Barabanki:
बाराबंकी में जमीन घोटाले का नया खुलासा हुआ है। एक ही इकरारनामे के दो रजिस्टर्ड दस्तावेजों में ज़ुबैर अहमद की दो अलग-अलग फोटो मिली हैं, इसके बावजूद दस्तावेज रजिस्टर्ड और निरस्त हुए। उप निबंधक कार्यालय की सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश।
राजधानी लखनऊ से सटे बाराबंकी जिले में जालसाजी, धोखाधड़ी और सरकारी दस्तावेजों में कूटरचना का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने न केवल आम जनता को चौंका दिया है बल्कि उप निबंधक कार्यालय बाराबंकी की कार्यप्रणाली व दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यहां एक व्यक्ति की जानकारी और सहमति के बिना ही जालसाजों ने जाली दस्तावेजों, फर्जी हस्ताक्षर, नकली गवाहों और सरकारी दस्तावेजों के कूटरचना के सहारे उसकी कीमती जमीन का रजिस्टर्ड इकरारनामा (सेल एग्रीमेंट) कराया और फिर उसी फर्जीवाड़े के आधार पर उसे निरस्त भी करा दिया।
मामले का खुलासा तब हुआ जब जिस व्यक्ति की फोटो का दुरुपयोग किया गया था, उसकी नजर उस फर्जी इकरारनामे पर पड़ी, जिसमें उसकी फोटो का दुरुपयोग किया गया था। पीड़ित की शिकायत पर नगर कोतवाली पुलिस ने जालसाज गिरोह के सरगना फुरकान पुत्र सुलेमान, निवासी दक्षिण टोला, कस्बा बंकी को हिरासत में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

पीड़ित को ऐसे लगी फर्जीवाड़े की भनक
चकचेरा गांव निवासी राजेन्द्र प्रसाद ने नगर कोतवाली बाराबंकी में दी गई तहरीर में बताया कि उनका एक रिश्तेदार उप निबंधक कार्यालय बाराबंकी के बाहर चाय की दुकान लगाता है। 1 जनवरी 2026 को वह अपने रिश्तेदार की दुकान पर बैठा चाय पी रहा था, तभी उसकी नज़र बंकी कस्बे के दक्षिण टोला निवासी फुरकान पुत्र सुलेमान के हाथ में मौजूद एक इकरारनामे पर पड़ी, जिसमें राजेन्द्र की फोटो लगी हुई थी।
अपनी फ़ोटो देख राजेन्द्र प्रसाद को गहरा संदेह हुआ। जब उसने फुरकान से इस बारे में सवाल किया तो वह गोलमोल जवाब देकर मौके से निकल गया। इसके बाद पीड़ित ने उप निबंधक कार्यालय से उक्त इकरारनामे की प्रमाणित प्रति निकलवाई, तब पूरे फर्जीवाड़े की परतें खुलती चली गई।

जाली पहचान से इकरानामा निरस्त कराया गया
जांच में सामने आया कि जुबैर अहमद पुत्र सगीर अहमद, निवासी ग्राम सिदवाही, थाना देवा, जिला बाराबंकी की जगह राजेन्द्र प्रसाद की फ़ोटो और जाली पहचान पत्र लगाकर उसे ज़ुबैर अहमद दर्शाते हुए 29 मार्च 2025 को ग्राम बरेठी की गाटा संख्या 562 से संबंधित एक रजिस्टर्ड इकरारनामा उप निबंधक कार्यालय बाराबंकी में निरस्त कराया गया।
इस फर्जी इकरारनामे में विक्रेता के रूप में ज़ुबैर अहमद और जुनैद अहमद पुत्रगण सगीर अहमद तथा क्रेता के तौर पर फुरकान ने सुलेमान का नाम दर्ज था। वही गवाहों के तौर पर राममनोहर और आलोक कुमार के फोटो, हस्ताक्षर और मतदाता पहचान पत्र की प्रतियां भी संलग्न थी।
पुराना इकरारनामा भी निकला फर्जी
राजेन्द्र प्रसाद ने बताया कि जब उसने इस मामले की छानबीन की तो उसे पता चला कि जिस जमीन का इकरारनामा निरस्त कराया गया है, उसी जमीन का एक पुराना रजिस्टर्ड इकरारनामा 19 अप्रैल 2016 को भी उप निबंधक कार्यालय बाराबंकी में दर्ज है। जब उस दस्तावेज की प्रति निकलवाई गई तो उसमें भी किसी अन्य व्यक्ति को ज़ुबैर अहमद बनाकर उसकी फोटो लगाकर रजिस्ट्री कराई गई थी, जिससे यह साफ हो गया कि जालसाज द्वारा सुनियोजित गिरोह बनाकर लंबे समय से जालसाजी की जा रही थी।

