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बाराबंकी जिला अस्पताल में अग्नि सुरक्षा को लेकर मॉक ड्रिल: डॉक्टरों और स्टाफ को सिखाए गए आग से बचाव के तरीके 

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बाराबंकी के रफी अहमद किदवई मेमोरियल जिला अस्पताल में अग्निशमन विभाग ने अग्नि सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाया।

डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और इंटर्न छात्रों को CO₂ और DCP सिलेंडर के उपयोग सहित आग से बचाव और मरीजों को सुरक्षित निकालने की ट्रेनिंग दी गई।

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बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 07 मई 2026

हाल के दिनों में जिले के विभिन्न इलाकों में आगजनी की घटनाओं में बढ़ोतरी के बाद प्रशासन और फायर विभाग अलर्ट मोड पर है। इसी क्रम में अस्पतालों, सरकारी संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।

इसी क्रम में आज गुरुवार को जनपद के रफी अहमद किदवई मेमोरियल जिला अस्पताल में अग्नि सुरक्षा और आपदा प्रबंधन को लेकर विशेष जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। यह अभियान अग्निशमन विभाग की ओर से द्वितीय अधिकारी राहुल कुमार के नेतृत्व में चलाया गया, जिसमें अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, इंटर्नशिप कर रहे छात्र-छात्राओं और अन्य कर्मचारियों को आग लगने की स्थिति में त्वरित बचाव और सुरक्षा उपायों की जानकारी दी गई।

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CO₂ और DCP सिलेंडर के इस्तेमाल का लाइव प्रदर्शन

अग्निशमन विभाग की टीम ने अस्पताल परिसर में मौजूद कर्मचारियों को विभिन्न प्रकार की आग बुझाने वाले उपकरणों के उपयोग की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी। इस दौरान “कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) सिलेंडर” और “ड्राई केमिकल पाउडर (DCP) सिलेंडर” के इस्तेमाल का लाइव डेमो भी प्रस्तुत किया गया।

फायर अधिकारियों ने बताया कि CO₂ सिलेंडर बिजली के उपकरणों, वायरिंग और इलेक्ट्रिकल पैनल में लगी आग बुझाने के लिए बेहद प्रभावी माना जाता है, जबकि DCP सिलेंडर सामान्य आग, गैस रिसाव और तेल से लगी आग पर उपयोग किया जाता है।

अधिकारियों ने यह भी बताया कि आग लगने की स्थिति में घबराने के बजाय सबसे पहले बिजली सप्लाई बंद करना, अलार्म बजाना और तत्काल फायर कंट्रोल रूम को सूचना देना बेहद जरूरी होता है।

बच्चों के वार्ड और ट्रॉमा सेंटर में कराया गया रेस्क्यू अभ्यास

अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों को ध्यान में रखते हुए फायर ब्रिगेड टीम ने बच्चों के वार्ड, ट्रॉमा सेंटर, इमरजेंसी यूनिट और अन्य महत्वपूर्ण विभागों में मॉक ड्रिल भी कराई। कर्मचारियों को सिखाया गया कि आग लगने पर मरीजों को सुरक्षित तरीके से बाहर कैसे निकाला जाए और ऑक्सीजन सिलेंडरों को किस प्रकार सुरक्षित रखा जाए।

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टीम ने प्राथमिक बचाव कार्यों, इमरजेंसी निकासी प्रक्रिया और भीड़ नियंत्रण को लेकर भी अस्पताल स्टाफ को विस्तार से जानकारी दी।

सीएमएस बोले — सही समय पर लिया गया निर्णय बचा सकता है कई जिंदगियां

इस मौके पर जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. जेपी मौर्य ने कहा कि अस्पतालों में इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम बेहद आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों में सही जानकारी और समय पर लिया गया निर्णय कई लोगों की जान बचा सकता है।

वहीं, नर्सिंग स्टाफ और इंटर्नशिप कर रहे छात्र-छात्राओं ने भी कहा कि इस तरह की ट्रेनिंग से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और भविष्य में किसी भी आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने में मदद मिलेगी।

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कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद

अभियान के दौरान फायरमैन मोहम्मद कुमेल, रोहित सिंह, जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. जेपी मौर्य, ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. बी.पी. सिंह सहित बड़ी संख्या में नर्सिंग स्टाफ, इंटर्न छात्र-छात्राएं और अस्पताल कर्मचारी मौजूद रहे।

रिपोर्ट – मंसूफ अहमद / उस्मान 

 

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