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“जिसे पीटा, उसी ने दी नौकरी!” बाराबंकी के विवादित शिक्षक का भाजपा कनेक्शन, नाबालिग छात्रा से अश्लील हरकत-प्रिंसीपल से मारपीट के बावजूद नौकरी बरकरार

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बाराबंकी के सिटी इंटर कॉलेज के विवादित शिक्षक मामले में बड़ा खुलासा।

भाजपा कनेक्शन, नाबालिग छात्रा के उत्पीड़न और प्रिंसिपल से मारपीट के केस के बावजूद अवैध ज्वाइनिंग।

सामने आई मिलीभगत की गज़ब कहानी।

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बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 28 अप्रैल 2026

जनपद बाराबंकी के सिटी इंटर कॉलेज से जुड़े विवादित सहायक अध्यापक अभय कुमार का मामला अब लगातार नए और चौंकाने वाले खुलासों के साथ गहराता जा रहा है। पहले अवैध पुनर्नियुक्ति और वेतन भुगतान का मामला सामने आया था, लेकिन अब जो तथ्य सामने आए हैं, उन्होंने पूरे प्रकरण को और गंभीर तथा संवेदनशील बना दिया है।

नए खुलासों में आरोपी शिक्षक के राजनीतिक संबंध, नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीड़न के आरोप और प्रिंसिपल के साथ हिंसक मारपीट जैसी घटनाएं शामिल हैं—जो इस मामले को महज प्रशासनिक अनियमितता से आगे बढ़ाकर एक बड़े सिस्टम फेलियर की ओर इशारा करती हैं।

 

भाजपा कार्यकर्ता के रूप में सक्रियता, राजनीतिक प्रभाव की चर्चा तेज

जानकारी के अनुसार अभय कुमार न केवल एक शिक्षक था, बल्कि भाजपा के कार्यकर्ता के रूप में भी सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ था। वह विभिन्न राजनीतिक कार्यक्रमों में भाग लेता था और बैनर-पोस्टरों में अपना नाम “अभय कोरी” लिखवाकर अपनी राजनीतिक पहचान भी प्रदर्शित करता था।

इतना ही नहीं, उसके पिता लालता कोरी ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में जैदपुर सीट से भाजपा से दावेदारी भी पेश की थी। ऐसे में इस पूरे मामले में राजनीतिक प्रभाव की आशंका भी लगातार जताई जा रही है।

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यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या राजनीतिक सक्रियता के चलते आरोपी को संस्थागत संरक्षण मिला?

नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप

मामले का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि आरोपी शिक्षक पर कॉलेज में ही पढ़ने वाली कक्षा 11 की एक नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीड़न का आरोप लग चुका है।

पीड़िता के परिजनों द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद प्रिंसिपल डॉ. शिवचरण गौतम ने आरोपी शिक्षक अभय कुमार को नोटिस भी जारी किया था।

इस तरह के गंभीर आरोपों के बावजूद आरोपी का सिस्टम में बने रहना कई बड़े सवाल खड़े करता है—खासतौर पर शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में।

प्रिंसिपल से मारपीट और कॉलेज में तोड़फोड़ का मामला

वर्ष 2022 में सिटी इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. शिवचरण गौतम ने आरोपी शिक्षक अभय कुमार और उसके पिता सहित अन्य लोगों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी।

आरोप था कि नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीड़न मामले में नोटिस जारी किए जाने से नाराज होकर आरोपी ने कॉलेज परिसर में घुसकर प्रिंसिपल के साथ मारपीट की और तोड़फोड़ की।

इस मामले में पुलिस ने जांच पूरी कर चार्जशीट भी न्यायालय में दाखिल कर दी थी, और मामला वर्तमान में सीजेएम कोर्ट में विचाराधीन बताया जा रहा है।

 

सबसे चौंकाने वाला मोड़—जिसे पीटा, वही बना ‘सहयोगी’

इस पूरे प्रकरण का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह सामने आया है कि जिस प्रिंसिपल को आरोपी शिक्षक ने कथित तौर पर ऑफिस में घुसकर पीटा था, वही बाद में उसकी नियम विरुद्ध ज्वाइनिंग में भागीदार बन गया।

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यह तथ्य न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

  • आखिर किन परिस्थितियों में एक पीड़ित प्रिंसिपल आरोपी के पक्ष में खड़ा नजर आया?
  • क्या इस पूरे मामले में दबाव, समझौता या मिलीभगत थी?

ये सवाल अब जांच का विषय बनते जा रहे हैं।

अवैध पुनर्नियुक्ति और वेतन भुगतान—पहले से ही विवाद में मामला

गौरतलब है कि आरोपी शिक्षक अभय कुमार की अवैध पुनर्नियुक्ति और वेतन भुगतान का मामला पहले ही सुर्खियों में आ चुका है।

आरोप है कि बिना वैधानिक प्रक्रिया पूरी किए उसे दोबारा ज्वाइन करा दिया गया और वेतन भी जारी कर दिया गया।

इस प्रक्रिया में विभागीय अधिकारियों और कॉलेज प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में रही है।

कॉलेज प्रबंधक की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने DIOS के तबादले, मामले में FIR दर्ज करने और एसटीएफ के सीओ स्तर के अधिकारी से जांच के आदेश दिए हैं।

कई स्तरों पर उठ रहे सवाल—जवाबदेही तय होगी या नहीं?

इस पूरे मामले ने शिक्षा विभाग, प्रशासन और राजनीतिक तंत्र—तीनों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्य सवाल यह हैं—

  • गंभीर आपराधिक आरोपों के बावजूद आरोपी को संरक्षण कैसे मिला?
  • क्या विभागीय स्तर पर मिलीभगत हुई?
  • क्या राजनीतिक प्रभाव ने कार्रवाई को प्रभावित किया?
  • क्या पीड़ितों को न्याय मिल पाएगा?
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एक केस, कई सवाल

बाराबंकी का यह मामला अब केवल एक शिक्षक का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की जवाबदेही और पारदर्शिता की परीक्षा बन गया है।

नाबालिग उत्पीड़न, मारपीट, राजनीतिक कनेक्शन और अवैध ज्वाइनिंग जैसे गंभीर पहलुओं के सामने आने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच एजेंसियां कितनी निष्पक्षता और तेजी से कार्रवाई करती हैं।

यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला शिक्षा व्यवस्था पर जनता के भरोसे को और कमजोर कर सकता है।

रिपोर्ट – कामरान अल्वी 

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Author: Kamran Alvi

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