दो रजिस्टर्ड दस्तावेज, दो अलग-अलग तस्वीरें
पीड़ित राजेन्द्र प्रसाद ने बताया कि 18 अप्रैल 2016 को उप निबंधक कार्यालय बाराबंकी में संपादित रजिस्टर्ड इकरारनामें में जुबैर अहमद की जो तस्वीर लगी है, वह बिल्कुल अलग व्यक्ति की प्रतीत होती है। वही, 29 मार्च 2025 को उप निबंधक कार्यालय बाराबंकी में ही निरस्त कराए गए उसी इकरारनामे में जुबैर के नाम पर एक दूसरी, पूरी तरह अलग फोटो का इस्तेमाल किया गया है।
एक ही व्यक्ति ज़ुबैर अहमद के नाम पर बनाए गए दो अलग-अलग रजिस्टर्ड दस्तावेजों में दो अलग-अलग व्यक्तियों की फोटो लगी हुई है, इसके बावजूद न केवल इकरारनामा रजिस्टर्ड हुआ बल्कि बाद में उसे निरस्त भी कर दिया गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दो अलग-अलग व्यक्तियों की फोटो होने के बावजूद न तो रजिस्ट्री के समय और न ही निरस्तीकरण के दौरान किसी स्तर पर आपत्ति दर्ज की गई। इससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर उप निबंधक कार्यालय में पहचान और फोटो का सत्यापन किस आधार पर किया गया।
दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया पर बड़ा प्रश्नचिन्ह
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का कहना है कि जमीन से जुड़े रजिस्टर्ड दस्तावेजों में फोटो और पहचान का मिलान सबसे अहम प्रक्रिया होती है। इसके बावजूद यदि दो अलग अलग फोटो वाले दस्तावेज वैध तरीके से रजिस्टर्ड और निरस्त हो जाते हैं तो यह सीधे तौर पर प्रणालीगत लापरवाही या मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
पीड़ित का आरोप है कि जालसाज फुरकान और उसके गिरोह ने इस कमजोरी का फायदा उठाते हुए न सिर्फ फर्जी दस्तावेज तैयार किए, बल्कि सरकारी सिस्टम को भी गुमराह किया।
जाली वोटर आईडी बनाने का भी आरोप
यह भी सामने आया है कि इकरारनामे में विक्रेता की पहचान के लिए लगाए गए मतदाता पहचान पत्र (Voter ID) भी कूटरचित थे।

कथित ज़ुबैर अहमद का EPIC नंबर HDN 3551033 और जुनैद अहमद का EPIC नंबर HDN 3554847 भारत निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर सर्च करने पर पूरी तरह फर्जी पाए गए।
जब इन दोनों EPIC नंबरों को भारत निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर सर्च किया गया तो दोनों ही पूरी तरह फर्जी पाए गए। वेबसाइट पर इन नंबरों से संबंधित कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं मिली, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि जालसाजों ने सरकारी पहचान पत्र तक कूटरचित कर रखे थे।

जालसाज फुरकान पर पहले से भी कई आरोप
पीड़ित के अनुसार, जब वह बंकी कस्बे पहुंचा और स्थानीय लोगों से फुरकान के बारे में जानकारी जुटाई तो बताया गया की वह पेशेवर जालसाज है और गिरोह बनाकर जमीनों के क्रय-विक्रय के नाम पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे लोगों के साथ धोखाधड़ी करता है। स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि फुरकान पूर्व में भी कई लोगों से लाखों रुपए की ठगी कर चुका है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने कुछ तथाकथित पत्रकारों और स्थानीय पुलिस से सांठगांठ बना रखी है, जिसके कारण पीड़ित लोग उसके खिलाफ आवाज उठाने से डरते हैं। हिम्मत जुटाकर अगर कोई शिकायत कर भी देता है तो साठगांठ के चलते पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती।
पीड़ित ने दी तहरीर, पुलिस जांच में जुटी
यह मामला अब केवल एक व्यक्ति के साथ धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी कार्यालयों में दस्तावेज सत्यापन की विश्वसनीयता पर भी बड़ा सवाल बन चुका है। इस पूरे मामले को लेकर पीड़ित ने नगर कोतवाली बाराबंकी में लिखित तहरीर देकर फुरकान और उसके गिरोह के अन्य सदस्यों के क्रियाकलापो की जांच व कठोर कार्रवाई की मांग की है।
नगर कोतवाल सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि तहरीर प्राप्त हो गई है। मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद















