बाराबंकी के हैदरगढ़ क्षेत्र के खरसतिया गांव में आम और गूलर के हरे-भरे पेड़ों की कथित अवैध कटाई का मामला सामने आया है।
ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की है।
DFO आकाशदीप बधावन ने मामले का संज्ञान लिया है।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 20 मई 2026
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जनपद के हैदरगढ़ कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत ग्राम खरसतिया में हरे-भरे आम और गूलर के पेड़ों की कथित अवैध कटाई का मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में लगातार पेड़ों की कटाई की जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग कार्रवाई करने के बजाय चुप्पी साधे हुए है।
ग्रामीणों के मुताबिक गांव में विकी बाजपेई और लुल्ला ठेकेदार द्वारा बड़े पैमाने पर हरे पेड़ों को काटा जा रहा है। लोगों का कहना है कि यह सिर्फ पेड़ों की कटाई नहीं, बल्कि पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर हमला है।
“सूचना देने पर भी नहीं पहुंचा वन विभाग”
ग्रामीणों का आरोप है कि जब मामले की जानकारी स्थानीय रेंजर उमेश कुमार को फोन पर दी गई तो उन्होंने खुद को छुट्टी पर होने की बात कही।
इस जवाब से ग्रामीणों में और नाराजगी बढ़ गई। लोगों का कहना है कि यदि अधिकारी छुट्टी पर भी थे तो अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को मौके पर भेजकर कार्रवाई के निर्देश दे सकते थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
ग्रामीणों के अनुसार वन विभाग की इस उदासीनता ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि आखिर किसके संरक्षण में खुलेआम हरे-भरे पेड़ों की कटाई की जा रही है।

पर्यावरण को लेकर ग्रामीणों में चिंता
स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार हो रही पेड़ों की कटाई से क्षेत्र का पर्यावरण संतुलन बिगड़ सकता है। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि जिन पेड़ों को वर्षों में तैयार होने में समय लगता है, उन्हें कुछ घंटों में काटा जा रहा है।
ग्रामीणों ने चिंता जताई कि यदि इसी तरह अवैध कटान जारी रहा तो आने वाले समय में लोगों को शुद्ध हवा और हरियाली के लिए तरसना पड़ेगा।
लोगों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके।

DFO आकाशदीप बधावन ने लिया संज्ञान
मामले की जानकारी जब बाराबंकी के प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) आकाशदीप बधावन को दी गई तो उन्होंने तत्काल संज्ञान लेते हुए कार्रवाई का भरोसा दिया।
DFO ने कहा,
“आप पूरी डिटेल भेज दीजिए, मैं मामले की जांच करवाता हूं।”
उनके इस बयान के बाद ग्रामीणों को उम्मीद जगी है कि मामले में जल्द कार्रवाई हो सकती है और अवैध कटान पर रोक लगेगी।
सवालों के घेरे में वन विभाग की निगरानी व्यवस्था
इस पूरे मामले ने वन विभाग की निगरानी व्यवस्था और स्थानीय स्तर पर हो रही कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पर्यावरण संरक्षण को लेकर सरकार लगातार अभियान चला रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर हरे पेड़ों की कटाई जैसी घटनाएं इन दावों को चुनौती देती नजर आ रही हैं।
अब देखना यह होगा कि विभाग इस मामले में सिर्फ जांच तक सीमित रहता है या फिर दोषियों के खिलाफ वास्तव में सख्त कार्रवाई की जाती है।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद / उस्मान













