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बाराबंकी में सामुदायिक शौचालय पर लटका ताला, बाहर कूड़े का अंबार; स्वच्छ भारत मिशन की जमीनी हकीकत उजागर

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बाराबंकी के बनीकोडर ब्लॉक की ग्राम पंचायत ढेमा में स्वच्छ भारत मिशन के ज़मीनी हकीकत उजागर।

लाखों रुपये खर्च, लेकिन ग्रामीणों को नहीं मिल रही सुविधा।

सामुदायिक शौचालय पर ताला लटका मिला, जबकि बाहर कूड़े-कचरे का अंबार लगा है।

ग्रामीणों ने शौचालय के संचालन और साफ-सफाई व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की है।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 08 जून 2026

देशभर में स्वच्छता को बढ़ावा देने और गांवों को खुले में शौच से मुक्त बनाए रखने के उद्देश्य से केंद्र और राज्य सरकारें करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं। इसी क्रम में गांव-गांव सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया गया है। इनके संचालन, रखरखाव और नियमित साफ-सफाई के लिए केयरटेकर की नियुक्ति तथा अलग से बजट की भी व्यवस्था की गई है। लेकिन बाराबंकी जिले के बनीकोडर विकास खंड की ग्राम पंचायत ढेमा में स्वच्छ भारत मिशन की जमीनी तस्वीर सरकारी दावों से बिल्कुल अलग नजर आ रही है।

ग्राम पंचायत ढेमा में निर्मित सामुदायिक शौचालय बदहाल स्थिति में पड़ा हुआ है। मौके पर शौचालय के मुख्य द्वार पर ताला लटका मिला, जबकि उसके बाहर कूड़ा-कचरे का ढेर जमा था। परिसर के आसपास फैली गंदगी और दुर्गंध ने स्वच्छता अभियान की हकीकत को उजागर कर दिया है।

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बंद शौचालय से ग्रामीणों को नहीं मिल रहा लाभ

ग्रामीणों का आरोप है कि सामुदायिक शौचालय का नियमित संचालन नहीं किया जा रहा है। कई बार लोग जरूरत पड़ने पर यहां पहुंचते हैं, लेकिन ताला बंद मिलने से उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने जिस उद्देश्य से शौचालय का निर्माण कराया था, वह पूरा होता दिखाई नहीं दे रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार शौचालय की साफ-सफाई भी लंबे समय से नहीं हुई है। बाहर जमा कूड़ा-कचरा और फैली गंदगी से न केवल बदबू फैल रही है, बल्कि संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।

कागजों में संचालन, जमीन पर ताला

ग्रामीणों का कहना है कि कागजों में शौचालय के नियमित संचालन और रखरखाव का दावा किया जाता है। इसके लिए नियुक्त कर्मचारियों के वेतन और अन्य मदों में भुगतान भी किया जाता है, लेकिन वास्तविक स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है।

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लोगों का आरोप है कि यदि शौचालय का नियमित संचालन हो रहा होता तो मुख्य द्वार पर ताला नहीं लटका होता और परिसर में गंदगी का अंबार नहीं लगा होता। इससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्य पर उठ रहे सवाल

स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य गांवों और कस्बों में स्वच्छ वातावरण तैयार करना तथा लोगों को बेहतर स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध कराना है। लेकिन ग्राम पंचायत ढेमा में सामुदायिक शौचालय की स्थिति मिशन के उद्देश्यों पर ही प्रश्नचिह्न लगा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए सामुदायिक शौचालय यदि बंद पड़े रहेंगे तो इसका लाभ आम जनता तक कैसे पहुंचेगा। ग्रामीणों का मानना है कि ऐसी स्थिति में सरकारी धन का उद्देश्यपूर्ण उपयोग भी संदेह के घेरे में आ जाता है।

ग्रामीणों ने की कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से सामुदायिक शौचालय को नियमित रूप से खुलवाने, साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित कराने तथा परिसर में पड़े कूड़ा-कचरे को तत्काल हटवाने की मांग की है।

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ग्रामीणों का कहना है कि जब तक शौचालयों का नियमित संचालन और प्रभावी रखरखाव सुनिश्चित नहीं किया जाएगा, तब तक स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्य अधूरे ही रहेंगे। लोगों ने प्रशासन से मामले का संज्ञान लेकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने और व्यवस्था को दुरुस्त कराने की मांग की है।

रिपोर्ट – मंसूफ अहमद 

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