बाराबंकी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र त्रिलोकपुर में विधायक निधि से लगाया गया लाखों रुपये का हेल्थ एटीएम बंद पड़ा है।
मुख्यमंत्री आरोग्य मेले में मरीजों की जांच अब भी मैन्युअल तरीके से की जा रही है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 14 जून 2026
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी उद्देश्य से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर लाखों रुपये की लागत से हेल्थ एटीएम मशीनें स्थापित की गई थीं, ताकि मरीजों की कई प्रकार की स्वास्थ्य जांचें एक ही स्थान पर तेजी से हो सकें। लेकिन जमीनी स्तर पर इन योजनाओं की हकीकत कुछ और ही दिखाई दे रही है।
बाराबंकी जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) त्रिलोकपुर का मामला इसका ताजा उदाहरण बनकर सामने आया है। यहां करीब दो वर्ष पहले स्थानीय विधायक फरीद महफूज किदवई की विधायक निधि से लगाया गया हेल्थ एटीएम उपयोग के बजाय केवल शोपीस बनकर खड़ा है। लाखों रुपये की लागत से स्थापित इस मशीन का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है और मरीजों की जांच अब भी पारंपरिक मैन्युअल तरीके से की जा रही है।
मुख्यमंत्री आरोग्य मेले में पहुंचे 127 मरीज, लेकिन हेल्थ एटीएम नहीं आया काम
रविवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र त्रिलोकपुर में आयोजित मुख्यमंत्री आरोग्य मेले में कुल 127 मरीजों का परीक्षण एवं उपचार किया गया। इनमें आर्यन सिंह (4 वर्ष), सुरभि (4 वर्ष), राजू (22 वर्ष), सुनील (38 वर्ष), पूनम (27 वर्ष), दिव्यांशी (8 वर्ष), अभय सिंह (18 वर्ष), नीलम (32 वर्ष) सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे।
पीएचसी प्रभारी डॉ. सुनील रावत ने बताया कि इन दिनों तेज धूप और भीषण गर्मी के कारण सन स्ट्रोक, बुखार और डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या बढ़ी है। मेले में चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों ने मरीजों की जांच कर आवश्यक दवाएं वितरित कीं।
वहीं एएनएम शिवकुमारी ने बताया कि मेले के दौरान 12 महिलाओं एवं बच्चों का नियमित टीकाकरण भी किया गया।
हेल्थ एटीएम पर उठे सवाल, मशीन बंद और मरीजों की जांच मैन्युअल
आरोग्य मेले के दौरान जब हेल्थ एटीएम की स्थिति के बारे में जानकारी ली गई तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। लैब टेक्नीशियन अंजू कुमारी ने बताया कि हेल्थ एटीएम मशीन से वर्तमान में कोई जांच नहीं की जा रही है और मरीजों की सभी जांचें मैन्युअल तरीके से की जा रही हैं।
स्थानीय मरीजों का भी कहना है कि वे कई बार स्वास्थ्य केंद्र पर आए, लेकिन हर बार उन्हें हेल्थ एटीएम के बजाय पारंपरिक तरीके से जांच कर वापस भेज दिया गया। मरीजों के अनुसार मशीन लंबे समय से बंद पड़ी है और केवल प्रदर्शन की वस्तु बनकर रह गई है।

जिले के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में भी बंद पड़े हैं हेल्थ एटीएम
त्रिलोकपुर पीएचसी का मामला कोई अपवाद नहीं है। जनपद के कई अन्य सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर लाखों रुपये की लागत से स्थापित हेल्थ एटीएम मशीनें भी उपयोग के बजाय शोपीस बनकर खड़ी हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कोठी में स्थानीय विधायक दिनेश रावत की विधायक निधि से लगवाया गया हेल्थ एटीएम भी लंबे समय से निष्क्रिय पड़ा हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मशीन की नियमित देखरेख और संचालन की व्यवस्था न होने के कारण इसका लाभ मरीजों तक नहीं पहुंच पा रहा है।

लाखों रुपये की मशीन निष्क्रिय, सरकारी योजनाओं की निगरानी पर सवाल
स्वास्थ्य विभाग द्वारा आधुनिक तकनीक के माध्यम से ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के उद्देश्य से स्थापित हेल्थ एटीएम का वर्षों तक निष्क्रिय पड़े रहना सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे हेल्थ एटीएम की कीमत आमतौर पर 5 लाख रुपये से लेकर 15 लाख रुपये या उससे अधिक तक हो सकती है, जो उसमें उपलब्ध जांच सुविधाओं पर निर्भर करती है।
ग्रामीणों का कहना है कि हेल्थ एटीएम जैसी आधुनिक मशीनों का उद्देश्य गांवों में ही लोगों को त्वरित और सटीक स्वास्थ्य जांच सुविधा उपलब्ध कराना था, लेकिन अधिकांश केंद्रों पर ये मशीनें धूल फांक रही हैं।
ऐसे में लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद मशीन का उपयोग न होना सरकारी धन के प्रभावी इस्तेमाल पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।
ग्रामीणों ने उठाई मशीन को चालू कराने की मांग
स्थानीय ग्रामीणों और मरीजों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि हेल्थ एटीएम को जल्द से जल्द चालू कराया जाए ताकि ग्रामीणों को आधुनिक स्वास्थ्य जांच सुविधाओं का लाभ मिल सके। लोगों का कहना है कि यदि मशीन संचालित हो जाए तो ब्लड प्रेशर, शुगर, ईसीजी, ऑक्सीजन लेवल, बीएमआई सहित कई महत्वपूर्ण जांचें आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी और मरीजों को बार-बार जिला मुख्यालय या निजी अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि करोड़ों और लाखों रुपये की योजनाएं केवल कागजों और उद्घाटनों तक सीमित रह जाएं तो इसका नुकसान सीधे आम जनता को उठाना पड़ता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को तत्काल संज्ञान लेकर हेल्थ एटीएम को चालू कराने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद












