनाई अपनी पीड़ा
किसान राम सिंह ने बताया कि यदि सिंचाई विभाग शुरुआती कटान पर ही कार्रवाई कर देता तो इतनी बड़ी क्षति नहीं होती। उन्होंने कहा कि अब सैकड़ों किसानों की फसल जलमग्न हो चुकी है और नुकसान लगातार बढ़ रहा है।
वहीं किसान शिवकुमार वर्मा ने बताया कि उन्होंने धान की खेती के लिए कर्ज लिया था। अब पूरी फसल पानी में डूब जाने से परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने सरकार से तत्काल सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है।
प्रशासन और सरकार से किसानों की मांग
ग्रामीणों और किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि—
- नहर के कटान की तत्काल मरम्मत कराई जाए।
- खेतों में भरे पानी की निकासी की व्यवस्था की जाए।
- प्रभावित फसलों का शीघ्र सर्वे कराया जाए।
- नुकसान का आकलन कर किसानों को जल्द से जल्द उचित मुआवजा दिया जाए।
- सिंचाई विभाग की लापरवाही की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
बढ़ती चिंता, फसल बचाने की जद्दोजहद
नहर का पानी लगातार खेतों में फैलने से किसान अपनी बची हुई फसल बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जलभराव बढ़ने के कारण हालात बिगड़ते जा रहे हैं। यदि जल्द ही कटान को बंद नहीं किया गया और पानी की निकासी नहीं हुई, तो आसपास के और गांवों की फसल भी प्रभावित होने की आशंका है।
रिपोर्ट – नूर मोहम्मद













