Barabanki: असंद्रा क्षेत्र में मारपीट मामले को लेकर पुलिस पर 16 हजार रुपये की अवैध वसूली और फर्जी कार्रवाई के आरोप लगे हैं।
पीड़ित ने मुख्यमंत्री पोर्टल और एसपी से शिकायत कर निष्पक्ष जांच की मांग की है।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 12 अप्रैल 2026
बाराबंकी के असंद्रा थाना क्षेत्र के बांसूपुर मजरे रतौली गांव में करीब 20 दिन पहले हुए एक मामूली विवाद ने अब बड़ा रूप ले लिया है।
इस मामले में एक पक्ष ने पुलिस के हलका दरोगा (विवेचक) और हेड कांस्टेबल पर अवैध वसूली, पक्षपातपूर्ण कार्रवाई और प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं।
शनिवार को पीड़ित द्वारा मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई शिकायत में कहा गया है कि मुकदमे में राहत देने और गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर 16 हजार रुपये वसूले गए, इसके बावजूद लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है।

22 मार्च की कहासुनी से बढ़ा विवाद
बांसूपुर गांव निवासी संदीप सिंह के अनुसार, 22 मार्च को उनके भतीजे अर्पित सिंह और गांव के ही सोनू सिंह के बीच पुरानी रंजिश को लेकर मामूली कहासुनी हुई थी।
दोनों पक्षों की शिकायत के बाद पुलिस ने कथित तौर पर एक पक्षीय कार्रवाई करते हुए सोनू सिंह की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया, जबकि अर्पित की शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई और उसे थाने से भगा दिया गया।
अगले दिन जानलेवा हमला, कई लोग घायल
पीड़ित के अनुसार, पुलिस की इस कार्रवाई से विपक्षियों के हौसले बढ़ गए और 23 मार्च की रात गांव में शिवबचन के घर आयोजित मुंडन संस्कार के दौरान अर्पित सिंह, शिवम और अशोक सिंह पर जानलेवा हमला कर दिया गया।

इस हमले में तीनों गंभीर रूप से घायल हो गए।
बाद में पुलिस ने अर्पित की तहरीर पर सोनू सिंह समेत आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया, लेकिन साथ ही दूसरी ओर से शिवबचन की तहरीर पर पीड़ित पक्ष के लोगों पर भी मारपीट की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
फर्जी मेडिकल और मुकदमे का आरोप
मामले में नया मोड़ तब आया जब हिमाचलपुरवा निवासी विनय सिंह, जिन्हें घायल दिखा कर संदीप सिंह के भाई व भतीजों पर मुकदमा दर्ज किया गया था, उन्होंने खुद मारपीट की घटना से इनकार कर दिया।
उन्होंने पुलिस अधीक्षक को शपथ पत्र देकर बताया कि:
- उनकी चोट मारपीट में नहीं बल्कि साइकिल से गिरने से लगी थी
- पुलिस ने फर्जी मेडिकल बनाकर मुकदमा दर्ज किया
इस शपथ पत्र के बाद असंद्रा पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।


16 हजार की वसूली का आरोप, फिर भी जेल भेजा
पीड़ित संदीप सिंह ने आरोप लगाया कि विवेचक ओमित कौशल और हेड कांस्टेबल अशोक कुमार वर्मा ने 16 हजार रुपये लेने के बावजूद उनके दो भतीजों समेत तीन लोगों को जेल भेज दिया।
वहीं दूसरी ओर जानलेवा हमले के मामले में नामजद आठ आरोपियों में से पांच अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं और उनकी गिरफ्तारी नहीं हो रही है।
परिवार पर असर, घर छोड़ने की नौबत
पीड़ित संदीप सिंह के अनुसार, पुलिस की लगातार कार्रवाई और प्रताड़ना के कारण उनका परिवार भय के माहौल में जी रहा है।
उन्होंने बताया कि:
- खेती-किसानी का काम प्रभावित हो रहा है
- परिवार घर छोड़ने को मजबूर हो रहा है
पीड़ित ने एसपी से शिकायत के साथ ही मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी न्याय की गुहार लगाई है।

पुलिस ने आरोपों को बताया निराधार
इस मामले में विवेचक ओमित कौशल ने सभी आरोपों को गलत बताया है।
उन्होंने कहा कि:
- गांव में हुई घटना में तीन पक्षों से करीब 31 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज है
- 16 हजार रुपये की वसूली का आरोप पूरी तरह निराधार है
- विनय सिंह के शपथ पत्र को जांच में शामिल किया जाएगा
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पहले भी विवादों में रही असंद्रा पुलिस
स्थानीय लोगों के अनुसार, असंद्रा थाना पुलिस की कार्यशैली पहले भी विवादों में रही है।
बताया जाता है कि:
- नवंबर 2025 में दो सगी बहनों के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म मामले में पुलिस पर लापरवाही और साठगांठ के आरोप लगे थे
- एक अन्य मामले में विवाहिता द्वारा ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर जहर खाने की घटना में भी पुलिस पर आरोपियों को बचाने के आरोप लगे
- हाल ही में मंझौती बेलपुर निवासी जैराम ने पुलिस पर 14 हजार रुपये छीनने और धमकी देने का आरोप लगाया था
इसके अलावा अवैध लकड़ी कटान और खनन माफियाओं से साठगांठ के आरोप भी समय-समय पर सामने आते रहे हैं।
बड़ा सवाल—क्या निष्पक्ष होगी जांच?
लगातार सामने आ रहे आरोपों के बाद अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों पर कार्रवाई हो पाएगी या नहीं।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद












