बाराबंकी के देवा थाना क्षेत्र में अवैध बालू परिवहन में लगी ट्रैक्टर-ट्रॉली की टक्कर से मां-बेटे और 7 वर्षीय मासूम बच्ची की दर्दनाक मौत हो गई।
हादसे के बाद चालक फरार हो गया। ग्रामीणों ने अवैध बालू परिवहन और विभागीय मिलीभगत के आरोप लगाए हैं।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 10 जून 2026
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के देवा थाना क्षेत्र में मंगलवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में मां-बेटे और एक मासूम बच्ची की मौत हो गई। हादसा लखनऊ-देवा रोड पर गोपालपुर मोड़ के पास उस समय हुआ जब अवैध बालू से लदी तेज़ रफ़्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली ने बाइक को टक्कर मार दी। दुर्घटना इतनी भयावह थी कि बाइक सवार दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल बच्ची ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
हादसे के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉली चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। फरार चालक की तलाश के लिए पुलिस आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है।
आंखों के सामने उजड़ गया परिवार का संसार
जानकारी के अनुसार देवा थाना क्षेत्र के देवगांव निवासी निर्मल कुमार रावत अपने परिवार के साथ लखनऊ के मटियारी स्थित हरिदासी खेड़ा गांव में आयोजित अपनी बहन की मैरिज एनिवर्सरी में शामिल होने गए थे। उनके पड़ोसी और मित्र बृजेंद्र कुमार पाल तथा उनकी मां सुधा देवी भी कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे।
देर रात कार्यक्रम समाप्त होने के बाद सभी लोग बाइकों से वापस बाराबंकी लौट रहे थे। एक बाइक पर निर्मल कुमार अपनी पत्नी और बेटे के साथ सवार थे, जबकि दूसरी बाइक पर उनके मित्र बृजेंद्र कुमार पाल (24 वर्ष), उनकी मां सुधा देवी (50 वर्ष) और निर्मल की 7 वर्षीय पुत्री नैना सवार थी।

कई फीट दूर जाकर गिरी मासूम
निर्मल कुमार के अनुसार जब दोनों बाइकें गोपालपुर मोड़ के पास पहुंचीं, तभी पीछे से आ रही तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली ने बृजेंद्र की बाइक को जोरदार टक्कर मार दी।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक टक्कर इतनी भीषण थी कि 7 वर्षीय नैना कई फीट हवा में उछलकर सड़क पर सिर के बल जा गिरी। वहीं बृजेंद्र और उनकी मां सुधा देवी ट्रैक्टर-ट्रॉली के पहियों के नीचे आ गए और बुरी तरह कुचल गए। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।
गंभीर रूप से घायल नैना को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और बाद में जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया।

मौके पर मची चीख-पुकार, चालक छोड़ गया वाहन
हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोग मदद के लिए दौड़े और पुलिस को सूचना दी गई। दुर्घटना के बाद चालक ट्रैक्टर-ट्रॉली को मौके पर छोड़कर फरार हो गया।
पुलिस ने वाहन को कब्जे में ले लिया है और चालक की तलाश शुरू कर दी है। मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे क्षेत्र में इस दर्दनाक हादसे के बाद शोक का माहौल है।

अवैध बालू परिवहन पर उठे सवाल
घटना के बाद ग्रामीणों ने अवैध बालू परिवहन को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि देवा क्षेत्र में शारदा नहर की सिल्ट सफाई का कार्य चल रहा है। इस दौरान निकाली जा रही बालू की अभी तक विधिवत नीलामी नहीं हुई है, इसके बावजूद रात के अंधेरे में बड़ी मात्रा में बालू ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के माध्यम से अवैध तरीके से बेची जा रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित ठेकेदार द्वारा प्रशासनिक और विभागीय मिलीभगत के चलते बालू का अवैध परिवहन कराया जा रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि जिस ट्रैक्टर-ट्रॉली से हादसा हुआ, वह भी नहर से निकाली गई बालू लेकर जा रही थी।

क्या बोले सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता
अवैध बालू परिवहन के आरोपों को लेकर जब हमारे संवाददाता ने सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता राजीव कुमार सिंह से दूरभाष पर संपर्क किया, तो उन्होंने बताया कि शारदा नहर में इंटरनल सेक्शन रिस्टोर का कार्य चल रहा है। इससे निकलने वाली बालू से नहर के किनारों की मरम्मत होना है। कार्य पूर्ण होने के बाद यदि बालू बचेगी तो उसे नियमानुसार नीलामी कराकर डिस्पोज किया जाएगा। वर्तमान में बालू के परिवहन की अनुमति नहीं दी गई है।
पुलिस कर रही जांच
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटना की जांच की जा रही है। फरार चालक की तलाश जारी है तथा दुर्घटना के कारणों का भी पता लगाया जा रहा है। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि ट्रैक्टर-ट्रॉली में परिवहन किया जा रहा बालू वैध था या अवैध।

बिना नंबर की ट्रैक्टर-ट्रॉली पर उठे सवाल, अवैध खनन और तेज रफ्तार पर ग्रामीणों का आक्रोश
इस दर्दनाक हादसे के बाद एक और गंभीर तथ्य सामने आया है। पुलिस द्वारा कब्जे में ली गई ट्रैक्टर-ट्रॉली पर कोई रजिस्ट्रेशन नंबर अंकित नहीं मिला। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि क्षेत्र में अवैध मिट्टी और बालू परिवहन में लगे अधिकांश वाहनों पर नंबर प्लेट तक नहीं होती, जिससे दुर्घटना होने की स्थिति में जिम्मेदार लोगों की पहचान करना मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि अधिक फेरे लगाने और ज्यादा कमाई करने के लालच में ऐसे वाहन चालक रात के समय खतरनाक गति से ट्रैक्टर-ट्रॉलियां दौड़ाते हैं। कई बार शिकायतों और हादसों के बावजूद परिवहन विभाग, पुलिस और संबंधित अधिकारियों द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती, जिससे वाहन संचालकों के हौसले बुलंद बने रहते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में अवैध खनन और बालू परिवहन का कारोबार लंबे समय से जारी है। बिना नंबर और बिना सुरक्षा मानकों वाले वाहन सड़कों पर खुलेआम दौड़ रहे हैं, जिससे आम लोगों की जान लगातार खतरे में बनी रहती है। ग्रामीणों ने मांग की है कि हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ-साथ बिना नंबर और अवैध खनन में संलिप्त वाहनों पर व्यापक अभियान चलाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
तीन मौतों के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे गंभीर प्रश्न
गोपालपुर मोड़ पर हुए इस हादसे ने एक बार फिर अवैध खनन, बिना नंबर वाले वाहनों के संचालन और प्रशासनिक निगरानी की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यदि अवैध परिवहन में लगे वाहनों पर समय रहते कार्रवाई की गई होती, तो शायद मां-बेटे और मासूम बच्ची की जान बचाई जा सकती थी। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस मामले में केवल जांच तक सीमित रहता है या फिर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ ठोस कार्रवाई भी करता है।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद











