बाराबंकी के सुबेहा थाना क्षेत्र के कमेला गांव में अवैध पेड़ कटान का दूसरा मामला सामने आया।
आम के बाग के बाद ठेकेदार ने बिना परमिट एक गुलर और तीन शीशम के पेड़ काटकर लकड़ी गायब कर दी।
वन विभाग की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 04 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के सुबेहा थाना क्षेत्र में अवैध पेड़ कटान का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। दो दिन पहले सड़क किनारे स्थित प्रतिबंधित आम के बाग को दिनदहाड़े काटकर लकड़ी गायब करने का मामला सामने आया था, जिसमें वन विभाग ने जांच के बाद संबंधित ठेकेदार पर जुर्माने की कार्रवाई की थी। अभी यह मामला शांत भी नहीं हुआ था कि उसी क्षेत्र से फिर अवैध कटान का नया मामला सामने आ गया।
इस बार बिना वैध अनुमति के एक विशालकाय हरे-भरे गुलर के पेड़ और तीन शीशम के पेड़ों को काटकर उनकी लकड़ी मौके से गायब कर दी गई।
लकड़ी ले गए, मौके पर केवल टहनियां और अवशेष मिले
जानकारी के अनुसार, कमेला गांव में एक ठेकेदार ने चोरी-छिपे बिना किसी वैध परमिट के पेड़ों की कटाई कर दी। कटान के बाद लकड़ी को तत्काल मौके से हटा लिया गया, जिससे वन विभाग को घटनास्थल पर केवल कटे हुए पेड़ों की टहनियां और अन्य अवशेष ही मिले।
घटना की सूचना स्थानीय ग्रामीणों ने वन विभाग को दी, जिसके बाद विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।
जांच में एक गुलर और तीन शीशम के पेड़ों की कटाई की पुष्टि
वन विभाग की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि मौके पर एक गुलर और तीन शीशम के पेड़ों का अवैध रूप से कटान किया गया है। हालांकि कटे हुए पेड़ों की लकड़ी पहले ही हटाई जा चुकी थी।
वन दरोगा अनुज कुमार सिंह ने जांच के आधार पर अवैध कटान के लिए जिम्मेदार ठेकेदार अब्दुल अजीम पुत्र इमाम अली, निवासी महराजपुर, थाना सुबेहा के विरुद्ध वन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया।
पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा, जांच जारी
सुबेहा थाना प्रभारी निरीक्षक बेचू सिंह यादव ने बताया कि वन विभाग की तहरीर के आधार पर आरोपी ठेकेदार के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
लगातार हो रहे कटान से ग्रामीणों में नाराजगी
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लगातार हो रहे अवैध पेड़ कटान से पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई की जाए ताकि वन संपदा की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद












