Barabanki: हरख विकास खंड में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं।
परिवार रजिस्टर संशोधन और मृत्यु प्रमाण पत्र की नकल जैसे कार्यों के लिए भी लोगों को परेशान किया जा रहा है।
ब्लॉक में निजी व्यक्ति द्वारा काम कराए जाने, रिश्वत वसूली और नियमों के उल्लंघन के आरोप सामने आए हैं।

बाराबंकी, उत्तर प्रदेश | 14 मार्च 2026
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां एक ओर भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति की बात करते हैं, वहीं बाराबंकी जिले का विकास खंड हरख इन दिनों भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा में है।
आरोप है कि इस ब्लॉक में बिना रिश्वत दिए आम जनता के छोटे से छोटे काम भी नहीं किए जा रहे हैं। घूस न मिलने पर कर्मचारियों द्वारा लोगों को तरह-तरह के बहाने बनाकर टाल दिया जाता है और कई दिनों तक कार्यालय के चक्कर लगवाए जाते हैं।

परिवार रजिस्टर संशोधन के लिए पत्रकार को करनी पड़ी मशक्कत
जनपद के वरिष्ठ पत्रकार कामरान अल्वी के अनुसार उन्होंने अपनी ग्राम पंचायत तीरगांव के परिवार रजिस्टर में दर्ज अपनी पत्नी और बेटी के गलत नामों में संशोधन कराने तथा गांव के एक व्यक्ति के मृत्यु प्रमाण पत्र की प्रमाणित प्रति प्राप्त करने के लिए 24 फरवरी 2026 को हरख ब्लॉक में कार्यरत सचिव संस्कृति भटनागर से उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क किया।
सचिव ने उन्हें बताया कि वह फिलहाल क्षेत्र में हैं और ब्लॉक पहुंचकर उनकी सहयोगी से मिल लें, वह कार्य कर देगी। इसके बाद पत्रकार ने कलेक्ट्रेट स्थित जैन स्टाम्प की दुकान से आवेदन और नोटरी एफिडेविट तैयार कराए और करीब 3:40 बजे हरख ब्लॉक पहुंचे।

सचिव कार्यालय खाली, निजी व्यक्ति के माध्यम से लिया गया आवेदन
ब्लॉक पहुंचने पर सचिव का कमरा खाली मिला। फोन करने पर सचिव ने बताया कि “दिनेश” नाम का व्यक्ति वहां आ रहा है, उसे आवेदन दे दें।
कुछ देर बाद दिनेश नाम का व्यक्ति आया और दोनों आवेदन ले लिए। बताया गया कि सचिव की सहायक लड़की अलमारी की चाबी लेकर घर जा चुकी है और दूसरी चाबी सचिव के पास है, इसलिए उनके आने पर ही काम होगा।
करीब दो घंटे इंतजार के बाद भी काम नहीं हुआ। बाद में बताया गया कि सचिव बीडीओ की मीटिंग में हैं।

कैंटीन में बेटे को खाना खिलाती मिलीं सचिव
कुछ देर बाद जब सचिव के कमरे को बंद किया जाने लगा तो पता चला कि सचिव ब्लॉक परिसर में स्थित प्रेरणा कैंटीन में अपने बेटे को खाना खिला रही हैं।
करीब 20 मिनट इंतजार के बाद जब पत्रकार ने उनसे परिवार रजिस्टर संशोधन और मृत्यु प्रमाण पत्र की प्रमाणित प्रति दिलाने का अनुरोध किया तो उन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया कि आवेदन के साथ लगे आधार कार्ड में गांव की बजाय शहर का पता दर्ज है।

अधिनियम का हवाला देने के बाद भी नहीं हुआ काम
पत्रकार कामरान अल्वी ने सचिव को बताया कि उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम 1947 के नियम 73 तथा उत्तर प्रदेश पंचायती राज (कुटुम्ब रजिस्टरों का अनुरक्षण) नियमावली 1970 के नियम 6 के अनुसार यदि नाम पहले से परिवार रजिस्टर में दर्ज है तो संशोधन के लिए वर्तमान में उसी गांव में निवास करना अनिवार्य नहीं है।
इसके बावजूद सचिव द्वारा कार्य करने से साफ मना कर दिया गया।

उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम से अनभिज्ञ दिखी बीडीओ प्रीति वर्मा
इसके बाद पत्रकार बीडीओ प्रीति वर्मा के कार्यालय पहुंचे और पूरी जानकारी दी। आरोप है कि बीडीओ ने भी सचिव का ही पक्ष लिया।
काफी बहस के बाद उन्होंने दोनों आवेदन सचिव को यह कहते हुए दे दिए कि एडीओ पंचायत से सलाह लेकर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
10 मार्च को रजिस्टर्ड डॉक से मिला 25 फरवरी को भेजा गया पत्र
10 मार्च को सचिव की ओर से रजिस्टर्ड डाक द्वारा एक पत्र भेजा गया। जो 25 फरवरी 2026 को जारी और 7 मार्च 2026 समय 12:33 बजे हरख पोस्ट ऑफिस से पोस्ट किया गया था। जिसमें कहा गया कि स्थलीय निरीक्षण में संबंधित व्यक्ति गांव में निवास करते नहीं पाए गए हैं, इसलिए तीन दिन के भीतर साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएं।


मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई शिकायत का फर्जी निस्तारण
पत्रकार कामरान अल्वी ने बताया कि उन्होंने 25 फरवरी 2026 को मुख्यमंत्री पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई और परिवार रजिस्टर संशोधन तथा नकल जारी कराने की मांग की। जिसकी जांच जिला पंचायत राज अधिकारी को सौंपी गई थी।
DPRO, ने भी बिना आवेदक से संपर्क किए ही मुख्यमंत्री पोर्टल पर दर्ज शिकायत का फर्जी तरीके से दिनांक 10 मार्च 2026 को निस्तारण सहायक विकास अधिकारी की भ्रामक आख्या के आधार पर कर दिया।

जांच प्रक्रिया पर भी उठे कई सवाल
इस पूरे प्रकरण में कई सवाल उठ रहे हैं:
आवेदन में शहर का पता तो स्थलीय जांच गांव में क्यों की गई?
जब आवेदक द्वारा अपने आवेदन और नोटरी एफिडेविट दोनों में ही स्पष्ट रूप से शहर का पता दिया गया था, तो सचिव द्वारा कथित स्थलीय निरीक्षण गांव में क्यों किया गया?
24 फरवरी की शाम आवेदन देने के बाद उसी दिन या अगले दिन जांच कैसे कर ली गई?
24 फरवरी 2026 को शाम करीब 6:30 से 7:00 बजे के बीच बीडीओ हरख को दोनों आवेदन दिए गए थे, तो सचिव द्वारा स्थलीय निरीक्षण 24 फरवरी को ही किया गया या 25 फरवरी को?
25 फरवरी की तारीख वाले पत्र को 7 मार्च को रजिस्टर्ड डाक से क्यों भेजा गया?
सचिव संस्कृति भटनागर द्वारा रजिस्टर्ड डाक से भेजे गए पत्र पर 25 फरवरी 2026 की तारीख दर्ज है, जबकि लिफाफे पर हरख पोस्ट ऑफिस की जो रसीद चस्पा है उस पर बुकिंग की तारीख 7 मार्च 2026 और समय करीब 12:33 बजे दर्ज है। ऐसे में सवाल उठता है कि 25 फरवरी का कंप्यूटर टाइप्ड पत्र 7 मार्च को रजिस्टर्ड डाक से क्यों भेजा गया?
सरकारी कार्यालय में निजी व्यक्ति से काम कराना क्या नियमों का उल्लंघन नहीं है?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सरकारी कार्यालयों में निजी व्यक्तियों के कार्य करने पर सख्त पाबंदी लगाए जाने के बावजूद सचिव द्वारा दिनेश नाम के निजी व्यक्ति से कार्यालय में काम कराया जा रहा है। आरोप है कि यह व्यक्ति लोगों से काम के बदले पैसे की मांग करता है। ग्रामीणों का कहना है कि बिना “चढ़ावा” दिए कोई भी फाइल आगे नहीं बढ़ती।
उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली का उल्लंघन
कार्यस्थल पर बच्चों को लाने की सामान्यतः मनाही के बावजूद सचिव संस्कृति भटनागर अपने पुत्र को अक्सर अपने साथ कार्यालय लेकर आती हैं। आरोप है कि वह अधिकांश समय अपने पुत्र की देखभाल में व्यतीत करती हैं और कई बार बैठकों में भी उसे साथ लेकर पहुंचती हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उनका जनता के कामों पर ध्यान कम और व्यक्तिगत गतिविधियों पर अधिक समय खर्च होता है। ब्लॉक परिसर और ग्राम पंचायतों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज से इसकी पुष्टि होने की बात भी कही जा रही है।
उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम का उल्लंघन
उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम 1947 के नियम 73 तथा उत्तर प्रदेश पंचायती राज (कुटुम्ब रजिस्टरों का अनुरक्षण) नियमावली 1970 के नियम 6 के तहत संशोधन की स्पष्ट व्यवस्था होने के बावजूद आवेदन पर कार्रवाई न करना क्या नियमों का उल्लंघन नहीं है?

भ्रष्टाचार से त्रस्त ग्रामीणों में आक्रोश
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बीडीओ प्रीति वर्मा के कार्यकाल में हरख ब्लॉक में भ्रष्टाचार चरम पर है। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां बिना “चढ़ावा” दिए कोई भी कार्य आसानी से नहीं होता और कर्मचारी आम लोगों से सीधे मुंह बात तक नहीं करते।
वहीं ब्लॉक के कुछ ग्राम प्रधानों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि विभिन्न सरकारी योजनाओं में भी बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हो रही हैं। उनका कहना है कि यदि उच्च स्तरीय जांच समिति द्वारा हरख ब्लॉक के कार्यकाल की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं।
ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
रिपोर्ट – मंसूफ अहमद











