Barabanki:
बाराबंकी की आवास विकास कॉलोनी स्थित गुज्जू होटल की रसमलाई खाने से एक हिंदी दैनिक अखबार के पत्रकार की हालत बिगड़ गई और उन्हें उल्टी आने लगी। साथी पत्रकारों ने उन्हें आनन फानन में जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया, जहां उनका उपचार चल रहा है। पढ़ें पूरी खबर विस्तार से

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश।
जिले में खाद्य विभाग और मिलावटखोरों की सेटिंग अब सीधे जनता की जान पर भारी पड़ने लगी है। विभागीय अफसरों की बेलगाम कार्यशैली का ताज़ा और चौंकाने वाला मामला आवास विकास कॉलोनी स्थित गुज्जू होटल से सामने आया है, जहां ख़राब रसमलाई खाने से एक हिंदी दैनिक अखबार के पत्रकार चौधरी उस्मान अली की हालत बिगड़ गई और उन्हें आनन फानन में ट्रामा सेंटर ले जाना पड़ा।
नहीं उठा FSDA के अधिकारियो का सीयूजी नंबर
सबसे हैरानी वाली बात तो यह रही कि इस घटना के बाद जिले के कई पत्रकारों ने जब सहायक आयुक्त सहित खाद्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को उनके सीयूजी नंबरो पर फोन किया, तो किसी ने फोन तक उठाना मुनासिब नहीं समझा।
गौरतलब है कि यह वही सीयूजी नंबर है, जिन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 24 घंटे सक्रिय रखने के सख़्त आदेश दिए हैं। लेकिन बाराबंकी में यह आदेश कागजों तक ही सीमित नज़र आ रहे है। सूत्रो की माने तो फूड विभाग के अधिकारी सुविधा शुल्क की मलाई काटने में इतने व्यस्त हैं कि मिलावट और खराब खाद्य सामग्री की शिकायतों पर आंखे मूंद लेते हैं।
चुनिंदा दुकानों तक ही सीमित है FSDA की कार्रवाई
जिले में खुलेआम खराब मिठाई, दूषित दूध उत्पाद और मिलावटी खाद्य सामग्री बेची जा रही है, लेकिन कार्रवाई सिर्फ़ चुनिंदा दुकानों तक सीमित है। आपको बताते चले कि कुछ दिन पहले ही शहर के बड़ेल स्थित प्रसिद्ध दरबारी होटल का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें चूहे मिठाई के काउंटर में दिखाई दे रहे थे।
इसके साथ ही साफ सफाई की भी हालत खस्ता नज़र आ रही थी। इसके बावजूद FSDA के जिम्मेदारों ने कोई ठोस कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाई। जिससे दुकानदारों और FSDA के अधिकारियों की साठगांठ की चर्चाएं और तेज हो गई।
क्या बड़े हादसे का इंतेज़ार कर रहा फूड विभाग?
लोग सवाल पूछ रहे हैं कि खाद्य विभाग क्या सिर्फ वाहवाही लूटने के लिए चुनिंदा दुकानों पर ही छापे डालता है, जबकि असली मिलावटखोर बेख़ौफ़ होकर आम जनता को ज़हर परोस रहे है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या फूड विभाग किसी बड़े हादसे का इंतेज़ार कर रहा है? या भ्रष्टाचार में डूबे अफसरों की आंखे तभी खुलेगी जब किसी बेगुनाह की जान चली जाएगी?
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद
















