Barabanki: शहर के लखपेड़ाबाग में पानी कनेक्शन के लिए खोदा गया गड्ढा अधूरा छोड़ने से लोगों में नाराजगी।
नगर पालिका पर लापरवाही के आरोप, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 26 मार्च 2026
बाराबंकी शहर के मोहल्ला लखपेड़ाबाग स्थित लाल कोठी के पास नगर पालिका परिषद नवाबगंज द्वारा पानी कनेक्शन के लिए खोदा गया गड्ढा अधूरा छोड़ दिए जाने से स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली।
यह लापरवाही न केवल राहगीरों के लिए परेशानी का कारण बनी, बल्कि संभावित हादसों का खतरा भी बढ़ा दिया।

अधूरा कार्य छोड़ने से बढ़ी परेशानी
गड्ढा खोदकर मौके से चले गए कर्मचारी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इलाके के कुछ घरों को पानी का कनेक्शन देने के लिए नगर पालिका की टीम ने सड़क पर गड्ढा खोदा था।
लेकिन हैरानी की बात यह रही कि कार्य को उसी दिन पूरा नहीं किया गया और गड्ढा खुला छोड़कर कर्मचारी वहां से चले गए।
इस कारण पूरे दिन लोगों को आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ा और शाम होते-होते स्थिति और ज्यादा चिंताजनक हो गई।

स्थानीय लोगों में नाराजगी, उठे सुरक्षा पर सवाल
“कम से कम बैरिकेडिंग तो होनी चाहिए थी”
शाम के समय स्थानीय निवासियों ने नगर पालिका की इस कार्यशैली पर कड़ा विरोध जताया।
लोगों का कहना है कि अगर किसी कारणवश कार्य अधूरा रह जाता है, तो कम से कम गड्ढे के आसपास बैरिकेडिंग या चेतावनी संकेत लगाए जाने चाहिए थे, ताकि कोई दुर्घटना न हो।
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि नगर पालिका की ओर से इस तरह की लापरवाही पहले भी कई बार देखने को मिल चुकी है।

अधिकारियों ने दिया कार्रवाई का आश्वासन
“मामले की जानकारी मिलते ही दिए गए निर्देश”
इस संबंध में जब नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि उन्हें इस घटना की जानकारी अभी मिली है।
अधिकारियों के अनुसार, गड्ढे को तत्काल भरवाने के निर्देश संबंधित टीम को दे दिए गए हैं और जल्द ही समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।

बड़ा सवाल—क्या शिकायत के बाद ही जागता है प्रशासन?
इस पूरे मामले के बाद स्थानीय लोगों के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या नगर पालिका पहले से ही सुरक्षा उपायों को गंभीरता से नहीं लेती?
क्या हर बार शिकायत और विरोध के बाद ही कार्रवाई की जाती है?
लोगों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है, ऐसे में प्रशासन को समय रहते सतर्क होना जरूरी है।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद / उस्मान
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