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“बेटी दर्द से कराहती रही, पुलिस समझौते में लगी रही” — बाराबंकी में दबंगों के हमले के बाद पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल

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बाराबंकी के माती थाना क्षेत्र में जमीन विवाद को लेकर मारपीट में एक किशोरी गंभीर रूप से घायल हो गई।

पीड़ित परिवार ने पुलिस पर निष्पक्ष कार्रवाई न करने और दबाव में समझौता कराने का आरोप लगाया है।

मामले ने पुलिस कार्यशैली और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 20 मई 2026

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के माती थाना क्षेत्र के ग्राम आसिमाबाद में जमीन विवाद को लेकर हुई मारपीट का मामला अब सिर्फ एक पारिवारिक झगड़ा नहीं रह गया है, बल्कि यह पुलिस की कार्यशैली, निष्पक्षता और पीड़ितों को न्याय मिलने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि दबंगों द्वारा घर में घुसकर महिलाओं और युवतियों के साथ मारपीट की गई, लेकिन कार्रवाई करने के बजाय पुलिस ने मामले को दबाने और समझौता कराने का प्रयास किया। घटना में घायल हुई किशोरी जिला अस्पताल में भर्ती है, जबकि परिवार न्याय की आस लगाए दर-दर भटक रहा है।

“घर में घुसकर बेटियों को पीटा, सामान तोड़ा”

ग्राम आसिमाबाद निवासी राजेश कुमार पुत्र केशन कुमार द्वारा थाना माती में दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार, पड़ोस में रहने वाले नीरज, धीरज और लक्ष्मी से सहन की जमीन को लेकर पुराना विवाद चल रहा है।

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आरोप है कि 19 मई 2026 को सुबह करीब 11:30 बजे घर के सामने खड़ी गाड़ी को हटाने को लेकर विवाद शुरू हुआ। देखते ही देखते कहासुनी गाली-गलौज और फिर मारपीट में बदल गई।

पीड़ित का आरोप है कि दबंगों ने पहले उन्हें लात-घूंसों से पीटा और जब वह जान बचाकर घर के अंदर भागे तो आरोपी घर में घुस आए। वहां उनकी बेटी पूजा और भतीजी अल्पना के साथ मारपीट की गई और घर का सामान भी तोड़फोड़ कर क्षतिग्रस्त कर दिया गया।

परिवार का कहना है कि शोर सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, तब आरोपी शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी देते हुए फरार हो गए।

घायल बेटी को देखकर पिता की आंखें हुईं नम

मारपीट में घायल हुई करीब 16 वर्षीय अल्पना कुमारी की हालत को लेकर परिवार बेहद परेशान है। अल्पना के पिता ब्रजेश कुमार ने भावुक होते हुए कहा कि उनकी बेटी की कमर में गंभीर चोटें आई हैं और वह ठीक से चल-फिर भी नहीं पा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी पक्ष का रिश्तेदार पुलिस विभाग में दरोगा है और इसी कारण उनकी सुनवाई नहीं हो रही।

ब्रजेश कुमार ने कहा,

“हम लोग गरीब हैं, प्राइवेट नौकरी करके परिवार चलाते हैं। शायद यही वजह है कि हमारी रिपोर्ट तक दर्ज नहीं की गई। पुलिस चाहे मदद करे या न करे, लेकिन हम अपनी बेटी का इलाज जरूर कराएंगे… बेटी है हमारी।”

परिवार ने घायल किशोरी को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया है।

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“कार्रवाई की जगह समझौते का दबाव बनाया गया”

पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस ने निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय उन पर समझौते का दबाव बनाया। उनका कहना है कि यदि पुलिस चाहती तो मौके पर पहुंचकर मेडिकल परीक्षण कराती और तत्काल कानूनी कार्रवाई भी हो सकती थी।

परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी पक्ष का एक रिश्तेदार, जो पुलिस विभाग में दरोगा पद पर तैनात है, घटना के बाद मौके पर पहुंचा और कथित तौर पर दबाव बनाता दिखाई दिया। शिकायतकर्ता का दावा है कि संबंधित पुलिसकर्मी की तैनाती थाना माती क्षेत्र में नहीं है।

पीड़ित पक्ष का कहना है कि उनके पास एक वीडियो भी मौजूद है, जिसमें कथित तौर पर धमकी और दबाव बनाए जाने जैसी बातें सुनाई दे रही हैं।

जनपद में जमीन विवादों पर पहले भी उठते रहे हैं सवाल

बाराबंकी जिले में जमीन और बंटवारे से जुड़े विवादों को लेकर पहले भी कई बार पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई मामलों में समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होने से विवाद और गंभीर रूप ले लेते हैं।

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ग्रामीणों का कहना है कि गरीब और कमजोर परिवार अक्सर न्याय के लिए थानों, तहसीलों और शिकायत पोर्टलों के चक्कर काटने को मजबूर हो जाते हैं।

पुलिस का आधिकारिक पक्ष अब तक नहीं आया सामने

फिलहाल पूरे मामले में पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। थाना माती पुलिस द्वारा मामले की जांच किए जाने की बात कही जा रही है।

अब देखना यह होगा कि घायल किशोरी और उसके परिवार को न्याय मिल पाता है या यह मामला भी आरोपों और शिकायतों के बीच दबकर रह जाता है।

रिपोर्ट – मंसूफ अहमद / उस्मान 

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