Barabanki: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज यादव उर्फ बबलू को एससी/एसटी एक्ट की विशेष अदालत से जमानत मिली।
कोर्ट ने पुलिस की एक सप्ताह की मांग के बजाय तीन दिन की रिमांड दी। जानिए क्या है पूरा मामला, आरोप और बचाव पक्ष के तर्क।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 21 फरवरी 2026
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज यादव उर्फ बबलू को एससी/एसटी एक्ट की विशेष अदालत से जमानत मिल गई है। अपर सत्र न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) की अदालत में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनी गईं, जिसके बाद न्यायालय ने जमानत याचिका स्वीकार कर ली।
मनोज यादव के अधिवक्ता संतशरण यादव (संजय बाबा) ने बताया कि अदालत ने सभी तथ्यों और प्रस्तुत तर्कों पर विचार करते हुए जमानत मंजूर की है। इससे पहले कोर्ट ने पुलिस को जमानत याचिका पर प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।
सुनवाई के दौरान पुलिस ने मांगी एक सप्ताह की रिमांड
शुक्रवार को हुई सुनवाई में क्षेत्राधिकारी सौरभ श्रीवास्तव न्यायालय में उपस्थित हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि मामले में कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्यों का संकलन अभी शेष हैं और विवेचना जारी है।
पुलिस की ओर से आरोपी की सप्ताह की रिमांड बढ़ाने का अनुरोध किया गया, साथ ही विस्तृत प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय भी मांगा गया।
हालांकि, न्यायालय ने पुलिस के अनुरोध को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए केवल तीन दिन की रिमांड स्वीकृत की। कोर्ट ने कहा कि पूर्ण प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत न किए जाने की स्थिति में लंबी रिमांड उचित नहीं है।

क्या है पूरा मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादिनी अनुसूचित जाति की महिला हैं। उनके पति ने वर्ष 2004 में मनोज उर्फ बबलू और अन्य लोगों के खिलाफ घर में घुसकर मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का मुकदमा दर्ज कराया था।
वादिनी का आरोप है कि करीब 34 माह पूर्व सफदरगंज चौराहे के पास आरोपी ने उनका रास्ता रोका, जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया और धक्का देकर गिरा दिया। साथ ही उनके पुत्र को जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।
महिला का कहना है कि आरोपी एक प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्ति हैं, जिससे उन्हें और उनके परिवार को लगातार खतरा बना हुआ है।

बचाव पक्ष का दावा — “राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया”
अभियुक्त की ओर से अदालत में प्रस्तुत प्रार्थना पत्र में कहा गया कि उन्हें राजनीतिक रंजिश के तहत झूठा फंसाया गया है। बचाव पक्ष का कहना है कि कथित घटना पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा है।
गिरफ्तारी को लेकर उठाए सवाल
बचाव पक्ष ने दावा किया कि मनोज यादव 12 फरवरी 2026 की शाम अपने घर से लखनऊ में निमंत्रण में जाने की बात कहकर निकले थे। उनकी लोकेशन बीबीडी, लखनऊ क्षेत्र में शाम 4:25 बजे से रात 7 बजे तक पाई गई और उसके बाद बाराबंकी में दर्शाई गई।
अधिवक्ता संतशरण यादव (संजय बाबा) ने तर्क दिया कि गिरफ्तारी की वास्तविक तिथि और दर्ज तिथि में अंतर है, जिससे पूरी कार्यवाही पर सवाल खड़े होते हैं।
एफआईआर में देरी पर आपत्ति
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि कथित घटना स्थल थाना क्षेत्र से मात्र दो किलोमीटर दूर है, फिर भी 3-4 माह बाद रिपोर्ट दर्ज कराई गई, जिसका कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया।
साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि घटना स्थल भीड़भाड़ वाला चौराहा है, जहां ऐसी घटना होना संभव नहीं प्रतीत होता और कोई स्वतंत्र साक्षी भी प्रस्तुत नहीं किया गया है।

किन धाराओं में दर्ज है मुकदमा?
अभियुक्त के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं सहित एससी/एसटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। बचाव पक्ष ने आरोप लगाया कि कुछ धाराओं में बिना पर्याप्त आधार के बदलाव किया गया है।
अभियुक्त 13 फरवरी 2026 से जिला कारागार में निरुद्ध थे। अदालत ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना जमानत याचिका स्वीकार कर ली।
आगे क्या?
मामले की विवेचना अभी प्रचलित है। पुलिस को तीन दिन की रिमांड के दौरान शेष साक्ष्य संकलित कर अदालत में रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस मामले पर सभी की निगाहें बनी हुई हैं।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद














