बाराबंकी जिले की एक सीएचसी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया।
वीडियो में एक युवक मरीज का उपचार करता दिखाई दे रहा है।
सीएचसी प्रभारी ने वीडियो को पुराना और भ्रामक बताते हुए कहा कि युवक अस्पताल का कर्मचारी है, डॉक्टर नहीं।
उन्होंने बताया कि मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 04 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) हैदरगढ़ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। करीब 2 मिनट 9 सेकंड के इस वीडियो में एक युवक मरीज का उपचार करता हुआ दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं और सोशल मीडिया पर इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
सोशल मीडिया पर लगाया गया गंभीर आरोप
वायरल वीडियो को एक सोशल मीडिया यूजर ने पोस्ट करते हुए दावा किया कि शशांक बाजपेई नामक एक निजी व्यक्ति, जिसे चिकित्सा क्षेत्र का कोई अधिकृत प्रशिक्षण या अधिकार नहीं है, वह अस्पताल में मरीजों का इलाज कर रहा है।
वीडियो वायरल होते ही स्थानीय लोगों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर चिंता बढ़ गई और अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे।
सीएचसी प्रभारी ने बताया- पुराना और भ्रामक है वीडियो
मामले में सीएचसी प्रभारी डॉ. जयशंकर पांडेय ने वायरल वीडियो को भ्रामक बताया है। उन्होंने कहा कि यह वीडियो करीब तीन से चार माह पुराना है और इसे दोबारा सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है।
डॉ. पांडेय के अनुसार, वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति कोई डॉक्टर नहीं है, बल्कि अस्पताल में कार्यरत एक कर्मचारी है, जिसका कार्य मरीजों की पर्ची बनाना और रजिस्टर में उनकी प्रविष्टि करना है।
“अस्पताल की छवि खराब करने की कोशिश”
सीएचसी प्रभारी का कहना है कि यही वीडियो पहले भी कई बार सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा चुका है। उनके मुताबिक, कुछ लोग अस्पताल की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से पुराने वीडियो को बार-बार वायरल कर रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सीएचसी हैदरगढ़ में मरीजों का उपचार केवल अधिकृत चिकित्सकों द्वारा ही नियमानुसार किया जाता है।
जांच के बाद होगी आगे की कार्रवाई
डॉ. जयशंकर पांडेय ने बताया कि वायरल वीडियो और उससे जुड़े दावों की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में कोई अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल वायरल वीडियो को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है और लोग जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।
जिले के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में प्राइवेट व्यक्तियों की भूमिका पर बहस तेज
वायरल वीडियो के बाद जिले के सरकारी अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्राइवेट व्यक्तियों की भूमिका को लेकर भी बहस तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सकों की कमी या कार्यव्यवस्था की खामियों के कारण कुछ निजी अथवा संविदा कर्मियों द्वारा मरीजों की पर्ची बनाने, दवाएं उपलब्ध कराने, इंजेक्शन लगाने और अन्य स्वास्थ्य संबंधी कार्य किए जाने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं।
सरकारी अस्पतालों में अनियमितताओं की जांच की मांग
कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि पूरे जनपद के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं बिना अधिकृत प्रशिक्षण या अनुमति के कोई व्यक्ति मरीजों के उपचार संबंधी कार्य तो नहीं कर रहा। साथ ही यदि कहीं अनियमितता मिलती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद











